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    पवित्र रमज़ान-४

    Rate this post पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम का कथन है कि जब कभी कोई अनाथ रोता है तो आकाश हिल जाता है और ईश्वर कहता है कि किसने मेरे दास और माता पिता को खो देने वाले बच्चे को रुलाया है? मुझे […]

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    पवित्र रमज़ान-३

    Rate this post रमज़ान के इस पवित्र महीने में आइए हम क़ुरआन के सूरे हम्द की छठी और सूरए बक़रह की आयत संख्या २८६ के शब्दों में ईश्वर से दुआ करें-हे ईश्वर सीधे मार्ग पर हमारा मार्गदर्शन कर।हे पालनहार, यदि हम भूल गए हैं या हमने ग़लत क़दम उठाए हैं तो हमसे पूछताछ न कर। […]

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    पवित्र रमज़ान-२

    Rate this post रोज़े के बहुत अधिक शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ हैं। इस्लाम के महापुरूषों ने रोज़े को शरीर को स्वास्थ्य प्रदान करने वाला, आत्मा को सुदृढ़ करने वाला, पाश्विक प्रवृत्ति को नियंत्रित करने वाला, आत्म शुद्धि करने वाला और बेरंग जीवन में परिवर्तन लाने वाला मानते हैं जो सामाजिक स्वास्थ्य की भूमिका प्रशस्तकर्ता है। […]

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    पवित्र रमज़ान-१

    Rate this post पवित्र रमज़ान का महीना, ईश्वर के बनाए हुए महीनों में सर्वोत्तम है। पवित्र क़ुरआन इसी महीने में उतरा है। धार्मिक कथनों में आया है कि आकाश और स्वर्ग के द्वार इस महीने में खोल दिये जाते हैं जबकि नरक के द्वार बंद हो जाते हैं। क़ुरआने मजीद की आयतों में आया है […]

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    रोज़ा और रमज़ान का मुबारक महीना

    Rate this post क़ुरआने मजीद के सूरए बक़रह की आयत नंबर १८३ में कहा गया हैः हे ईमान लाने वालो, रोज़ा तुम पर वाजिब कर दिया गया है जैसाकि तुम से पहले वालों के लिए अनिवार्य किया गया था ताकि तुम पापों से बचने वाले बन जाओ। यह आयत, क़ुरआने मजीद की उन महत्वपूर्ण आयतों […]

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    रोज़े के स्टेप

    Rate this post ’’یَا أَیُّهَا الَّذِینَ آمَنُوا كُتِبَ عَلَیكُمُ الصِّیَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى الَّذَینَ مِن قَبلِكُم‘‘ इस आयत में यह कहा गया है कि अल्लाह नें ईमान वालों पर रोज़ा वाजिब किया है जिस तरह इस्लाम से पहले वाली क़ौमों पर वाजिब किया गया था। जब से इन्सान है और जब तक इन्सान रहेगा बहुत […]

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    पवित्र रमज़ान-५

    Rate this post पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने कहा है शैतान मनुष्य के शरीर में रक्त की भॉति दौड़ता है तो उस के मार्ग को भूख द्वारा संकरा करो।शैतान अर्थात मनुष्य को बुराई की ओर ले जाने वाला अस्तित्व शैतान का कोई एक रुप नही होता। शैतान अर्थात बहकाने वाला तो फिर हमारे आस […]

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    पवित्र रमज़ान-४

    Rate this post पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम का कथन है कि जब कभी कोई अनाथ रोता है तो आकाश हिल जाता है और ईश्वर कहता है कि किसने मेरे दास और माता पिता को खो देने वाले बच्चे को रुलाया है? मुझे अपने सम्मान और तेज […]

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    पवित्र रमज़ान-३

    Rate this post रमज़ान के इस पवित्र महीने में आइए हम क़ुरआन के सूरे हम्द की छठी और सूरए बक़रह की आयत संख्या २८६ के शब्दों में ईश्वर से दुआ करें-हे ईश्वर सीधे मार्ग पर हमारा मार्गदर्शन कर।हे पालनहार,यदि हम भूल गए हैं या हमने ग़लत क़दम उठाए हैं तो हमसे पूछताछ न कर। हमारे लिए भारी कर्तव्य […]

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    पवित्र रमज़ान-२

    Rate this post रोज़े के बहुत अधिक शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ हैं। इस्लाम के महापुरूषों ने रोज़े को शरीर को स्वास्थ्य प्रदान करने वाला, आत्मा को सुदृढ़ करने वाला, पाश्विक प्रवृत्ति को नियंत्रित करने वाला,आत्म शुद्धि करने वाला और बेरंग जीवन में परिवर्तन लाने वाला मानते हैं जो सामाजिक स्वास्थ्य की भूमिका प्रशस्तकर्ता है। रोज़े के उपचारिक लाभ, जिनकी गणना उसके शारीरिक तथा भौतिक लाभों […]

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    पवित्र रमज़ान-१

    Rate this post पवित्र रमज़ान का महीना, ईश्वर के बनाए हुए महीनों में सर्वोत्तम है। पवित्र क़ुरआन इसी महीने में उतरा है। धार्मिक कथनों में आया है कि आकाश और स्वर्ग के द्वार इस महीने में खोल दिये जाते हैं जबकि नरक के द्वार बंद हो जाते हैं। क़ुरआने मजीद की आयतों में आया है कि रमज़ान महीने की रातोंमें एक […]

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    लिबास के आदाब और आरास्तगी ए लिबास की फ़ज़ीलत

    Rate this post मोतबर हदीस में इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) से नक़्ल है कि ख़ुदा वंदे आलम अपने किसी बंदे को नेमत अता फ़रमाए और उस नेमत का असर उस पर ज़ाहिर हो तो उस को ख़ुदा का दोस्त कहेगें और उस का हिसाब अपने परवरदिगार का शुक्र अदा करने वालों में होगा और अगर […]

  •  क़ियामत और शफ़ाअत
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    क़ियामत और शफ़ाअत

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि क़ियामत के दिन पैग़म्बर,आइम्मा-ए-मासूमीन और औलिया अल्लाह अल्लाह के इज़्न से कुछ गुनाहगारों की शफ़ाअत करें गे और वह अल्लाह की माफ़ी के मुस्तहक़ क़रार पायें गे। लेकिन याद रखना चाहिए कि यह शफ़ाअत फ़क़त उन लोगों के लिए है जिन्होंनें गुनाहों की ज़्यादती की वजह से अल्लाह और औलिया अल्लाह से […]

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    मआद की दलीलें रौशन हैं

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि मआद की दलीलें बहुत रौशन हैं क्यों कि- क)इस दुनिया की ज़िन्दगी इस बात की तरफ़ इशारा करती है कि ऐसा नही हो सकता कि यह दुनिया जिस में इंसान चन्द दिनों के लिए आता है,मुश्किलात के एक बहुत बड़े अम्बोह के दरमियान ज़िन्दगी बसर करता है और मर जाता […]

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    मआद (क़ियामत) के बग़ैर ज़िन्दगी बेमफ़हूम है

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि मरने के बाद एक दिन तमाम इंसान ज़िन्दा होगें और आमाल के हिसाब किताब के बाद नेक लोगों को जन्नत में व गुनाहगारों को दोज़ख़ में भेज दिया जायेगा और वह हमेशा वहीँ पर रहे गें। “अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवा लयजमअन्नाकुम इला यौमिल क़ियामति ला रैबा फ़ीहि।”[89] यानी अल्लाह के अलावा कोई […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-13

    Rate this post पैग़म्बरों, ईश्वरीय दूतों और महान हस्तियों की क़ब्रों पर मज़ार एवं मस्जिद का निर्माण वह कार्य है जिसके बारे में वहाबी कहते हैं कि यह चीज़ धर्म में नहीं है और इसके संबंध में वे अकारण ही संवेदनशीलता दिखाते हैं। यह बात सबसे पहले वहाबियत की बुनियाद रखने वाले इब्ने तैय्मिया और […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-12

    Rate this post   ज़ियारत व दर्शन का इस्लाम में विशेष स्थान है और वह मुसलमानों के निकट एक अच्छा कार्य है। मुसलमान शफ़ाअत अर्थात प्रलय के दिन सिफारिश/ तवस्सुल अर्थात सहारा व माध्यम और भले लोगों की क़ब्रों के सम्मान को ऐसी चीज़ मानते हैं जिसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है। पैग़म्बरे इस्लाम […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-11

    Rate this post पिछले कार्यक्रम में हमने कहा कि जिन विषयों के बारे में वह्हाबियों ने अत्यधिक हो हल्ला मचाया है उनमें से एक ईश्वर के प्रिय बंदों से तवस्सुल या अपने कार्यों के लिए उनके माध्यम से ईश्वर से सिफ़ारिश करवाना है। सलफ़ी, तवस्सुल को एकेश्वरवाद के विरुद्ध बताते हैं और उनका कहना है […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-10

    Rate this post इस्लाम धर्म में शिफ़ाअत ईश्वर की ओर से मनुष्यों पर एक विभूती बतायी गयी है। जिन लोगों ने उपासना के बंधन को नहीं तोड़ा है और अनेकेश्वरवाद का शिकार नहीं हुए हैं, ईश्वर के निकटवर्ती बंदों की शिफ़ाअत उनके लिए आशा की किरण है जो निराशा को उनके दिलों से दूर करती […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-9

    Rate this post  इस्लाम धर्म में शिफ़ाअत ईश्वर की ओर से मनुष्यों पर एक विभूती बतायी गयी है। जिन लोगों ने उपासना के बंधन को नहीं तोड़ा है और अनेकेश्वरवाद का शिकार नहीं हुए हैं, ईश्वर के निकटवर्ती बंदों की शिफ़ाअत उनके लिए आशा की किरण है जो निराशा को उनके दिलों से दूर करती […]

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