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    पवित्र रमज़ान-24

    Rate this post   पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का कथन हैः ईश्वर कहता है कि बंदों के सभी भले कर्मों पर दस से लेकर सात सौ गुना अधिक तक पारितोषिक है सिवाए रोज़े के कि उसका पारितोषिक मैं स्वयं दूंगा।   पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम […]

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    पवित्र रमज़ान-23

    Rate this post पवित्र रमज़ान-23 इमाम सज्जाद(अ) मकारेमुल अख़लाक़ नामक दुआ में एक स्थान पर ईश्वर से विनती करते हुये कहते हैः “हे पालनहार, मोहम्मद और उनके परिजनों पर सलाम भेज तथा मुझे जीवन के सभी कामों में सन्तुलन एवं मध्यमार्ग से लाभान्वित कर।”   सन्तुलन एवं मध्य मार्ग, अतिवाद से दूरी का नाम है […]

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    पवित्र रमज़ान-22

    Rate this post पवित्र रमज़ान-22 रमज़ान के पवित्र महीने में यह ऐसा समय है जब दयालु व तत्वदर्शी ईश्वर की दया व कृपा ने हर समय से अधिक उसके बंदों को अपना पात्र बना रखा है। रमज़ान के पवित्र महीने के इन दिनों के शबे क़द्र होने की अधिक संभावना है। शबे क़द्र वह रात […]

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    पवित्र रमज़ान-20

    Rate this post इमाम सज्जाद(अ) दुआ के इस भाग में ईश्वर से विनती करते हुये कहते हैः “हे पालनहार, मोहम्मद और उनके परिजनों पर सलाम भेज तथा मुझे जीवन के सभी कामों में सन्तुलन एवं मध्यमार्ग से लाभान्वित कर।” सन्तुलन एवं मध्य मार्ग, अतिवाद से दूरी का नाम है और यही वह सीधा रास्ता है […]

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    पवित्र रमज़ान-19

    Rate this post आज रमज़ान की १९ तारीख़ है।  वही तारीख़ जब वर्ष ४० हिजरी क़मरी में सुबह की नमाज़ पढ़ते समय ईश्वर के महान साहसी एवं न्यायी दास के सिर पर मानव समाज के अत्यंत तुच्छ व्यक्ति की द्वेषपूर्ण तलवार ने वार किया।  उस रात के बारे में इतिहास में आया है कि उस […]

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    पवित्र रमज़ान-18

    Rate this post इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम इस दुआ में एक स्थान पर ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते हैः हे पालनहार! इस स्थिति में कि मेरा मार्गदर्शन तेरे लिए संभव है, पथभ्रष्टता की ओर मेरा झुकाव न हो। अरबी भाषा के ज़लाल शब्द का अर्थ होता है सीधे मार्ग से हटना और इसका विलोम […]

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    पवित्र रमज़ान-17

    Rate this post इस साल पवित्र रमज़ान गर्मियों में पड़ा है।  विश्व के बहुत से देशों में लोग भीषण गर्मी में रोज़े रख रहे हैं।  निश्चित रूप से इस गर्मी में रोज़े का सवाब अर्थात पुण्य भी अधिक है।  इस बारे में पैग़म्बरे इस्लाम (स) का कथन है कि गर्मी के दिनों में रोज़े रखना, […]

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    धर्म ज्योति-6

    Rate this post नैतिक आचरण के बारे में बात करने से पहले स्वस्थ मनुष्य के रूप में धर्म में गहरी आस्था रखने वाले मनुष्य के विचारों एवं अनुभूतियों के बारे में विवरण पेश करना ज़रूरी लगता है। इसलिए कि नैतिक सकारात्मक आचरण एवं व्यवहार की उत्पत्ति मनुष्य के विश्वास और उसकी मनोवृत्ति की ही उपज […]

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    ईश्वर के बारे में सकारात्मक विचार के सुपरिणाम

    Rate this post ईश्वर के बारे में सकारात्मक विचार, ईश्वर को प्रसन्न करने के मार्ग में व्यवहार करने के लिए मनुष्य को प्रोत्साहित करता है, और सुखमय जीवन एवं नेक कार्य करने के लिए आवश्यक शांति एवं सुख प्रदान करता है। पैग़म्बरे इस्लाम का कथन है कि उस ईश्वर की सौगंध कि जिसके अलावा कोई […]

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    धर्म ज्योति-4

    Rate this post भले लोग ग़ुस्सा पी लेते हैं क्रोध, मनुष्य का आतंरिक उबाल होता है।  यदि उसपर नियंत्रण न किया जाए तो उसके बड़े भयानक और कभी कभी तो मनुष्य और समाज के लिए एसे परिणाम सामने आ सकते हैं जिनकी कभी क्षतिपूर्ति भी संभव नहीं होती। धार्मिक शिक्षाओं में भी इस बात पर […]

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    धर्म ज्योति-3

    Rate this post इस्लाम की नैतिक व्यवस्था, एकेश्वरवाद के दृष्टिकोण पर आधारित है। इस अर्थ में कि यह संसार एक तत्वदर्शितापूर्ण इरादे से अस्तित्व में आया है और सृष्टि की व्यवस्था दया, भलाई और सभी अस्तित्वों को उनकी योग्य परिपूर्णता तक पहुंचाने पर आधारित है। यदि नैतिक प्रशिक्षण और उसके सिद्धांत धर्म व धार्मिक आस्थाओं […]

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    धर्म ज्योति-2

    Rate this post 1970 के दशक में तेल के उत्पादन और उसके मूल्य में वृद्धि के साथ ही ईरान के अत्याचारी शासक मुहम्मद रज़ा पहलवी को अधिक शक्ति का आभास हुआ और उसने अपने विरोधियों के दमन और उन्हें यातनाए देने में वृद्धि कर दी। शाह की सरकार ने पागलपन की सीमा तक पश्चिम विशेष […]

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    धर्म ज्योति-1

    Rate this post इस समय नैतिकता के सिद्धांतों व मानकों को हर समय से अधिक भौतिक हितों और स्वतंत्रता, मानवता प्रेम, न्याय एवं मानवाधिकार जैसे विषयों की भेंट चढ़ाया जा रहा है। आज हम एक ऐसे समय में जीवन बिता रहे हैं जिसमें नैतिक बुराइयां और परिवारों का विघटन न केवल पश्चिमी समाजों या तथाकथित […]

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    अच्छी बातें

    Rate this post   इंसान की क़ाबिलियत उसके अख़लाक़ से ज़ाहिर होती है। इंसान की फ़ितरत उसके किरदार से ज़ाहिर होती है। इंसान की नफ़रत उसके हसद से ज़ाहिर होती है। इंसान की जहालत उस के ग़ुस्से से ज़ाहिर होती है। इंसान की शफ़क़्क़त उसकी हमदर्दी से ज़ाहिर होती है। इंसान की ख़ुशी उसके जज़्बात […]

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    ज़मीन पर सजदा

    Rate this post सजदा उन अफ़आल (कामों) में सबसे उपर है जिनसे इंसान की बंदगी और विनम्रता का पता चलता है। सजदा नमाज़ का रुक्न (स्तम्भ कि जिसके छूटने पर नमाज़ सही नहीं रहेगी चाहे भूले ही से क्यों न हो।) है, नमाज़ी के लिये हर रकअत में दो सजदे बजा लाना वाजिब हैं यह […]

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    झूठ क्यों नहीं बोलना चाहिए

    Rate this post आम तौर पर झूठ किसी एक रूहानी कमज़ोरी की वजह से पैदा होता है यानी कभी ऐसा भी होता है कि इंसान ग़ुरबत और लाचारी से घबरा कर, दूसरे लोगों के उसको अकेले छोड़ देने की बुनियाद पर या फिर अपने ओहदे और मंसब की हिफ़ाज़त के लिए झूठ बोल देते हैं। […]

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    क़ज़ा नमाज़़

    Rate this post सवाल 521:  मैं 17 साल की उम्र तक एहतेलाम और ग़ुस्ल वग़ैरह के बारे में नहीं जानता था और उन उमूर के मुताल्लिक़ किसी से भी कोई बात नहीं सुनी थी ख़ुद भी जनाबत और गु़स्ल वाजिब होने के मानी नहीं समझता था लिहाज़ा क्या उस उमर तक मेरे रोज़े और नमाज़ों […]

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    दस मोहर्रम के सायंकाल को दो भाईयो की पश्चाताप 8

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारीयान   प्रारम्भ मे आप का इक़दाम, इस कुरूक्षेत्र और दस मोहर्रम के सायंकाल, कूफ़े की ओर आपक का ध्यान देना मार्ग मे घटित घटनाऐ एंव रास्ते भर आपका तज़क्कुर और याद दहानी करानाः   اَلاَمْرُ يَنْزِلُ مِنَ السَّماءِ وَكُلَّ يَوْم هُوَ […]

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    दस मोहर्रम के सायंकाल को दो भाईयो की पश्चाताप 7

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारीयान   जी हा, हे इस्लाम के प्रचारको ! तुम से इस आशा की किरन को कही कोई छीन ना ले, विभिन्न स्थानो पर सामने आने वाली समस्याओ से निराश ना होना, तुम्हारे हालात हज़रत मुहम्मद सललल्लाहोअलैहेवाआलेहिवसल्लम के ज़माने से अधिक कठिन नही है। कहते […]

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    दस मोहर्रम के सायंकाल को दो भाईयो की पश्चाताप 6

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारीयान   बुद्धि जो कि छुपी हुई है उसको  नूरे फ़िरासत और इमान (जो कि स्वयं कश्फ़ की साधारण शक्ति है) को पहले कश्फ़ करती है, उसके पश्चात नूरे नबूवत जो (मनुष्य की) सारी शक्तियो से ऊपर है रूहे रवान के स्थान को […]

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