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    • वुज़ू करते वक़्त पानी डालने का हुक्म
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      वुज़ू करते वक़्त पानी डालने का हुक्म

      वुज़ू करते वक़्त पानी डालने का हुक्मRate this post सवालः- मैं वुज़ू में तीन बार हाथ धोती थी। शादी के बाद मेरे शौहर ने कहा कि तुम्हारा वुज़ू सही नहीं है। अगर कोई वुज़ू में अपना चेहरा और हाथ तीन बार धोए तो क्या उसका वुज़ू और इबादतें सही नहीं होंगी? जवाबः वुज़ू में एक […]

    • दीनी अहकाम का सीखना
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      दीनी अहकाम का सीखना

      दीनी अहकाम का सीखनाRate this post सवालः जिन दीनी अहकाम का इंसान के लिए सीखना ज़रूरी है अगर उसमें काहिली से काम ले तो क्या वह गुनहगार है। जवाबः अगर अहकाम का न सीखना किसी वाजिब के छूटने या हराम में पड़ने का कारण हो तो वह गुनहगार है।

    • नमाज़ को हल्का समझना
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      नमाज़ को हल्का समझना

      नमाज़ को हल्का समझनाRate this post सवालः जानबूझ कर नमाज़ न पढ़ने या उसको हल्का समझने वाले का क्या ह़ुक्म है।? जवाबः हर दिन पाँच वक़्त में पढ़ी जाने वाली नमाज़ इस्लाम के महत्वपूर्ण वाजेबात में से है और दीन का सुतून (खम्बा) है। उसको छोड़ना या हलका समझना जायज़ नहीं है और अज़ाब का कारण है।

    • वुज़ू को बातिल करने वाली चीज़ें
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      वुज़ू को बातिल करने वाली चीज़ें

      वुज़ू को बातिल करने वाली चीज़ेंRate this post सवालः किन चीज़ों से वुज़ू टूट जाता है? जवाबः सात चीज़ें वुज़ू को बातिल कर देती हैं। (1)   पेशाब या इस्तबरा से पहले पेशाब करने की जगह से निकलने वाली वो रुतूबत जिसके बारे में न जानता हो की ये पेशाब है या कोई और चीज़। (2)   […]

    • इस्तेहाजा
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      इस्तेहाजा

      इस्तेहाजाRate this post औरतों को जो ख़ून आते हैं, उनमें से एक ख़ून इस्तेहाजः है। जिस वक़्त औरत को यह ख़ून आरहा होता है, उसे मुस्तेहाज़ः कहते हैं। 398 इस्तेहाजः का ख़ून ज़्यादातर ज़र्द रंग का व ठंडा होता है और दबाव व जलन के बग़ैर निकलता है और आमतौर पर यह ख़ून गाढ़ा भी […]

    • नमाज़े वहशते क़ब्र
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      नमाज़े वहशते क़ब्र

      नमाज़े वहशते क़ब्रRate this post 645. मुनासिब है कि मैयित के दफ़्न के बाद पहली रात में उसके लिए दो रकत नमाज़े वहशते क़ब्र पढ़ी जाये और उसके पढ़ने का तरीक़ा यह है कि पहली रकत में सूरः ए अलहम्द के बाद एक बार आयतल कुर्सी और दूसरी रकत में हम्द के बाद दस बार […]

    • वुज़ू में फ़ासला
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      वुज़ू में फ़ासला

      वुज़ू में फ़ासलाRate this post सवालः वुज़ू या ग़ुस्ल के बीच आज़ा (अंगों) को धोते वक़्त एक अंग से दूसरो अंग के बीच कितना फ़ासला होना चाहिए? जवाबः ग़ुस्ल में फ़ासला मुश्किल नहीं है लेकिन वुज़ू में अगर फ़ासला इतना ज़्यादा हो कि दूसरे वाले अंग को धोने में इतनी देर हो जाये कि उससे पहले वाला […]

    • तयम्मुम की तीसरी सूरत
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      तयम्मुम की तीसरी सूरत

      तयम्मुम की तीसरी सूरतRate this post (677) अगर किसी इंसान को पानी इस्तेमाल करने से अपनी जान पर बन जाने या बदन में कोई ऐब या मर्ज़ पैदा होने या मौजूदा मर्ज़ के बढ़ जाने या शदीद हो जाने या इलाज मुआलेजा में दुशवारी पैदा होने का ख़ौफ़ हो तो उसे चाहिए कि तयम्मुम करे। […]

    • हवाई जहाज़ में नमाज़ पढ़ना
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      हवाई जहाज़ में नमाज़ पढ़ना

      हवाई जहाज़ में नमाज़ पढ़नाRate this post सवालः हवाई जहाज़ में नमाज़ पढ़ने का कया ह़ुक्म है? जवाबः अगर उसमें मौजूद अधिकारियों से पूछने के बाद भी क़िबले की दिशा का पता न चल सके तो जिधर क़िबले का अनुमान हो उसी दिशा में पढ़ ले। और संदेह की सूरत में अगर नमाज़ का वक़्त ज़्यादा हो […]

    • जिस शख़्स का पेशा या पेशे की शुरुआत सफ़र हो
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      जिस शख़्स का पेशा या पेशे की शुरुआत सफ़र हो

      जिस शख़्स का पेशा या पेशे की शुरुआत सफ़र होRate this post सवाल 638:  जिस शख़्स का सफ़र उसके पेशे की शुरुआत हो क्या वोह सफ़र में पूरी नमाज़ पढ़ेगा और उसका रोज़ा भी सही है या ये (पूरी नमाज़ पढ़ना) उस शख़्स से मख़सूस है जिसका पेशा ही यक़ीनी तौर पर सफ़र हो और, इमाम ख़ुमैनी के […]

    • सुधार की ज़रूरत
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      सुधार की ज़रूरत

      सुधार की ज़रूरतRate this post सवालः मैंने कुछ साल पहले शादी की थी और मैं दीनी व शरई कामों को बहुत ज़्यादा महत्व देता हूँ और इमाम ख़ुमैनी (र.ह) का मुक़ल्लिद (तक़लीद करने वाला) हूँ लेकिन मेरी बीवी (पत्नी) दीनी मसअलों को महत्व नहीं देती और बुहत ज़्यादा टोकने से एक बार पढ़ लेती है मगर […]

    • बच्चों का सलाम
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      बच्चों का सलाम

      बच्चों का सलामRate this post सवालः क्या बच्चों के सलाम का जवाब देना वाजिब है? जवाबः अच्छे बुरे की पहचान रखने वाला बच्चे चाहे वह लड़के हों या लड़कियाँ औरतों और मर्दों की तरह़ उनके सलाम का जवाब देना भी वाजिब है।

    • आलम से ग़ैरे आलम कि तरफ़ पलटना
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      आलम से ग़ैरे आलम कि तरफ़ पलटना

      आलम से ग़ैरे आलम कि तरफ़ पलटनाRate this post सवालः अगर आलम (सबसे ज़्यादा जानने वाला) के फ़त्वे ज़माने के मुताबिक़ न हों या उन पर अमल करना सख़्त हो तो क्या ग़ैरे आलम से सम्पर्क किया जा सकता है? जवाबः सिर्फ़ इस गुमान पर कि आलम का फ़त्वा माह़ौल और ह़ालात के अनुसार नहीं […]

    • वुज़ू में दूसरे की मदद लेना
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      वुज़ू में दूसरे की मदद लेना

      वुज़ू में दूसरे की मदद लेनाRate this post सवालः- काफ़ी दिनों तक मेरी बेटी लोटे से पानी डालती थी और मैं वुज़ू करती थी फिर पता चला कि इंसान को ख़ुद वुज़ू करना चाहिये और कोई उस की मदद न करे। क्या मेरा वुज़ू सही है? मेरी नमाज़ और दूसरी इबादतों का क्या हुक्म है? जवाबः […]

    • क्या इमाम का हर जगह होना ज़रूरी है?
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      क्या इमाम का हर जगह होना ज़रूरी है?

      क्या इमाम का हर जगह होना ज़रूरी है?Rate this post जवाबः इमाम, पैग़म्बर (स) का उत्तराधिकारी होता है और जो कर्तव्य और ज़िम्मेदारियां पैग़म्बर (स) पर होती हैं (वही यानी गॉड मैसेज को छोड़ कर) वही ज़िम्मेदारियां इमाम के लिए भी होती हैं। जिस तरह पैग़म्बर (स.अ) को अपने कर्तव्यों के पालन के लिए सभी […]

    • हज, इस्लाम की पहचान
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      हज, इस्लाम की पहचान

      हज, इस्लाम की पहचानRate this post जिस तरह से ईश्वरीय धर्म इस्लाम ने मनुष्य के आत्मिक और आध्यात्मिक आदि पहलुओं पर भरपूर ध्यान दिया है, हज में इस व्यापकता को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है हज,इस्लाम की पहचानजिस तरह से ईश्वरीय धर्म इस्लाम ने मनुष्य के आत्मिक और आध्यात्मिक आदि पहलुओं पर भरपूर […]

    • जमाअत का ह़ुक्म
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      जमाअत का ह़ुक्म

      जमाअत का ह़ुक्मRate this post सवालः अगर इमामे जमाअत तकबीरतुल ऐहराम (नियत के साथ कहा जाने वाला अल्लाहो अकबर) के बाद अलह़म्द और उसके बाद वाले सूरों को पढ़े बिना भूले से रुकू में चला जाये तो जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ने वाले का क्या ह़ुक्म है।? जबावः अगर मामूम (नमाज़ पढ़ने वाले) नमाज़ जमाअत में शामिल […]

    • नमाज़ में बदन का ढाँपना
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      नमाज़ में बदन का ढाँपना

      नमाज़ में बदन का ढाँपनाRate this post (796) ज़रूरी है कि मर्द चाहे उसे कोई भी न देख रहा हो नमाज़ की हालत में अपनी शर्मगाहों को ढाँपे और बेहतर यह है कि नाफ़ से घुटनों तक बदन भी ढाँपे। (797) ज़रूरी है कि औरत नमाज़ के वक़्त अपना पूरा बदन हत्ता कि सर और […]

    • अंगूठी पर नक़्श
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      अंगूठी पर नक़्श

      अंगूठी पर नक़्शRate this post सवालः अंगूठी के ऊपर जो नक़्श बने होते हैं बिना वुज़ू के उसका छूना जाएज़ है? जवाबः अगर ऐसे शब्दों से नक़्श बना है जिसमें तहारत (वूज़ू या ग़ुस्स) की शर्त है तो बिना वुज़ू के छूना जाएज़ नहीं है।

    • आलिम के पीछे नमाज़ पढ़ना
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      आलिम के पीछे नमाज़ पढ़ना

      आलिम के पीछे नमाज़ पढ़नाRate this post सवालः हम कुछ जवान हैं जो मजलिसों और इमामबाड़ों में एक साथ बैठते हैं जब नमाज़ का वक़्त होता है तो अपने बीच में से किसी एक आदिल इंसान को नमाज़े जमाअत के लिए आगे बढ़ा देते हैं लेकिन कुछ लोग इस नमाज़ पर विरोध करते हैं और कहते […]

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