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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-14

    Rate this post ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा शैली मनुष्य को कभी भी उसके आस पास के वातावरण और प्रकृति से अलग नहीं समझती। मनुष्य के आस पास के वातावरण में जो कुछ है वह उस पर प्रभाव डालता है। उनमें से एक हवा है। हवा मनुष्य की त्वचा पर प्रभाव डालती है। यह प्रभाव […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-13

    Rate this post समय बीतता जाता है और प्रकृति में परिवर्तन आते रहते हैं, समय रंग बदलता रहता है और मौसम एक के बाद एक आते रहते हैं, बसंत के बाद गर्मियां, उसके बाद पतझड़ और फिर सर्दियों का मौसम आ जाता है। हर मौसम की अपनी विशेषताएं होती हैं और वह अपने प्रभाव छोड़ता […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-12

    Rate this post आहार मनुष्य को स्वस्थ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आहार का प्रयोग एक अटल आवश्यकता है ताकि मनुष्य के शरीर में भीतरी और बाहरी कारकों के अंतर्गत जो ऊर्जा ख़र्च होती है उसे पुनर्जीवित किया जा सके। यह आहार की मुख्य भूमिका है। ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा की दृष्टि में […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-11

    Rate this post ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के अनुसार जिस आहार का सेवन किया जाता है वह मुंह के पानी से मिलकर, चबाए जाने की प्रक्रिया और पाचनतंत्र की गतिविधियों से प्रभावित होकर जौ के सूप की भांति एक गाढ़े लेप में परिवर्तित हो जाता है जिसे अमाशय का कीलूस कहा जाता है। उसके […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-10

    Rate this post क्या खाएं क्या न खाएं और किस प्रकार खाएं यह प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा का एक महत्त्वपूर्ण विषय है जिस पर प्राचीन चिकित्सा के हकीम विशेष रूप से ध्यान दिया करते थे और बहुत सी समस्या जैस जलवायु, आयु का बढ़ना आदि जो कि मनुष्य की क्षमता व शक्ति से बाहर हैं और […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-9 (2)

    Rate this post खाना पीना केवल भूख और प्यास की आवश्यकता को दूर करना ही नहीं बल्कि मानवीय प्रवृत्ति के दृष्टिगत मनुष्य का मानसिक व आनंदमयी आयाम है। मनुष्य की इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए खाना पकाना और स्वादिष्ट पकवान तैयार करना एक कला में परिवर्तित हो गया है। ईरान का प्राचीन पारंपरिक […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-9 (1)

    Rate this post प्रकृति में हवा, जारी रहने और चलने की प्रतीक है। हवा हल्की और तरल होती है और उसकी वास्तविक विशेषता गर्म होती है। इसी आधार पर ईरान के प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के विद्वानों और हकीमों ने चार तत्वों में से इस तत्व का नाम तात्विक हवा रखा है। तात्विक हवा का स्वभाव […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-8

    Rate this post आग प्रकृति में गर्मी की प्रतीक है। आग हल्की और गर्म है। इसकी छिपी हुई विशेषता शुष्क है और यह उस शरीर का चिन्ह है जिसकी प्रवृत्ति बहुत ही गर्म हो। इसी विशेषता के आधार पर प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के हकीमों ने इस तत्व का नाम तात्विक आग रखा है। जिन लोगों […]

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    पारंपरिक चिकित्सा – 7

    Rate this post जल की विशेषता व प्रवृत्ति तरल, बहने वाला, सक्रिय और द्रव होना है, पानी ठंडा और भारी है। जल की छिपी हुई विशेषता तरलता है इसी आधार पर ईरान के प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा में से इस तत्व को तरल और ठंडा कहा गया है अर्थात तात्विक जल की गुणवत्ता व विशेषता ठंडी […]

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    पारंपरिक चिकित्सा -6

    Rate this post हमने बताया था कि हर पदार्थ चार मूल तत्वों से मिलकर बनते हैं। तात्विक मिट्टी, तात्विक जल, तात्विक हवा और तात्विक अग्नि। हमने हर तत्व की मनोदशा भी बयान की थी। डाक्टर नासीरी कहते हैं कि हमने बताया था कि तात्विक मिट्टी की ज़िम्मेदारी स्थिर रखना है और सृष्टि की सारी चीज़ों […]

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    पारंपरिक चिकित्सा-5

    Rate this post ईरान के पारंपरिक प्राचीन चिकित्सा की थ्योरियों के अनुसार मनुष्य का शरीर चार मूल पदार्थों से बनता है और वह हैं तात्विक मिट्टी, तात्विक जल, तात्विक हवा और तात्विक आग। यह चार पदार्थ मनुष्य के शरीर में उचित मात्रा में मौजूद रहें तो उसका स्वभाव संतुलित रहता है और उसे कोई बीमारी […]

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    शलजम का फ़ायदा

    Rate this post शलजम खाओ क्योंकि कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसके शरीर में कोढ़ की नस न हो और शलजम इस नस को जला देती हैः इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम शलजम खाओ क्योंकि कोई ऐसा शख़्स नहीं है जिसके जिस्म में कोढ़ की रग न हो और शलजम इस नस को जला देती हैः […]

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    नींबू खाइये और बीमारियों से सुरक्षित रहिए।

    Rate this post ताज़ा ताज़ा नींबू केवल रस भरा ही नहीं होता बल्कि इसमें भरी हैं ढेर सारी विशेषताएं भी, जिसके कारण बीमारियां आपसे दूर भागती हैं। दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-11

    Rate this post ईरान की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के अनुसार जिस आहार का सेवन किया जाता है वह मुंह के पानी से मिलकर, चबाए जाने की प्रक्रिया और पाचनतंत्र की गतिविधियों से प्रभावित होकर जौ के सूप की भांति एक गाढ़े लेप में परिवर्तित हो जाता है जिसे अमाशय का कीलूस कहा जाता है। उसके […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-10

    Rate this post क्या खाएं क्या न खाएं और किस प्रकार खाएं यह प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा का एक महत्त्वपूर्ण विषय है जिस पर प्राचीन चिकित्सा के हकीम विशेष रूप से ध्यान दिया करते थे और बहुत सी समस्या जैस जलवायु, आयु का बढ़ना आदि जो कि मनुष्य की क्षमता व शक्ति से बाहर हैं और […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-9 (1)

    Rate this post खाना पीना केवल भूख और प्यास की आवश्यकता को दूर करना ही नहीं बल्कि मानवीय प्रवृत्ति के दृष्टिगत मनुष्य का मानसिक व आनंदमयी आयाम है। मनुष्य की इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए खाना पकाना और स्वादिष्ट पकवान तैयार करना एक कला में परिवर्तित हो गया है। ईरान का प्राचीन पारंपरिक […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-9

    Rate this post प्रकृति में हवा, जारी रहने और चलने की प्रतीक है। हवा हल्की और तरल होती है और उसकी वास्तविक विशेषता गर्म होती है। इसी आधार पर ईरान के प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा के विद्वानों और हकीमों ने चार तत्वों में से इस तत्व का नाम तात्विक हवा रखा है। तात्विक हवा का स्वभाव […]

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    पारंपरिक चिकित्सा शैली-8

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    पारंपरिक चिकित्सा – 7

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    पारंपरिक चिकित्सा -6

    Rate this post हमने बताया था कि हर पदार्थ चार मूल तत्वों से मिलकर बनते हैं। तात्विक मिट्टी, तात्विक जल, तात्विक हवा और तात्विक अग्नि। हमने हर तत्व की मनोदशा भी बयान की थी। डाक्टर नासीरी कहते हैं कि हमने बताया था कि तात्विक मिट्टी की ज़िम्मेदारी स्थिर रखना है और सृष्टि की सारी चीज़ों […]

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