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  •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 28
    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 28
    3.7 (73.75%) 16 vote[s]

    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 28

    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 283.7 (73.75%) 16 vote[s] नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-28 दुनिया ने पीठ फिरा कर अपने रुखूसत (विदा) होने का एलान (घोषणा) और मन्ज़िले उक़बा (आख़िरत) ने सामने आकर अपनी आमद से आगाह कर दिया है। आज का दिन तैयारी का है, और कल दौड़ का होगा। जिस तरफ़ आगे बढ़ना है, […]

  •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27
    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27
    3 (60%) 7 vote[s]

    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27

    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-273 (60%) 7 vote[s] नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा-27 जिहाद जन्नत के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा है। जिसे अल्लाह ने अपने खास बन्दों (दोस्तों) के लिये खोला है। यह पर्हेज़गारी का लिबास अल्लाह की मोह्कम ज़िरह और मज़बूत सिपर (ढ़ाल) है। जो उस से पहलू बचाते हुए उसे छोड़ देता है, ख़ुदा […]

  •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
    3.8 (76%) 5 vote[s]

    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22

    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 223.8 (76%) 5 vote[s] नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22 मअलूम (विदित) होना चाहिये कि शैतान ने अपने गुरोह को भड़काना शुरुउ (आरम्भ) कर दिया और अपनी फ़ौजें (सेनायें) फ़राहम (उपलब्ध) कर ली हैं ताकि ज़ुल्म (अत्याचारी) अपनी इन्तिहा की हद (चरम सीमा) तक बातिल (अर्धम) अपने मक़ाम (स्थान) पर […]

  •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21
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    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21

    Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21 ”तुम्हारी मन्ज़िले मक़्सूद (गंतव्य स्थान) तुम्हारे सामने है। मौत की साअत (मृत्यु का क्षण) तुम्हारे अक़ब में (पीछे) है, जो तुम्हे आगे की तरफ़ (ओर) ले चल रही है। हल्के फुल्के रहो ताकि आगे बढ़ने वालों को पा सको। तुम्हारे अगलों को पिछलों का इन्तिज़ार कराया […]

  •  ख़ुत्बा – 14
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    ख़ुत्बा – 14

    Rate this post [ यह भी अहले बसरा की (निन्दा) में है ] तुम्हारी ज़मीन (समुन्दर के) पानी से क़रीब और आस्मान से दूर है। तुम्हारी अक़लें सुबुक (बुद्दियां तुच्छ) और दानाइयां खा़म (चतुराइयां कच्ची) हैं। तुम हर तीर अन्दाज़ का निशाना हर खाने वाला का लुक़मा, और शिकारी की सैद अफ़गनियों का शिकार हो […]

  •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20
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    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20

    Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20 ”जिन चीज़ों को तुम्हारे मरने वालों ने देखा है, अगर तुम भी उसे देख लेते तो घबरा जाते और सरासीमा व मुज़तरिब हो जाते और (हक़ की बात) सुनते और उस पर अमल करते। लेकिन जो उन्हों ने देखा है वह अभी तुम से पोशीदा है […]

  •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24
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    नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24

    Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24 ” मुझे अपनी ज़िन्दगी की क़सम! मैं हक़ के खिलाफ़ चलने वालों और गुमराही में भटकने वालों से जंग में किसी क़िस्म की रु रिआयत और सुस्ती नहीं करुंगा। अल्लाह के बन्दो ! अल्लाह से डरो और उस के ग़ज़ब (क्रोध) से भाग कर उस के […]

  •  ख़ुत्बा-19
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    ख़ुत्बा-19

    Rate this post [ अमीरुल मोमिनीन अलैहिस सलाम मिंबरे कूफ़ा पर ख़ुत्बा इर्शाद फ़रमा रहे थे कि अश्अस इब्ने क़ैस ने आप के कलाम पर एतिराज़ (आपत्ति) करते हुए कहा कि या अमीरल मोमिनीन (अ.)! यह बात तो आप के हक़ (पक्ष) में नहीं बल्कि ख़िलाफ़ (विरुद्ध) पड़ती है, तो हज़रत ने उसे ग़ज़ब (क्रोध) […]

  •  ख़ुत्बा – 18
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    ख़ुत्बा – 18

    Rate this post [ फ़तावा (फ़त्वों, निर्णयों) में उलमा के मुख्तलिफुल आरा (विभित्र मत) होने की मज़म्मत (निन्दा) में फ़रमाया ] जब उन में से किसी एक के सामने कोई मुआमला (वाद, अभियोग) फ़ैसले (निर्णय) के लिये पेश होता है तो वह अपनी राय (विचार) से उन का हुक्म (निर्णय) लगा देता है। फिर वही […]

  •  ख़ुत्बा – 17
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    ख़ुत्बा – 17

    Rate this post [ उन लोगों के बारे में जो उम्मत (जनता) के फ़ैसले (निर्णय) चुकाने के लिये मस्नदे क़ज़ा (न्याय की गद्दी) पर बैठ जाते हैं हालांकि वह उस के अहल (पात्र) नहीं होते ] तमाम लोगों में सबसे ज़ियादा (अधिक) ख़ुदा के नज़्दीक (समीप) मब्ग़ूज़ (द्वैष पात्र) दो शख्स (व्यक्ति) हैं। एक वह […]

  •  ख़ुत्बा – 16
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    ख़ुत्बा – 16

    Rate this post [ जब मदीने में आप की बैअत हुई तो फ़रमाया ] में अपने क़ौल (कथन) का ज़िम्मेदार और उस की सेहत (सत्यता) का ज़ामिन हूं। जिस शख्स (व्यक्ति) को उस के दीदेए इबरत (शिक्षा ग्राहण करने वाली दृष्टि) ने गुज़श्ता उकूबतें (गत यातनायें) वाज़ेह तौर (स्पष्ट रूप) से दिखा दी हों, उसे […]

  •  ख़ुत्बा – 15
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    ख़ुत्बा – 15

    Rate this post [ हज़रत उसमान की अता कर्दा (द्वारा प्रदान की गई) जागींरे जब पलटा दीं तो फ़रमाया ] ख़ुदा की क़सम! अगर मुझे ऐसा माल भी कहीं नज़र आता तो औरतों के महर और कनीज़ों (दासियों) की ख़रीदारी पर सर्फ़ (व्यय) किया जा चुका होता तो उसे भी वापस पलटा लेता। चूंकी अदल […]

  •  ख़ुत्बा – 14
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    ख़ुत्बा – 14

    Rate this post [ यह भी अहले बसरा की (निन्दा) में है ] तुम्हारी ज़मीन (समुन्दर के) पानी से क़रीब और आस्मान से दूर है। तुम्हारी अक़लें सुबुक (बुद्दियां तुच्छ) और दानाइयां खा़म (चतुराइयां कच्ची) हैं। तुम हर तीर अन्दाज़ का निशाना हर खाने वाला का लुक़मा, और शिकारी की सैद अफ़गनियों का शिकार हो […]

  •  ख़ुत्बात
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    ख़ुत्बात

    Rate this post जब इस लशकर ने शहर में दाखिल होना चाहा तो वालिये बसरा उसमान इबने हुनैफ़ फ़ोज का एक दस्ता लेकर उन की रोक थाम के लिये बढ़े। जब आमना सामना हुआ तो दोनों फ़रीकों ने तलवारें न्यामों से निकाल लीं और एक दूसरे पर टूट पड़े, जब दोनों तरफ़ से अच्छी खासी […]

  •  ख़ुत्बा – 13
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    ख़ुत्बा – 13

    Rate this post [अहले बसरा (बसरा निवासियों) की मज़म्मत (निन्दा) में ] तुम एक औरत (स्त्री) की सिपाह (सेना) में और एक चौपाए के ताबे (अधीन) थे। वह बिलबिलाया तो लब्बैक (आ गया आ गया) कहते हुए बढे और वह ज़ख्मी (आहत) हुआ तो तुम भाग खड़े हुए । तुम पस्त अख़लाक (नैतिक रुप से […]

  •  ख़ुत्बा – 12
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    ख़ुत्बा – 12

    Rate this post जब ख़ुदा वन्दे आलम ने आप को जमल वालों पर ग़बा अता किया (विजय प्रदान की) तो उस मौके (अवसलर) पर आप के एक सहाबी (साथी) ने आप से अर्ज़ किया कि मेरे फुलां (अमुक) भाई भी यहां पर मौजूद होता तो वोह भी देखता कि अल्लाह ने आप को दुशमन पर […]

  •  ख़ुत्बा – 11
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    ख़ुत्बा – 11

    Rate this post {जब जंगे जमल में अलम (सेना का ध्वज) अपने फ़र्ज़न्द (पुत्र) मोहम्मद बिन हनफ़िया को दिया तो उन से ने ये कलिमात फ़रमाया} पहाड़ अपनी जगह छोड़ दें मगर तुम अपनी जगह से न हटना । अपने दातों के भींच (जमा) लेना, अपना कासए सर (सर का प्याला) अल्लाह को आरियत (उधार) […]

  •  नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय
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    नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय

    Rate this post नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचयप्रिय पाठकों : आपने पवित्र किताब नहजुल बलाग़ा के बारे में सुना होगा और इस किताब को देखा भी होगा लेकिन नही मालूम कि इस किताब से आप कितने परिचित हैं और इसके बारे में कितना ज्ञान रखते हैं। नहजुल बलाग़ा अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली (अ) के कुछ […]

  •  कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)
    कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)
    3 (60%) 6 vote[s]

    कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)

    कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0)3 (60%) 6 vote[s] कलेमाते क़ेसार कलेमाते क़ेसार इमाम अली (अ0) सय्यद रज़ी (र0)

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    मुक़द्दम ए सैयदुल उलामा ……….

    Rate this post “मैने सत्तर खुत्बे अली इब्ने अबी तालिब (अ) अजबर (याद) किए हैं, जिनके फुयूज़ो-बरकात मेरे यहां नुमायां (स्पष्ट) हैं। ” इसके बाद इबनूल मुतवफ्फी (मृतक) सन् 142 का एतिराफ है जिसे अल्लामा हसन अन्नदूबी ने अपने उन हवाशी में जो किताब अल बयान वत तबईन लिल जाहिज़ पर लिखे हैं , वह […]

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