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    • सूरए इसरा, आयतें 11-14, (कार्यक्रम 477)
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      सूरए इसरा, आयतें 11-14, (कार्यक्रम 477)

      सूरए इसरा, आयतें 11-14, (कार्यक्रम 477)Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 11 की तिलावत सुनें। وَيَدْعُ الْإِنْسَانُ بِالشَّرِّ دُعَاءَهُ بِالْخَيْرِ وَكَانَ الْإِنْسَانُ عَجُولًا (11) और मनुष्य बुराई की इसी प्रकार इच्छा करता है जैसे वह भलाई को चाहता है और मनुष्य सदैव ही उतावला रहा है।(17:11) क़ुरआने मजीद में मनुष्य के […]

    • सूरए हिज्र, आयतें 65-73, (कार्यक्रम 440)
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      सूरए हिज्र, आयतें 65-73, (कार्यक्रम 440)

      सूरए हिज्र, आयतें 65-73, (कार्यक्रम 440)Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर ६५ और ६६ की तिलावत सुनें।فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَاتَّبِعْ أَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ (65) وَقَضَيْنَا إِلَيْهِ ذَلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَؤُلَاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِحِينَ (66)हे लूत! अपने परिवार वालों को लेकर रात के किसी भाग में […]

    • क़ुरआने मजीद ने क्यों दो तरीक़ों यानी ज़ाहिरी और बातिनी तौर पर बयान फ़रमाया है?
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      क़ुरआने मजीद ने क्यों दो तरीक़ों यानी ज़ाहिरी और बातिनी तौर पर बयान फ़रमाया है?

      क़ुरआने मजीद ने क्यों दो तरीक़ों यानी ज़ाहिरी और बातिनी तौर पर बयान फ़रमाया है?Rate this post 1. इंसान ने अपनी ज़िन्दगी में जो कि सिर्फ़ दुनियावी और आरेज़ी ज़िन्दगी है, अपनी हयात का ख़ैमा एक बुलबुले की तरह माद्दे (material) से उसका हमेशा वास्ता है। उसके अँदरुनी और बेरुनी हवास भी माद्दे और माद्दियात […]

    • सूरए निसा; आयतें 125-128 (कार्यक्रम 150)
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      सूरए निसा; आयतें 125-128 (कार्यक्रम 150)

      सूरए निसा; आयतें 125-128 (कार्यक्रम 150)Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 125 और 126 की तिलावत सुनते हैं।وَمَنْ أَحْسَنُ دِينًا مِمَّنْ أَسْلَمَ وَجْهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ وَاتَّبَعَ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا وَاتَّخَذَ اللَّهُ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلًا (125) وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُحِيطًا (126)और किसका धर्म उससे […]

    • सूरए बक़रह; आयतें 260-263 (कार्यक्रम 74)
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      सूरए बक़रह; आयतें 260-263 (कार्यक्रम 74)

      सूरए बक़रह; आयतें 260-263 (कार्यक्रम 74)Rate this post सूरए बक़रह की आयत क्रमांक 260 इस प्रकार है।وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ رَبِّ أَرِنِي كَيْفَ تُحْيِي الْمَوْتَى قَالَ أَوَلَمْ تُؤْمِنْ قَالَ بَلَى وَلَكِنْ لِيَطْمَئِنَّ قَلْبِي قَالَ فَخُذْ أَرْبَعَةً مِنَ الطَّيْرِ فَصُرْهُنَّ إِلَيْكَ ثُمَّ اجْعَلْ عَلَى كُلِّ جَبَلٍ مِنْهُنَّ جُزْءًا ثُمَّ ادْعُهُنَّ يَأْتِينَكَ سَعْيًا وَاعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ […]

    • क़ुरआन में तहरीफ़ नही
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      क़ुरआन में तहरीफ़ नही

      क़ुरआन में तहरीफ़ नहीRate this post हमारा अक़ीदह यह है कि आज जो क़ुरआन उम्मते मुस्लेमाँ के हाथों में है यह वही क़ुरआन है जो पैगम्बरे इस्लाम (स.)पर नाज़िल हुआ था। न इस में से कुछ कम हुआ है और न ही इस में कुछ बढ़ाया गया है। पहले दिन से ही कातिबाने वही का […]

    • सूरए अम्बिया, आयतें 79-82, (कार्यक्रम 584)
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      सूरए अम्बिया, आयतें 79-82, (कार्यक्रम 584)

      सूरए अम्बिया, आयतें 79-82, (कार्यक्रम 584)Rate this post आइये पहले सूरए अम्बिया की 79वीं आयत की तिलावत सुनें। فَفَهَّمْنَاهَا سُلَيْمَانَ وَكُلًّا آَتَيْنَا حُكْمًا وَعِلْمًا وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُودَ الْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَالطَّيْرَ وَكُنَّا فَاعِلِينَ (79) तो हमने सुलैमान को (वास्तविक फ़ैसला) समझा दिया और दोनों में से प्रत्येक को हमने तत्वदर्शिता और ज्ञान प्रदान किया था। और […]

    • सूरए अन्फ़ाल, आयतें 30-33, (कार्यक्रम 285)
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      सूरए अन्फ़ाल, आयतें 30-33, (कार्यक्रम 285)

      सूरए अन्फ़ाल, आयतें 30-33, (कार्यक्रम 285)Rate this post आइये अब सूरए अन्फ़ाल की आयत संख्या 30 की तिलावत सुनते हैं।وَإِذْ يَمْكُرُ بِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِيُثْبِتُوكَ أَوْ يَقْتُلُوكَ أَوْ يُخْرِجُوكَ وَيَمْكُرُونَ وَيَمْكُرُ اللَّهُ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ (30)और (हे पैग़म्बर! याद कीजिए उस समय को) जब काफ़िर आपको बंदी बनाने या आपकी हत्या करने या आपको मक्के […]

    • सूरए अनआम, आयतें 71-74, (कार्यक्रम 210)
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      सूरए अनआम, आयतें 71-74, (कार्यक्रम 210)

      सूरए अनआम, आयतें 71-74, (कार्यक्रम 210)Rate this post आइये सूरए अनआम की आयत नंबर 71 और 72 की तिलावत सुनते हैंقُلْ أَنَدْعُو مِنْ دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنْفَعُنَا وَلَا يَضُرُّنَا وَنُرَدُّ عَلَى أَعْقَابِنَا بَعْدَ إِذْ هَدَانَا اللَّهُ كَالَّذِي اسْتَهْوَتْهُ الشَّيَاطِينُ فِي الْأَرْضِ حَيْرَانَ لَهُ أَصْحَابٌ يَدْعُونَهُ إِلَى الْهُدَى ائْتِنَا قُلْ إِنَّ هُدَى اللَّهِ هُوَ الْهُدَى […]

    • सूरए नहल, आयतें 104-107, (कार्यक्रम 468)
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      सूरए नहल, आयतें 104-107, (कार्यक्रम 468)

      सूरए नहल, आयतें 104-107, (कार्यक्रम 468)Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 104 और 105 की तिलावत सुनें। إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِآَيَاتِ اللَّهِ لَا يَهْدِيهِمُ اللَّهُ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ (104) إِنَّمَا يَفْتَرِي الْكَذِبَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِآَيَاتِ اللَّهِ وَأُولَئِكَ هُمُ الْكَاذِبُونَ (105)निश्चित रूप से जो लोग ईश्वरीय आयतों पर ईमान नहीं […]

    • क़ुरआने मजीद में जर्य और इंतेबाक़
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      क़ुरआने मजीद में जर्य और इंतेबाक़

      क़ुरआने मजीद में जर्य और इंतेबाक़Rate this post इस बात के पेशे नज़र कि क़ुरआने मजीद एक ऐसी किताब है जो सब के लिये और हमेशा बाक़ी रहने वाली है और उस की छुपी हुई बातें भी ज़ाहिर बातों की तरह जारी हैं और मुस्तक़बिल और माज़ी के साथ भी ज़मान ए हाल की तरह […]

    • सूरए रअद, आयतें 7-10, (कार्यक्रम 407)
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      सूरए रअद, आयतें 7-10, (कार्यक्रम 407)

      सूरए रअद, आयतें 7-10, (कार्यक्रम 407)Rate this post आइये अब सूरए रअद की आयत संख्या 7 की तिलावत सुनते हैं।وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنْزِلَ عَلَيْهِ آَيَةٌ مِنْ رَبِّهِ إِنَّمَا أَنْتَ مُنْذِرٌ وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍ (7)और काफ़िर कहते हैं कि क्यों उनके पास उनके पालनहार की ओर से कोई निशानी और चमत्कार नहीं आया है? (हे […]

    • सूरए हज, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 591)
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      सूरए हज, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 591)

      सूरए हज, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 591)Rate this post आइये पहले सूरए हज की पहली और दूसरी आयतों की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ يَا أَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ إِنَّ زَلْزَلَةَ السَّاعَةِ شَيْءٌ عَظِيمٌ (1) يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّا أَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى النَّاسَ سُكَارَى وَمَا هُمْ بِسُكَارَى وَلَكِنَّ عَذَابَ […]

    • सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)
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      सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)

      सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)Rate this post इससे पहले सूरए मरयम की आयतों की व्याख्या समाप्त हुई और इस कार्यक्रम से हम क़ुरआने मजीद के बीसवें सूरे अर्थात सूरए ताहा की आयतों की व्याख्या आरंभ कर रहे हैं। आइये पहले इस सूरे की पहली और दूसरी आयतों की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ. […]

    • सूरए आले इमरान; आयतें १४-१७ (कार्यक्रम 82)
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      सूरए आले इमरान; आयतें १४-१७ (कार्यक्रम 82)

      सूरए आले इमरान; आयतें १४-१७ (कार्यक्रम 82)Rate this post सूरए आले इमरान की आयत संख्या १४ इस प्रकार है। زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ الشَّهَوَاتِ مِنَ النِّسَاءِ وَالْبَنِينَ وَالْقَنَاطِيرِ الْمُقَنْطَرَةِ مِنَ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ وَالْخَيْلِ الْمُسَوَّمَةِ وَالْأَنْعَامِ وَالْحَرْثِ ذَلِكَ مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَاللَّهُ عِنْدَهُ حُسْنُ الْمَآَبِ (14) लोगों के लिए पत्नियों, संतानों, सोने-चांदी से बटोरे हुए धन, अच्छे […]

    • सूरए तौबा, आयतें 127-129, (कार्यक्रम 324)
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      सूरए तौबा, आयतें 127-129, (कार्यक्रम 324)

      सूरए तौबा, आयतें 127-129, (कार्यक्रम 324)Rate this post आइये पहले सूरए तौबा की आयत क्रमांक 127 की तिलावत सुनें।وَإِذَا مَا أُنْزِلَتْ سُورَةٌ نَظَرَ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ هَلْ يَرَاكُمْ مِنْ أَحَدٍ ثُمَّ انْصَرَفُوا صَرَفَ اللَّهُ قُلُوبَهُمْ بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَا يَفْقَهُونَ (127)और जब कभी कोई सूरा उतरता है तो कुछ मिथ्याचारी दूसरों की ओर देखते हैं (कहते […]

    • सूरए हूद, आयतें 33-37, (कार्यक्रम 354)
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      सूरए हूद, आयतें 33-37, (कार्यक्रम 354)

      सूरए हूद, आयतें 33-37, (कार्यक्रम 354)Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 33 और 34 की तिलावत सुनते हैं।قَالَ إِنَّمَا يَأْتِيكُمْ بِهِ اللَّهُ إِنْ شَاءَ وَمَا أَنْتُمْ بِمُعْجِزِينَ (33) وَلَا يَنْفَعُكُمْ نُصْحِي إِنْ أَرَدْتُ أَنْ أَنْصَحَ لَكُمْ إِنْ كَانَ اللَّهُ يُرِيدُ أَنْ يُغْوِيَكُمْ هُوَ رَبُّكُمْ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ (34)(और हज़रत नूह ने काफ़िरों […]

    • सूरए मरयम, आयतें 51-55, (कार्यक्रम 535)
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      सूरए मरयम, आयतें 51-55, (कार्यक्रम 535)

      सूरए मरयम, आयतें 51-55, (कार्यक्रम 535)Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर 51 की तिलावत सुनें। وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مُوسَى إِنَّهُ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَبِيًّا (51) और (हे पैग़म्बर!) इस किताब में मूसा का भी उल्लेख कीजिए कि निश्चित रूप से वे चुने हुए (बंदे) और ईश्वर के रसूल व नबी […]

    • सूरए अम्बिया, आयतें 11-15, (कार्यक्रम 570)
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      सूरए अम्बिया, आयतें 11-15, (कार्यक्रम 570)

      सूरए अम्बिया, आयतें 11-15, (कार्यक्रम 570)Rate this post आइये पहले सूरए अम्बिया की ग्यारहवीं और बारहवीं आयतों की तिलावत सुनें। وَكَمْ قَصَمْنَا مِنْ قَرْيَةٍ كَانَتْ ظَالِمَةً وَأَنْشَأْنَا بَعْدَهَا قَوْمًا آَخَرِينَ (11) فَلَمَّا أَحَسُّوا بَأْسَنَا إِذَا هُمْ مِنْهَا يَرْكُضُونَ (12) और कितनी ही बस्तियों को, जो अत्याचारी थीं, हमने विनष्ट कर दिया और उनके बाद हमने […]

    • सूरए यूसुफ़, आयतें 25-27, (कार्यक्रम 381)
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      सूरए यूसुफ़, आयतें 25-27, (कार्यक्रम 381)

      सूरए यूसुफ़, आयतें 25-27, (कार्यक्रम 381)Rate this post आइये पहले सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 25 की तिलावत सुनते हैं।وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيصَهُ مِنْ دُبُرٍ وَأَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَى الْبَابِ قَالَتْ مَا جَزَاءُ مَنْ أَرَادَ بِأَهْلِكَ سُوءًا إِلَّا أَنْ يُسْجَنَ أَوْ عَذَابٌ أَلِيمٌ (25)और (यूसुफ़ तथा मिस्र के शासक की पत्नी) दोनों दरवाज़े की ओर दौड़े। […]

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