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    मस्जिद के अहकाम – 3

    Rate this post सवाल 405: एक मस्जिद तक़रीबन बीस साल पहले बनाई गई है और इसे इमामे ज़माना के नामे मुबारक से मन्सूब किया गया है और ये मालूम नहीं है कि मस्जिद का नाम वक़्फ़ करते वक़्त ज़िक्र किया गया है या नहीं तो मस्जिद का नाम साहेबे ज़माना के नामे मुबारक से मन्सूब […]

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    मस्जिद के अहकाम – 2

    Rate this post सवाल 395:  क्या मस्जिद में उन लोगों को जो क़ुरआँन की तालीम के लिये शिरकत करते हैं ऐसी फि़ल्में दिखाने में कोई हर्ज है जिन को ईरान की वेज़ारते सक़ाफ़त ने जारी किया हो? जवाब: मस्जिद को फ़िल्म दिखाने की जगह में तब्दील करना जाएज़ नहीं है लेकिन ज़रूरत के वक़्त और […]

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    मस्जिद के अहकाम – 1

    Rate this post सवाल 386:  इस बात को नज़र में रखते हुए कि अपने मोहल्ले की मस्जिद में नमाज़ पढ़ना मुस्तहब है क्या अपने मोहल्ले की मस्जिद छोड़ कर जमाअत की नमाज़ पढ़ने के लिये शहर की जामा मस्जिद जाने में कोई हर्ज है? जवाब: अगर अपने मोहल्ले की मस्जिद छोड़ना दूसरी मस्जिद में नमाज़े […]

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    क़ानूनी ख़ला का वुजूद नही है

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि इस्लाम में किसी तरह का कोई क़ानूनी ख़ला नही पाया जाता। यानी क़ियामत तक इंसान को पेश आने वाले तमाम अहकाम इस्लाम में बयान हो चुके हैं। यह अहकाम कभी मख़सूस तौर पर औरकभी कुल्ली व आम तौर पर बयान किये गये है। इसी वजह से हम किसी फ़क़ीह को […]

  •  फ़िक़्ही मसाइल
    फ़िक़्ही मसाइल
    3.3 (65.71%) 14 vote[s]

    फ़िक़्ही मसाइल

    फ़िक़्ही मसाइल3.3 (65.71%) 14 vote[s] फूरुअ-ए दीन फूरुअ-ए दीन में प्रवेश करने से पहले हम सब पर अवश्यक हे कि हम जान लें, जो इस्लाम के उसूल व विश्वास इंसान के फ़िक्र के साथ सम्पर्क रख़ता हे, इस लिए हमारा विश्वास व प्रमाण इज्तेहाद के साथ होना चाहीए, लेकिन फूरुअ-ए दीन का विषय इस से […]

  •  नमाज़ के 114 नुक्ते
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    नमाज़ के 114 नुक्ते

    Rate this post पहला हिस्सा- नमाज़ की अहमियत 1-नमाज़ सभी उम्मतों मे मौजूद थी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स. अ.) से पहले हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की शरीअत मे भी नमाज़ मौजूद थी। क़ुरआन मे इस बात का ज़िक्र सूरए मरियम की 31 वी आयत मे मौजूद है कि हज़रत ईसा (अ.स.) ने कहा कि अल्लाह ने […]

  •  मुसतहेब्बात वा मकरुहात
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    मुसतहेब्बात वा मकरुहात

    Rate this post (1) मुसतहेब्बात मुस्तहब ग़ुस्ल इस्लाम की मुक़द्दस शरीअत में बहुत से ग़ुस्ल मुस्तहब हैं जिन में से कुछ यह हैं: जुमे के दिन का ग़ुस्ल 1- इस का वक़्त सुब्ह का अज़ान के बाद से सूरज के ग़ुरूब होने तक है और बेहतर यह है कि ग़ुस्ल ज़ोहर के क़रीब किया जाये […]

  •  ज़रुरी मसाइल
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    ज़रुरी मसाइल

    Rate this post तक़लीद सवाल: क्या तक़लीद के बाद पूरी तौज़ीहुल मसाइल का पढ़ना ज़रुरी है? जवाब: आयतुल्लाह सीस्तानी: उन मसाइल का जानना ज़रूरी है जिस से इंसान हमेशा दोचार है। आयतुल्लाह ख़ामेनई: ज़रूरी नही है बल्कि सिर्फ़ दर पेश आने वाले मसाइल का जानना ज़रूरी है। सवाल: अगर किसी मसले में मुजतहिद का फ़तवा […]

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    वह सूरतें जिन में मुबतिलाते रोज़ा से परहेज़ मुसतहब है

    Rate this post (1758) नीचे लिखे पाँच अशख़ास के लिए मुस्तहब है कि अगरचे रोज़े से न हों माहे रमज़ानुल मुबारक में उन कामों से परहेज़ करें जो रोज़े को बातिल करते है। (1) वह मुसाफ़िर जिस ने सफ़र में कोई ऐसा काम किया हो जो रोज़े को बातिल करता हो और वह ज़ोहर से […]

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    मुस्तहब रोज़े

    Rate this post हराम और मकरूह रोज़ों के अलावा जिन का ज़िक्र किया जा चुका है साल के तमाम दिनों के रोज़े मुस्तहब है और बाज़ दिनों के रोज़े रखने की बहुत ताकीद की गई है जिन में से चंद यह हैः (1) हर महीने की पहली और आख़री जुमेरात और पहला बुध जो महीने […]

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    हराम और मकरूह रोज़े

    Rate this post (1748) ईदे फ़ित्र और ईदे क़ुरबान के दिन रोज़ा रखना हराम है और यह भी कि जिस दिन के बारे में इंसान को यह इल्म न हो कि शाबान की आख़री तारीख़ है या रमज़ानुल मुबारक की पहली तो अगर उस दिन पहली रमज़ानुल मुबारक की नियत से रोज़ा रखे तो हराम […]

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    महीने की पहली तारीख़ साबित होने का तरीक़ा

    Rate this post (1739) महीने की पहली तारीख़ निम्न लिखित चार चीज़ों से साबित होती हैः (1) इंसान खुद चाँद देखे। (2) एक ऐसा गिरोह जिस के कहने पर यक़ीन या इतमिनान हो जाये यह कहे कि हमने चाँद देखा है और इस तरह हर वह चीज़ जिस की बदौलत यक़ीन या इतमीनान हो जाये। […]

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    वह लोग जिन पर रोज़ा रखना वाजिब नही

    Rate this post (1734) जो शख्स बुढ़ापे की वजह से रोज़ा न रख सकता हो या रोज़ा रखना उस के लिए शदीद तकलीफ़ का बाइस हो तो उस पर रोज़ा वाजिब नहीं है। लेकिन रोज़ा न रखने की सूरत में ज़रूरी है कि हर रोज़े के बदले एक मुद तआम यानी गेहूँ या जौ या […]

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    मुसाफ़िर के रोज़ों के अहकाम

    Rate this post (1723) जिस मुसाफ़िर के लिए सफ़र में चार रकअती नमाज़ के बजाये दो रकअती पढ़ना ज़रूरी है उसे रोज़ा नही रखना चाहिये लेकिन वह मुसाफ़िर जो पूरी नमाज़ पढ़ता हो, मसलन जिस का पेशा ही सफ़र हो या जिस का सफ़र किसी नाजायज़ काम के लिए हो ज़रूरी है कि सफ़र में […]

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    क़ज़ा रोज़े के अहकाम

    Rate this post (1703) अगर कोई दीवाना अच्छा हो जाये तो उस के लिए आलमे दीवानगी के रोज़ों की क़ज़ा वाजिब नही। (1704) अगर कोई काफ़िर मुसलमान हो जाये तो जमाने कुफ़्र के रोज़ों की क़ज़ा वाजिब नही है लेकिन अगर एक मुसलमान काफ़िर हो जाये और फ़िर मुसलमान हो जाये तो ज़रूरी है कि […]

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    वह सूरतें जिन में फक़त रोजे की क़जा वाजिब है

    Rate this post (1697) जो हालतें ब्यान हो चुकी हैं उन के अलावा इन चंद हालतों में इंसान पर सिर्फ़ रोज़े की क़ज़ा वाजिब है कफ़्फ़ारा वाजिब नही है। (1) एक शख्स माहे रमज़ान की रात में जुनुब हो जाये और जैसा कि मसअला न0 1639 में तफ़सील से बताया गया है कि सुबह की […]

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    रोज़ का कफ़्फ़ारा

    Rate this post (1669) माहे रमज़ान का रोज़ा तोड़ने के कफ़्फ़ारे के तौर पर ज़रूरी है कि इंसान एक ग़ुलाम आज़ाद करे या उन अहकाम के मुताबिक़ जो आइंदा मसअले में बयान किये जायेंगें दो महीने रोज़ा रखे या साठ फ़क़ीरों को पेट भर कर खाना खिलाये या हर फ़क़ीर को एक मुद ¾ किलो […]

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    रोज़े की क़ज़ा और कफ़्फ़ारा दोनों वाजिब

    Rate this post ऐसी हालतें जिन में रोज़े की क़ज़ा और कफ़्फ़ारा दोनों वाजिब हो जाते हैं- (1667) अगर कोई शख्स माहे रमज़ान के रोज़े को खाने, पीने या हमबिस्तरी या इस्तिमना या जनाबत पर बाक़ी रहने की वजह से बातिल करे जब कि यह काम मजबूरी या नाचारी की बिना पर न हो बल्कि […]

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    वह चीज़ें जो रोज़ेदार के लिए मकरूह हैं

    Rate this post (1666) रोज़े दार के लिए कुछ चीज़ें मकरूह हैं जिन में से बाज़ यह हैं- (1) आँख में दवा डालना और सुरमा लागाना जब कि उस का मज़ा या बू हलक़ में पहुँचे। (2) हर ऐसा काम करना जो कि कमज़ोरी का बाइस हो मसलन फ़स्द खुलवाना और हम्माम जाना। (3) (नाक […]

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    उन चीज़ों के अहकाम जो रोज़े को बातिल करती हैं-

    Rate this post (1662) अगर इंसान जान बूझ कर और इखतियार के साथ कोई ऐसा काम करे जो रोज़े को बातलि करता हो, तो उस का रोज़ा बातिल हो जाता है। अगर कोई ऐसा काम जान बूझ कर न करे तो फिर इशकाल नही लेकिन अगर जुनुब सो जाये और उस तफ़सील के मुताबिक़ जो […]

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