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    नमाज़ी के लिबास की शर्तें

    Rate this post 1. पाक हो। 2. ग़स्बी न हो (छीना, हथियाया हुआ न हो) 3. मुरदार (मृत शरीर के भाग) के अजज़ा का बना न हो। 4. ऐसे जानवर (पशु) का न हो जिसका गोश्त हराम है। 5. सोने का न हो। 6. शुद्ध रेशमी न हो। पाँचवीं एवंम छटी शर्त पुरुषों से विशेष […]

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    अच्छा शौहर व अच्छी बीवी

    Rate this post मैंने बुक स्टोर से “अच्छा शौहर, अच्छी बीवी” नामी किताब उठाई और लॉन की तरफ़ ख़ुलने वाली ख़िड़की के पास चेयर डाल कर बैठ गई। अभी-अभी बहुत मुश्किलों से बच्चे को सुलाया था। पता नहीं आज क्यों इतना तंग कर रहा था। उसके रोने के अंदाज़ से तो लगता था कि उसे […]

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    इबादत का मतलब

    Rate this post अल्लाह तआला बन्दे के अमल को कब स्वीकार करता है? और अमल के अंदर किन शर्तों का पाया जाना चाहिए ताकि वह सालेह (नेक) और अल्लाह के पास स्वीकृत हो सके? हर तरह की हम्द व सना अल्लाह के लिए है। अल्लाह की प्रशंसा और स्तुति के बाद: कोई भी कार्य इबादत […]

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    तकलीफ़ की शर्तें

    Rate this post 2 तकलीफ़ की शर्तें निम्न लिखित हैं: 1.    बालिग़ होना। (लड़कों का 15 साल का हो जाना और लड़कियों का 9 साल का हो जाना।) 2.    आक़िल होना। (बुद्धिमान होना) 3.    क़ुदरत (अहकाम को अन्जाम देने की ताक़त रखता हो) http://www.wilayat.in/

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    नवाफ़िल –ए- यौमिया

    Rate this post 1. ज़ोहर की नमाज़ इसकी नाफ़ेला आठ रकअत है। 2. अस्र की नमाज़ इसकी नाफ़ेला आठ रकअत है। 3. मग़रिब की नमाज़ इसकी नाफ़ेला चार रकअत है। 4. ऐशा की नमाज़ इसकी नाफ़ेला दो रकअत है जिसे ऐशा की नमाज़ के बाद बैठ कर पढ़ा जाता है। 5. सुबह की नमाज़ की […]

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    बालिग़ होने की निशानियाँ

    Rate this post 3. बालिग़ होने की निशानियाँ, नीचे दी हुई निशानियों में से कोई एक हैं। 1.    शर्मगाह (गुप्तांग) के आस पास सख़्त बालों का उगना। 2.    एहतेलाम (सोते या जागते मनी (वीर्य)) का निकलना। 3.    चाँद की तारीख के अनुरूप लड़कों का 15 साल और लड़कियों का 9 साल पूरा होना। अगर किसी […]

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    तकलीफ़ की शर्तें

    Rate this post   2 तकलीफ़ की शर्तें निम्न लिखित हैं: 1.    बालिग़ होना। (लड़कों का 15 साल का हो जाना और लड़कियों का 9 साल का हो जाना।) 2.    आक़िल होना। (बुद्धिमान होना) 3.    क़ुदरत (अहकाम को अन्जाम देने की ताक़त रखता हो) http://www.wilayat.in/

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    मसअलों का सीखना

    Rate this post   1. हर मुकल्लफ़ (जिस पर इस्लामी एहकाम वाजिब हों) पर शरई मसाएल जैसे नमाज़ रोज़ा तहारत (पवित्रता) और कुछ लेन देन के मसअलों का सीखना वाजिब है अगर वह एहकाम न सीखे और उससे वाजिब छूट जाए या हराम काम हो जाए तो वह आदमी गुनहगार (पापी) कहलाएगा। मुकल्लफ़ उसे कहा […]

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    सलमान रूश्दी के ख़िलाफ़ मौत के फ़त्वे में तब्दीली नहीं

    Rate this post ईरान के इस्लामी इक़ेलाब के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने इमाम ख़ुमैनी र.ह द्वारा शैतानी आयत के राइटर सल्मान रुश्दी के विरुद्ध दिए गए ऐतिहासिक फ़त्वे में तब्दीली को नकारते हुए उसमें तब्दीली को असम्भव बताया और ताकीद की कि शैतानी आयत के राइटर के सम्बंध में इस्लाम का हुक्म […]

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    नमाज़ी का लिबासः

    Rate this post वह हिस्सा जिसका नमाज़ में छिपाना वाजिब है। मसअला 397 पुरुष को नमाज़ की हालत में अपनी दोनों शर्मगाह (गुप्तांग) का छिपाना वाजिब है, चाहे उसे कोई न देख रहा हो। बेहतर यह है कि नाभि और घुटनों के बीच के हिस्से को छिपाए। मसअला 398 नमाज़ की हालत में स्त्री पर […]

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    नवाफ़िल –ए- यौमिया

    Rate this post 1. ज़ोहर की नमाज़ इसकी नाफ़ेला आठ रकअत है। 2. अस्र की नमाज़ इसकी नाफ़ेला आठ रकअत है। 3. मग़रिब की नमाज़ इसकी नाफ़ेला चार रकअत है। 4. ऐशा की नमाज़ इसकी नाफ़ेला दो रकअत है जिसे ऐशा की नमाज़ के बाद बैठ कर पढ़ा जाता है। 5. सुबह की नमाज़ की […]

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    मुस्तहेब्बी नमाज़ें

    Rate this post मुस्तहेब्बी नमाज़ें बहुत ज़्यादा हैं जिनको नाफ़ेला कहते हैं। मसअला 387: पाँचों वाजिब नमाज़ों के साथ कुछ मुस्तहेब्बी नमाज़ें भी हैं जिन्हें नाफ़ेला कहा जाता है। जिसको पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण है और उनके लिए बहुत ज़्यादा सवाब बयान किया गया है। और इन नाफ़ेला के अलावा रात के आख़री हिस्से में रात […]

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    मर्द की ब निस्बत औरत की मीरास आधी क्यों

    Rate this post ख़्वातीन बिल ख़ुसूस इल्म हासिल करने वाली लड़कियों आम तौर से सवाल करती हैं कि मर्द की ब निस्बत औरत की मीरास आधी क्यों हैं? क्या यह अदालत के मुताबिक़ है और यह औरत के हुक़ूक़ पर ज़ुल्म नही है? जवाब: अव्वल यह कि हमेशा ऐसा नही है कि मर्द, औरत की मीरास से दुगुना मीरास […]

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    एक से ज़्यादा शादियाँ – 5

    Rate this post इस सिलसिले में यह बात भी क़ाबिल तवज्जो है कि इस्लाम ने कई शादियों में इंसाफ़ को शर्त क़रार दिया है लेकिन इंसाफ़ और अदालत को इख़्तियारी नही रखा है बल्कि उसे ज़रुरी क़रार दिया है और हर मुसलमान से मुतालेबा किया है कि अपनी ज़िन्दगी में अदालत से काम ले और कोई काम ख़िलाफ़े अदालत […]

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    एक से ज़्यादा शादियाँ – 4

    Rate this post इसमे कोई शक नही है कि कई शादियों में इँसाफ़ करने की शर्त हवस के ख़ात्मे और क़ानून की बरतरी की बेहतरीन अलामत है और इस तरह औरत के आदर और सम्मान की पूर्ण रुप से सुरक्षा हो सकती है लेकिन इस सिलसिले में यह बात नज़र अंदाज़ नही होनी चाहिये कि इंसाफ़ वह तसव्वुर […]

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    एक से ज़्यादा शादियाँ – 3

    Rate this post इस मसले की दूसरा रुख यह भी है कि मर्दो और औरतों की आबादी के इस तनासुब से इंकार कर दिया जाये और दोनो की संख्या को बराबर मान लिया जाये लेकिन एक मुश्किल बहरहाल पैदा होगी कि फ़सादात और आफ़ात में आम तौर पर मर्दों ही की आबादी में कमी पैदा […]

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    एक से ज़्यादा शादियाँ – 2

    Rate this post यह सही है कि अगर किसी बच्चे को दरिया के किनारे मौजों का तमाशा करते हुए अगर वह छलाँग लगाने का इरादा करे और उसे छोड़ दिया जाएं तो यक़ीनन वह ख़ुश होगा कि आपने उसकी ख़्वाहिश का ऐहतेराम किया है और उसके जज़्बात पर पाबंदी नही लगाई है चाहे उसके बाद वह डूब कर […]

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    एक से ज़्यादा शादियाँ – 1

    Rate this post मौजूदा ज़माने का सबसे गर्म विषय एक से ज़्यादा शादियाँ करने का मसला है। जिसे बुनियाद बना कर पच्छिमी दुनिया ने औरतों को इस्लाम के ख़िलाफ़ ख़ूब इस्तेमाल किया है और मुसलमान औरतों को भी यह यक़ीन दिलाने की कोशिश की है कि एक से ज़्यादा शादियों का क़ानून औरतों के साथ नाइंसाफ़ी है और उनकी […]

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    इस्लाम धर्म में विरासत का क़ानून

    Rate this post ‘विरासत’ एक अति प्रचलित शब्द है जिसका भावार्थ होता है अपने वंशजों से कुछ प्राप्त करना, चाहे वो धन-सम्पत्ति के रूप में हो या आदर्श, उपदेश अथवा संस्कार के रूप में। चिकित्सा विज्ञान का विश्वास है कि बीमारियां भी विरासत में प्राप्त होती हैं। परन्तु इस्लामी शरीअत में इस ‘पारिभाषिक’ शब्द का उपयोग उस धन-सम्पत्ति के लिए किया […]

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    हदिया (गिफ़्ट)

    Rate this post हिबा, हदिया (गिफ़्ट), बैंक से मिलने वाला इनाम, मेहर और विरासत सवाल 848: क्या हिबा और ईद के तोहफ़े (ईदी) पर ख़ुम्स वाजिब है या नहीं? जवाब: हिबा और हदिये (गिफ़्ट) पर ख़ुम्स नहीं है लेकिन ऐहतियात ये है कि उन में से जो कुछ सालाना ख़र्च से बच जाये उसका ख़ुम्स निकाला […]

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