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    नमाज़ की अहमियत

    Rate this post नमाज़ वह इबादत है कि तमाम अंबिया ए केराम ने इस की सिफ़ारिश की है। इस्लाम के अंदर सबसे बड़ी इबादत नमाज़ है जिस के बारे में पैग़म्बरे इस्लाम (स) का इरशाद है कि अगर नमाज़ कबूल न हुई तो कोई अमल कबूल नही होगा फिर फ़रमाया कि नमाज़ जन्नत की चाभी […]

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    अज़मते नमाज़

    Rate this post इमाम अली अलैहिस सलाम नहजुल बलाग़ा में इरशाद फ़रमाते हैं: नमाज़ से बढ़ कर कोई अमल ख़ुदा को महबूब नही है लिहाज़ा कोई दुनियावी चीज़ तूझे अवक़ाते नमाज़ से ग़ाफ़िल न करे। वक़्ते नमाज़ की अहमियत इमाम अलैहिस सलाम इसी किताब में फ़रमाते हैं: नमाज़ को मुअय्यन वक़्त के अंदर अंजाम दो, […]

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    नमाज़े तहज्जुद

    Rate this post नमाज़े शब या नमाज़े तहज्जुद एक मुसतहब्बी नमाज़ है जिस की गयारह रकतें हैं आठ रकअत नमाज़े शब की नीयत से, दो रकअत नमाज़े शफ़ा की नीयत से और एक रकअत नमाज़े वित्र की नीयत से पढ़ी जाती है, नमाज़े शफ़ा के अंदक क़ुनूत नही होता और नमाज़े वित्र एक रकअत है […]

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    नमाज़े जुमा की अहमियत

    Rate this post नमाज़े जुमा के बारे में भी इमाम अलैहिस सलाम ने नहजुल बलाग़ा में बहुत ताकीद फ़रमाई है: पहली हदीस जुमे के दिन सफ़र न करो और नमाज़े जुमा शिरकत करो मगर यह कि कोई मजबूरी हो। (1) दूसरी हदीस इमाम अली अलैहिस सलामा जुमे के ऐहतेराम में नंगे पांव चल कर नमाज़े […]

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    मुस्तहब ग़ुस्ल

    Rate this post (651) इस्लाम की मुक़द्दस शरीअत में बहुत से ग़ुस्ल मुस्तहब हैं जिन में से कुछ यह हैं: जुमे के दिन का ग़ुस्ल 1- इस का वक़्त सुब्ह का अज़ान के बाद से सूरज के ग़ुरूब होने तक है और बेहतर यह है कि ग़ुस्ल ज़ोहर के क़रीब किया जाये (और अगर कोई […]

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    अहकाम

    Rate this post तक़लीद सवाल: क्या तक़लीद के बाद पूरी तौज़ीहुल मसाइल का पढ़ना ज़रुरी है? जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी: उन मसाइल का जानना ज़रूरी है जिस से इंसान हमेशा दोचार है। आयतुल्लाह ख़ामेनई: ज़रूरी नही है बल्कि सिर्फ़ दर पेश आने वाले मसाइल का जानना ज़रूरी है। सवाल: अगर किसी मसले में मुजतहिद का फ़तवा […]

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