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  •  इस्लाम में एकता के उपाय पैग़म्बर (स) के द्वारा
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    इस्लाम में एकता के उपाय पैग़म्बर (स) के द्वारा

    Rate this post इस्लामी जगत में एकता का उद्देश्य यह है कि मुसलमान अपनी धार्मिक आस्थाओं के पालन के साथ ही पवित्र क़ुरआन, पैग़म्बरे इस्लाम और एक क़िबला जैसे संयुक्त धार्मिक बिन्दुओं पर बल दें और विभिन्न धार्मिक, राजनैतिक और जातीय मतभेदों से बचें जिससे इस्लामी जगत कमज़ोर होगा। इस बात में शक नहीं कि […]

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    ईदे ग़दीर

    Rate this post पैग़म्बरे इस्लाम (स) का संपूर्ण जीवन एवं उसका एक एक क्षण अति महत्वपूर्ण तथा विशिष्ट आश्चर्यजनक घटनाओं से भरा हुआ है। इस लिए कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) के कथन न केवल क़ुराने मजीद की स्पष्ट आयतों के आधार पर हर प्रकार के लोभ व लालसा रहित होते हैं और ईश्वरीय संदेश अर्थात […]

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    हज़रत अली अलैहिस्सलाम

    Rate this post हम इस बात के लिए प्रसन्न और ईश्वर के कृतज्ञ हैं कि इस दिन काबे की दीवार में दरार पड़ी और न्याय में निखार आया।  सृष्टि ने पुनः बसंत का अनुभव किया और थकी हुई धरती का भाग्य जाग उठा। इतिहास के तपते हुए मरूस्थल पर न्याय की हरी-भरी छाव फैल गई। और सभी […]

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    शिया समुदाय की उत्पत्ति व इतिहास (2)

    Rate this post   रसूले अकरम (स.) के देहांत के बाद जब आपकी ख़िलाफ़त और उत्तराधिकार का मुद्दा सामने आया तो जो महोदय रसूले इस्लाम (स.) के युग में आपके प्रति सबसे अधिक निष्ठावान थे और आपके शिया समझे जाते थे उन्होंने इमामत के बारे में मौजूद नुसूस और हज़रत अली (अ.) के व्यक्तित्व की […]

  •  मजमूअऐ मक़ालाते इमामे महदी(अ)(2)
    मजमूअऐ मक़ालाते इमामे महदी(अ)(2)
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    मजमूअऐ मक़ालाते इमामे महदी(अ)(2)

    मजमूअऐ मक़ालाते इमामे महदी(अ)(2) 1 (20%) 1 vote (1)हुकूमत के नतीजे आप ने देखा होगा कि जो लोग अपनी हुकूमत बनाकर ताक़त को अपने हाथ में लेना चाहते हैं, वह पहले अपनी हुकूमत के उद्देश्यों का वर्णन नकरते हैं। कभी कभी तो ऐसा होता है कि वह उन उद्देश्यों तक पहुँचने के लिए अपनी योजनाओं […]

  •  मारेफते ग़दीर
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    मारेफते ग़दीर

    Rate this post ग़दीर और वहदते इस्लामी असरे हाज़िर में बाज़ लोग ग़दीर और हज़रते अली अलैहिस्सलाम की इमामत की गुफ़्तुगू (चूँकि इसको बहुत ज़माना गुज़र चुका है) को बेफ़ायदा बल्कि नुक़सानदेह समझते हैं, क्योकि यह एक तारीखी वाक़ेया है जिसको सदियाँ गुज़र चुकी हैं। यह गुफ़्तुगू करना कि पैग़म्बरे इस्लाम सल्ललाहो अलैहे व आलिहि […]

  •  अमर शौर्यगाथा
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    अमर शौर्यगाथा

    Rate this post 1 इमाम हुसैन की ज़रीह सन साठ हिजरी क़मरी है। कुछ ही दिन पहले अपने पिता मुआविया की मुत्यु के बाद यज़ीद विस्तृत सीमाओं वाले इस्लामी जगत की बागडोर पर क़ब्ज़ा जमा चुका है। वह शराब के नशे में धुत है और ठहाके लगा रहा है किंतु उसकी आंखों से भय व […]

  •  एक और आशूरा
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    एक और आशूरा

    Rate this post एक बार फिर मुहर्रम और आशूरा आने वाला है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत (बलिदान) से लेकर आज तक हज़ार से ज़्यादा बार आशूरा आ चुका है और हर बार मकतबे आशूरा की नई तालिमात बयान और आपके मानने वालों के सामने पेश की जाती हैं और इस तरह यह इंकेलाब (क्राँति) […]

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    पैग़म्बरे व इमाम सादिक़ के जन्म दिवस पर भव्य आयोजन

    Rate this post ईश्वर के अंतिम दूत और दया व स्नेह के प्रतीक पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम तथा उनके छठे उत्तराधिकारी इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर पूरे ईरान सहित विश्व के विभिन्न देशों में उत्सव व समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। […]

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    हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम जीवन परिचय व चारित्रिक विशेषताऐं

    Rate this post नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ) आपका नाम अली व आपके अलक़ाब अमीरुल मोमेनीन, हैदर, कर्रार, कुल्ले ईमान, सिद्दीक़,फ़ारूक़, अत्यादि हैं। माता पिता आपके पिता हज़रतअबुतालिब पुत्र हज़रत अब्दुल मुत्तलिब व आपकी माता आदरनीय फ़तिमा पुत्री हज़रतअसद थीं। जन्म तिथि व जन्म स्थान आप का जन्म रजब मास की 13वी तारीख को हिजरत से […]

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    बुराई के बदले भलाई की भावना

    Rate this post आदरनीय पैगम्बर की एक विशेषता बुराई का बदला भलाई से देना थी। जो उन को यातनाऐं देते थे, वह उन के साथ उनके जैसा व्यवहार नही करते थे। उनकी बुराई के बदले मे इस प्रकार प्रेम पूर्वक व्यवहार करते थे, कि वह लज्जित हो जाते थे। यहाँ पर उदाहरण स्वरूप केवल एक […]

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    हज़रत पैगम्बरे इस्लाम(स.) का जीवन परिचय व चरित्र चित्रण

    Rate this post नाम व अलक़ाब (उपाधियां) आपका नाम मुहम्मद व आपके अलक़ाब मुस्तफ़ा, अमीन, सादिक़,इत्यादि हैं। माता पिता हज़रत पैगम्बर के पिता का नाम  अब्दुल्लाह था जो ;हज़रत अबदुल मुत्तलिब के पुत्र थे। तथा पैगम्बर (स) की माता का नाम आमिना था, जो हज़रत वहाब की पुत्री थीं। जन्म तिथि व जन्म स्थान हज़रत […]

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    ज़ुबैर और ज़ुल्फ़ा

    Rate this post कितना अच्छा होता अगर तुम शादी कर लेते और अपना घर बसा लेते इस तरह तन्हाई की ज़िन्दगी से निजात मिल जाती और तुम्हारी शादी की ख़्वाहिश भी पूरी हो जाती और वही औरत दुनिया और आख़िरत के कामों में तुम्हारी मददगार साबित होती। या रसूल अल्लाह (स.) न मेरे पास माल […]

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    ज़माने की शिकायत

    Rate this post मुफ़ज़्ज़ल बिन क़ैस ज़िन्दगी की दुशवारी से दो चार थे और फ़क्र व तंगदस्ती कर्ज़ और ज़िन्दगी के अख़राजात से बहुत परेशान थ। एक दिन हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक अलैहिस्सलाम की ख़िदमत में हाज़िर हुए और अपनी बेचारगी और परेशानी बयान की, कि इतना मुझ पर कर्ज़ है और मैं नहीं जानता […]

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    सितारा शिनास

    Rate this post हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब अलैहिस्सलाम और उनके सिपाही घोड़ों पर सवार होकर नहरवान की तरफ़ रवाना होना ही चाहते थे कि अचानक असहाब में से एक अहम शख़्सियत वहाँ पहुची और अपने साथ एक शख़्स को लाई और कहा, या अमीरुल मोमिनीन ये शख़्स सितारा शिनास है, और आप […]

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    काज़ी का मेहमान

    Rate this post एक शख़्स आम मेहमान की हैसियत से हज़रत इमाम अली (अ.) के घर वारिद हुआ और कई दिन तक आप का मेहमान रहा, लेकिन वोह एक आदी मेहमान न था। बल्कि उसके दिल में एक बात थी, जिसका शुरू में इज़हार नहीं किया था। हकीकत ये थी कि ये शख़्स किसी दूसरे […]

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    पेंशन

    Rate this post एक नसरानी बूढ़े ने ज़िन्दगी भर मेहनत करके ज़हमतें उठाईं लेकिन ज़ख़ीरे के तौर पर कुछ भी जमा न कर सका, आख़िर में नाबीना भी हो गया। बूढ़ापा, नाबीनाई, और मुफ़लिसी सब एक साथ जमा हो गई थीं । भीख माँगने के सिवा अब उसके पास कोई दूसरा रास्ता न था इसलिए […]

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    हातिम का बेटा

    Rate this post तुलू ए इस्लाम और इस्लामी हुकूमत की तशकील पाने से पहले अरबों में कबीले की सरदारी की रस्म जारी थी। अरब वाले अपने सरदारों की इताअत और फ़र्माबरदारी करते थे और कभी-कभी उनको टैक्स वग़ैरा भी देते थे। अरब कबीलों के मुख़्तलिफ सरदारों में एक सरदार हातिम भी था और जो अपनी […]

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    ग़ल्ले की मंहगाई

    Rate this post शहरे मदीना में रोज़ बरोज़ ग़ेहूं और रोटी की कीमत में इज़ाफ़ा होता जा रहा था। हर शख़्स पर वहशत और परेशानी के आसार ग़ालिब थे जिनके पास साल भर का ग़ल्ला मौजूद न था वो हासिल करने की फ़िक्र में लगा था और जिसके पास मौजूद था वो हिफ़ाज़त की कोशिश […]

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    बड़ा आबिद कौन

    Rate this post हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक अलैहिस्सलाम के एक सहाबी जो कि मामूल के मुताबिक हमेशा आप के दर्स में शिरकत किया करते थे और दोस्तों की महफ़िलों में बैठते थे और उनके यहाँ आते जाते थे। एक बार उनको देख़े हुए दोस्तों को बहुत दिन हो गए। हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक (अ.) ने […]

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