islamic-sources

  • ALL
    E-Books
    Articles

    date

    1. date
    2. title
    • नज़्म व ज़ब्त
      Rate this post

      नज़्म व ज़ब्त

      नज़्म व ज़ब्तRate this post हज़रत अली (अ.) नो फ़रमायाः मैं तुम्हे तक़वे और नज़्म की वसीयत करता हूँ। हम जिस जहान में ज़िन्दगी बसर करते हैं यह नज़्म और क़ानून पर मोक़ूफ़ है। इसमें हर तरफ़ नज़्म व निज़ाम की हुकूमत क़ायम है। सूरज के तुलूअ व ग़ुरूब और मौसमे बहार व ख़िज़ा की […]

    • सलाद पत्ता खाने का लाभ
      Rate this post

      सलाद पत्ता खाने का लाभ

      सलाद पत्ता खाने का लाभRate this post सलाद पत्ता खाओ कि इससे नींद आती है और खाना हज़्म होता हैः पैग़म्बरे इस्लाम गोश्त खाने और न खाने की अहमियत जो इंसान चालीस दिन गोश्त न खाए वह चिड़चिड़े व्यवहार का हो जाता है और जो इंसान चालीस दिन लगातार गोश्त खाए वह कठोर दिल का […]

    • हदीसे ग़दीर की दलील
      Rate this post

      हदीसे ग़दीर की दलील

      हदीसे ग़दीर की दलीलRate this post दूसरी दलील हज़रत अमीर अलैहिस्सलाम ने जो अशआर माविया को लिखे उनमें हदीसे ग़दीर के बारे में यह कहा कि व औजबा ली विलायतहु अलैकुम। रसूलुल्लाहि यौमः ग़दीरि खुम्मिन।। [21] यानी अल्लाह के पैगम्बर स. ने मेरी विलायत को तुम्हारे ऊपर ग़दीर के दिन वाजिब किया है। इमाम से […]

    •  ख़ुत्बा – 18
      ख़ुत्बा – 18
      Rate this post

      ख़ुत्बा – 18

      ख़ुत्बा – 18Rate this post [ फ़तावा (फ़त्वों, निर्णयों) में उलमा के मुख्तलिफुल आरा (विभित्र मत) होने की मज़म्मत (निन्दा) में फ़रमाया ] जब उन में से किसी एक के सामने कोई मुआमला (वाद, अभियोग) फ़ैसले (निर्णय) के लिये पेश होता है तो वह अपनी राय (विचार) से उन का हुक्म (निर्णय) लगा देता है। […]

    •  नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय
      नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय

      नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचयRate this post नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचयप्रिय पाठकों : आपने पवित्र किताब नहजुल बलाग़ा के बारे में सुना होगा और इस किताब को देखा भी होगा लेकिन नही मालूम कि इस किताब से आप कितने परिचित हैं और इसके बारे में कितना ज्ञान रखते हैं। नहजुल बलाग़ा अमीरूल मोमिनीन हज़रत […]

    •  ख़ुत्बात
      ख़ुत्बात
      Rate this post

      ख़ुत्बात

      ख़ुत्बातRate this post जब इस लशकर ने शहर में दाखिल होना चाहा तो वालिये बसरा उसमान इबने हुनैफ़ फ़ोज का एक दस्ता लेकर उन की रोक थाम के लिये बढ़े। जब आमना सामना हुआ तो दोनों फ़रीकों ने तलवारें न्यामों से निकाल लीं और एक दूसरे पर टूट पड़े, जब दोनों तरफ़ से अच्छी खासी […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 28
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 28
      3.9 (77.33%) 15 votes

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 28

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 283.9 (77.33%) 15 votes नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-28 दुनिया ने पीठ फिरा कर अपने रुखूसत (विदा) होने का एलान (घोषणा) और मन्ज़िले उक़बा (आख़िरत) ने सामने आकर अपनी आमद से आगाह कर दिया है। आज का दिन तैयारी का है, और कल दौड़ का होगा। जिस तरफ़ आगे बढ़ना है, […]

    • नहजुल बलागा
      Rate this post

      नहजुल बलागा

      नहजुल बलागाRate this post नहजुल बलागा =अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम के संकलित आदेश एवं उपदेश नहजुल बलागा =अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम के संकलित आदेश एवं उपदेश 01 इस ध्याय में प्रश्नों के उत्तर और छोटे छोटे दार्शनिक वाक्यों का संकलन अंकित है जो विभिन्न लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के संबन्ध में वर्णन किये गए हैं। 1. […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20 ”जिन चीज़ों को तुम्हारे मरने वालों ने देखा है, अगर तुम भी उसे देख लेते तो घबरा जाते और सरासीमा व मुज़तरिब हो जाते और (हक़ की बात) सुनते और उस पर अमल करते। लेकिन जो उन्हों ने देखा है वह […]

    •  ख़ुत्बा – 11
      ख़ुत्बा – 11
      Rate this post

      ख़ुत्बा – 11

      ख़ुत्बा – 11Rate this post {जब जंगे जमल में अलम (सेना का ध्वज) अपने फ़र्ज़न्द (पुत्र) मोहम्मद बिन हनफ़िया को दिया तो उन से ने ये कलिमात फ़रमाया} पहाड़ अपनी जगह छोड़ दें मगर तुम अपनी जगह से न हटना । अपने दातों के भींच (जमा) लेना, अपना कासए सर (सर का प्याला) अल्लाह को […]

    • इंसान की इस्लाह नहजुल बलाग़ा की रौशनी में
      Rate this post

      इंसान की इस्लाह नहजुल बलाग़ा की रौशनी में

      इंसान की इस्लाह नहजुल बलाग़ा की रौशनी मेंRate this post इमामुल मुत्तक़ीन, अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली बिन अबी तालिब अलैहिस सलाम नहजुल बलाग़ा के कलेमाते क़ेसार की 89वीं हदीस में इरशाद फ़रमाते हैं: अगर इंसान अपने और ख़ुदा के दरमियान इस्लाह कर ले तो ख़ुदावंदे आलम उसके और लोगों को दरमियान इस्लाह कर देता है। […]

    • ” ख़ुशी क्या है “
      Rate this post

      ” ख़ुशी क्या है “

      ” ख़ुशी क्या है “Rate this post हमारे जन्म के पहले दिन ही ईश्वर अपनी तत्वदर्शिता द्वारा हमसे कहता है कि जीवन मधुर है और हमें अपने जीवन काल में यह सीखने का प्रयास करना चाहिए कि उचित मार्ग कौन से हैं ताकि उसपर चलकर हम मधुर जीवन व्यतीत कर सकें। यदि हमारा मनोबल सुदृढ़ […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27
      3 (60%) 7 votes

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-273 (60%) 7 votes नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27 जिहाद जन्नत के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा है। जिसे अल्लाह ने अपने खास बन्दों (दोस्तों) के लिये खोला है। यह पर्हेज़गारी का लिबास अल्लाह की मोह्कम ज़िरह और मज़बूत सिपर (ढ़ाल) है। जो उस से पहलू बचाते हुए उसे छोड़ देता है, ख़ुदा […]

    • गोश्त खाने और न खाने की अहमियत
      Rate this post

      गोश्त खाने और न खाने की अहमियत

      गोश्त खाने और न खाने की अहमियतRate this post जो इंसान चालीस दिन गोश्त न खाए वह चिड़चिड़े व्यवहार का हो जाता है और जो इंसान चालीस दिन लगातार गोश्त खाए वह कठोर दिल का हो जाता हैः पैग़म्बरे इस्लाम। जो शख़्स चालीस दिन गोश्त न खाए व बद इख़लाक़ हो जाता है और जो […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
      3.8 (76%) 5 votes

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 223.8 (76%) 5 votes नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22 मअलूम (विदित) होना चाहिये कि शैतान ने अपने गुरोह को भड़काना शुरुउ (आरम्भ) कर दिया और अपनी फ़ौजें (सेनायें) फ़राहम (उपलब्ध) कर ली हैं ताकि ज़ुल्म (अत्याचारी) अपनी इन्तिहा की हद (चरम सीमा) तक बातिल (अर्धम) अपने मक़ाम (स्थान) पर […]

    • नहजुल बलाग़ा की दृष्टि में मुहासिब ए नफ़्स का महत्व
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा की दृष्टि में मुहासिब ए नफ़्स का महत्व

      नहजुल बलाग़ा की दृष्टि में मुहासिब ए नफ़्स का महत्वRate this post अमीरुल मोमिनीन अलैहिस सलाम, नहजुल बलाग़ा में मनुष्य जाति को अपने नफ़्स के हिसाब की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए फ़रमाते हैं: अपने आपको अपने लिये परख लो और अपना हिसाब किताब कर लो, चूंकि दूसरों को परखने और उनका हिसाब करने के लिये […]

    • nahjul balaga
      Rate this post

      nahjul balaga

      nahjul balagaRate this post

    • हदीसे ग़दीर
      Rate this post

      हदीसे ग़दीर

      हदीसे ग़दीरRate this post मुक़द्दमा ग़दीर का नाम तो हम सब ने सुना ही है। यह एक सरज़मीन है जो मक्के और मदीने के दरमियान जोहफ़े के आस पास वाक़ेअ है। और मक्के शहर से तक़रीबन 200 किलोमीटर दूर है। यह एक चोराहा है जहाँ से मुख्तलिफ़ सरज़मीन से ताल्लुक़ रखने वाले हुज्जाजे कराम एक […]

    •  कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)
      कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)
      3 (60%) 6 votes

      कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)

      कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)3 (60%) 6 votes कलेमाते क़ेसार कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0) सय्यद रज़ी (र0)

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21 ”तुम्हारी मन्ज़िले मक़्सूद (गंतव्य स्थान) तुम्हारे सामने है। मौत की साअत (मृत्यु का क्षण) तुम्हारे अक़ब में (पीछे) है, जो तुम्हे आगे की तरफ़ (ओर) ले चल रही है। हल्के फुल्के रहो ताकि आगे बढ़ने वालों को पा सको। तुम्हारे अगलों […]

    more