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    न्याय

    Rate this post न्याय लेखकः सैयद मुर्तज़ा मजताहेदी सीसतानी अनूवादकः जैन अलवी जौनपुरी कुम, ईरान

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    बंदगी

    Rate this post ख़ुदा वन्दे आलम ने अपनी किताब क़ुरआन मजीद में फ़रमाया हैः “हमने जिन व इन्स को अपनी इबादत के लिए पैदा किया है।” ताकि वह इसके ज़रिए यानी इबादत और बंदगी के ज़रिए ख़ुदा के क़रीब जो कि इंसानी कमाल की आख़िरी मंज़िल है, उस तक पहुँच सके। हम देखते हैं कि […]

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    पुले सिरात की हक़ीक़त (वास्तविक्ता) क्या है

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    ग़ीबत

    Rate this post ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है। पीठ पीछे बुराई की परिभाषा में कहा गया […]

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    लाउडस्पीकर का ज़ालिमाना इस्तेमाल

    Rate this post ज़ुल्म सिर्फ़ यह नहीं है कि किसी का माल छीन लिया जाए या उसे कोई ज़िस्मानी तकलीफ़ पहुँचा दी जाए बल्कि अरबी ज़बान में ज़ुल्म, किसी भी चीज़ को बेजगह इस्तेमाल करने को कहते हैं क्योंकि किसी चीज़ का बेमहल और ग़लत इस्तेमाल यक़ीनन किसी न किसी को तकलीफ़ पहुँचाने की वजह […]

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    आत्महत्या

    Rate this post आत्महत्या भी इस ज़माने के समाजी समस्याओं में सबसे ऊपर है, आज हिन्दुस्तान ही में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोग आत्महत्या कर रहे हैं, और जान जैसी क़ीमती चीज़ ख़ुद अपने हाथों नष्ट कर रहे हैं। आत्महत्या की एक बड़ा कारण घरेलू समस्याएं भी हैं। आम तौर पर औरतें जहेज़ के […]

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    हसद

    Rate this post हसद का मतलब होता है किसी दूसरे इंसान में पाई जाने वाली अच्छाई और उसे हासिल नेमतों की समाप्ति की इच्छा रखना। हासिद इंसान यह नहीं चाहता कि किसी दूसरे इंसान को भी नेमत या ख़ुशहाली मिले। यह भावना धीरे धीरे हासिद इंसान में अक्षमता व अभाव की सोच का कारण बनती […]

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    शिया समुदाय

    Rate this post इस्लाम का आरम्भ हिजाज़ में मक्के नामी शहर से हुआ। और इस धर्म के फैलाने वाले हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम हैं। मक्का वह मुक़द्दस (पवित्र) शहर है जिसमें हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की इबादत के लिए काबे नामक एक महान व अज़ीम इबादतगाह बनाई थी। हज़रत मुहम्द […]

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    डिक्शनरी में शिया का मतलब

    Rate this post अरबी डिक्शनरीयों में शिया शब्द, किसी एक इंसान या कई इंसानों का किसी दूसरे की बात मानना, किसी की मदद व सपोर्ट करना, तथा कहने या करने में समन्वयन और हमाहंगी के मतलब में इस्तेमाल किया जाता है। नीचे कुछ मशहूर डिक्शनरीयों के नमूने प्रस्तुत किए जा रहे हैं। القاموس: شيعة الرجل […]

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    पवित्र ईदे फ़ित्र

    Rate this post १८ ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ईश्वर के आदेश पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम ईदे फ़ित्र मुसलमानों की एकता व सहृदयता का प्रतीक ईदे फ़ित्र की सुगंध पवित्र […]

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    १८ ज़िलहिज्जा पवित्र ईदे ग़दीर

    Rate this post १८ ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ईश्वर के आदेश पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ग़दीरे ख़ुम नामक स्थान पर एक लाख […]

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    अस्रे हाज़िर का जवान और आईडियल

    Rate this post आज के तरक़्क़ी याफ़ता दौर में हर नौ जवान को अपने आईडियल की तलाश है। कोई किसी फ़नकार में अपना आईडियल तलाश करता है तो कोई हिदायत कार में अपना आईडियल तलाश करने की कोशिश करता है और फिर उसी के तर्ज़ पर अपनी ज़िन्दगी गुज़ारने की कोशिश करता है और यह कोशिश करता है […]

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    कैसी होगी मौत के बाद की जिंदगी

    Rate this post यह सवाल हमेशा से इंसान को परेशान करता रहा है। दुनिया का हर मज़हब मौत के बाद जिंदगी का यकीन दिलाता है जबकि मज़हब से इतर लोगों का मानना है कि मौतके बाद जिस्म सड़ गल कर मिट्‌टी हो जाता है और उसके बाद दूसरी जिंदगी का सवाल ही नहीं उठता। इस्लाम इसका यकीन दिलाता है कि मौत […]

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    माहेरीने नफ़सीयात की सर्च और उनके खुलासे

    Rate this post इंसानी रूह के विभिन्न पहलुओं और उसकी वास्तविक इच्छाओं पर रीसर्च भी इस बात का स्पष्ट सबूत है कि धार्मिक एतेक़ाद और दीन एक फ़ितरी मसअला है। चार मशहूर व मारूफ़ एहसास (या चार उच्च इच्छाऐं (ख़्वाहिशात) और इंसानी रूह के बारे में नफ़सीयाती माहेरीन ने जो चार पहलू चीज़ें बयान की […]

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    अल्लाह की पहचान

    Rate this post दीन का आधार सृष्टि के रचयता के वुजूद पर विश्वास रखना है और भौतिकवादी व इलाही विचारधारा के बीच मुख्य अंतर भी इसी विश्वास का होना और न होना है। इस आधार पर सत्य के खोजी के सामने जो पहली बात आती है और जिस का जवाब उसके लिए किसी भी दूसरे […]

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    एक हतोत्साहित व्यक्ति

    Rate this post कभी कभी हमारे जीवन में ऐसी घटनाएं घटती हैं कि जो जाने अन्जाने हमारी भावनाओं को उक्साने का कारण बनती हैं। इनमें से एक, कि जिसका सहन करना अत्यन्त कठिन होता है, हतोत्साह नामक स्थिति है। एकहतोत्साहित व्यक्ति बहुत ही सुस्त हो जाता है, उसे प्रसन्नता का आभास नहीं होता, वो समझता […]

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    पवित्र रमज़ान-29

    Rate this post पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की मकारेमुल अख़लाक़ नामक प्रख्यात दुआ में कहते हैं प्रभुवर! अपने प्रेम के लिए मेरे समक्ष एक सरल मार्ग खोल दे और उसके माध्यम से लोक-परलोक की भलाई को मेरे लिए संपूर्ण कर दे। मनुष्यों व पशुओं […]

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    पवित्र रमज़ान-28

    Rate this post पवित्र रमज़ान के महीने के अंतिम दिन हैं और इन दिनों में हम भली भांति यह समझ सकते हैं कि रोज़ा, मनुष्य की आतंरिक इच्छाओं के सामने एक मज़बूत ढाल की भांति हैं। मनुष्य रोज़ा रख कर अपने मन को, अनुचित इच्छाओं से रोकता है और अपने मन मस्तिष्क को हर प्रकार […]

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    पवित्र रमज़ान-27

    Rate this post पैगम्बरे इस्लाम (स) का कथन हैः “जो व्यक्ति भीषण गर्मी में रोज़े रखे और उसे प्यास लगे तो ईश्वर हज़ार फ़रिश्तों को भेजता है कि उसके चेहरे को सहलायें और उससे अच्छी बातें करें यहां तक कि (इफ़तार का समय आ जाये) वह इफ़तार कर ले, फिर ईश्वर कहता हैः हे मेरे […]

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    पवित्र रमज़ान-25

    Rate this post हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम दुआ के इस भाग में कहते हैं” पालनहार! यदि मैं दुःखी होता हूं तो तू मेरा आश्रय है और यदि मैं वंचित होता हूं तू मेरी आशा व भरोसा है” इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने अपनी दुआ में उद्दा शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ वह धन व […]

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