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    सूरए ताहा, आयतें 81-84, (कार्यक्रम 557)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 81 की तिलावत सुनें। كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَلَا تَطْغَوْا فِيهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبِي وَمَنْ يَحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَبِي فَقَدْ هَوَى (81) हमने तुम्हें जो कुछ पवित्र वस्तुएं (रोज़ी स्वरूप) प्रदान की हैं, उनमें से खाओ किन्तु इसमें सीमा से आगे न बढ़ो कि तुम […]

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    सूरए ताहा, आयतें 77-80, (कार्यक्रम 556)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 77 की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَى مُوسَى أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًا لَا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَى (77) और हमने मूसा की ओर अपना विशेष संदेश वहि भेजा कि मेरे बन्दों को रातों रात (मिस्र से) लेकर निकल पड़ो और […]

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    सूरए ताहा, आयतें 72-76, (कार्यक्रम 555)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 72 और 73 की तिलावत सुनें। قَالُوا لَنْ نُؤْثِرَكَ عَلَى مَا جَاءَنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالَّذِي فَطَرَنَا فَاقْضِ مَا أَنْتَ قَاضٍ إِنَّمَا تَقْضِي هَذِهِ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا (72) إِنَّا آَمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِ وَاللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَى (73) जादूगरों ने (फ़िरऔन से) […]

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    सूरए ताहा, आयतें 67-71, (कार्यक्रम 554)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 67, 68 और 69 की तिलावत सुनें। فَأَوْجَسَ فِي نَفْسِهِ خِيفَةً مُوسَى (67) قُلْنَا لَا تَخَفْ إِنَّكَ أَنْتَ الْأَعْلَى (68) وَأَلْقِ مَا فِي يَمِينِكَ تَلْقَفْ مَا صَنَعُوا إِنَّمَا صَنَعُوا كَيْدُ سَاحِرٍ وَلَا يُفْلِحُ السَّاحِرُ حَيْثُ أَتَى (69) तो मूसा ने अपने मन में (जाति के […]

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    सूरए ताहा, आयतें 61-66, (कार्यक्रम 553)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 61वीं और 62वीं आयतों की तिलावत सुनें। قَالَ لَهُمْ مُوسَى وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُمْ بِعَذَابٍ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرَى (61) فَتَنَازَعُوا أَمْرَهُمْ بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّوا النَّجْوَى (62) मूसा ने उन लोगों से कहाः धिक्कार हो तुम पर! झूठ गढ़ कर उसे ईश्वर पर न थोपो […]

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    सूरए ताहा, आयतें 55-60, (कार्यक्रम 552)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 55वीं आयत की तिलावत सुनें। مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَى (55) हमने मिट्टी से ही तुम्हारी रचना की है और उसी में तुम्हें लौटाएंगे और एक बार फिर तुम्हें मिट्टी से बाहर निकालेंगे। (20:55) इससे पहले हमने कहा कि क़ुरआने मजीद ने एकेश्वरवाद और […]

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    सूरए ताहा, आयतें 49-54, (कार्यक्रम 551)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 49वीं और 50वीं आयतों की तिलावत सुनें। قَالَ فَمَنْ رَبُّكُمَا يَا مُوسَى (49) قَالَ رَبُّنَا الَّذِي أَعْطَى كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدَى (50) (फ़िरऔन ने) कहाः तो हे मूसा! तुम दोनों का पालनहार कौन है? (20:49) मूसा ने कहाः हमारा पालनहार वह है जिसने हर वस्तु की […]

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    सूरए ताहा, आयतें 43-48, (कार्यक्रम 550)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 43वीं और 44वीं आयतों की तिलावत सुनें। اذْهَبَا إِلَى فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَى (43) فَقُولَا لَهُ قَوْلًا لَيِّنًا لَعَلَّهُ يَتَذَكَّرُ أَوْ يَخْشَى (44) (हे मूसा! तुम और हारून) दोनों फ़िरऔन के पास जाओ की निश्चित रूप से वह उद्दंडी हो गया है। (20:43) और तुम दोनों उससे बड़े […]

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    सूरए ताहा, आयतें 37-42, (कार्यक्रम 549)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 37वीं से लेकर 39वीं आयत तक की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَى (37) إِذْ أَوْحَيْنَا إِلَى أُمِّكَ مَا يُوحَى (38) أَنِ اقْذِفِيهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِفِيهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوٌّ لِي وَعَدُوٌّ لَهُ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِنِّي وَلِتُصْنَعَ عَلَى عَيْنِي (39) और (हे […]

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    सूरए ताहा, आयतें 25-36, (कार्यक्रम 548)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 25वीं से लेकर 28वीं आयत तक की तिलावत सुनें। قَالَ رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي (25) وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي (26) وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَانِي (27) يَفْقَهُوا قَوْلِي (28) (मूसा ने) कहा कि हे मेरे पालनहार! मेरे सीने को फैला दे (20:25) और मेरे लिए मेरे कार्य को सरल […]

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    सूरए ताहा, आयतें 19-24, (कार्यक्रम 547)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत नंबर 19, 20 और 21 की तिलावत सुनें। قَالَ أَلْقِهَا يَا مُوسَى (19) فَأَلْقَاهَا فَإِذَا هِيَ حَيَّةٌ تَسْعَى (20) قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا الْأُولَى (21) (ईश्वर ने) कहा, हे मूसा! अपनी लाठी को फेंक दो। (20:19) तो मूसा ने उसे फेंक दिया, (जैसे ही […]

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    सूरए ताहा, आयतें 13-18, (कार्यक्रम 546)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत नंबर 13 और 14 की तिलावत सुनें। وَأَنَا اخْتَرْتُكَ فَاسْتَمِعْ لِمَا يُوحَى (13) إِنَّنِي أَنَا اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدْنِي وَأَقِمِ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي (14) (हे मूसा!) मैंने तुम्हें (पैग़म्बरी के लिए) चुन लिया तो जो कुछ वहि के रूप में तुम तक भेजा जा रहा […]

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    सूरए ताहा, आयतें 7-12, (कार्यक्रम 545)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 7वीं और 8वीं आयतों की तिलावत सुनें। وَإِنْ تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَإِنَّهُ يَعْلَمُ السِّرَّ وَأَخْفَى (7) اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ (8) और यदि बात को ऊंची आवाज़ से स्पष्ट करो (या उसे छिपाए रखो, दोनों ईश्वर के लिए एकसमान है) कि वह लोगों […]

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    सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)

    Rate this post इससे पहले सूरए मरयम की आयतों की व्याख्या समाप्त हुई और इस कार्यक्रम से हम क़ुरआने मजीद के बीसवें सूरे अर्थात सूरए ताहा की आयतों की व्याख्या आरंभ कर रहे हैं। आइये पहले इस सूरे की पहली और दूसरी आयतों की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ. طه (1) مَا أَنْزَلْنَا عَلَيْكَ […]

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    सूरए मरयम, आयतें 93-98, (कार्यक्रम 543)

    Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर 93 की तिलावत सुनें। إِنْ كُلُّ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ إِلَّا آَتِي الرَّحْمَنِ عَبْدًا (93) आकाशों और धरती में ऐसा कोई भी नहीं है जो दयावान (ईश्वर) के समक्ष दास के रूप में आने वाला न हो।(19:93) इससे पहले बताया गया था कि अनेकेश्वरवादी, फ़रिश्तों […]

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    सूरए मरयम, आयतें 87-92, (कार्यक्रम 542)

    Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर ८७ की तिलावत सुनें। لَا يَمْلِكُونَ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَنِ اتَّخَذَ عِنْدَ الرَّحْمَنِ عَهْدًا (87) उस दिन वे सिफारिश नहीं कर पाएगें सिवाए उन लोगों के जिनकी ईश्वर के निकट प्रतिबद्धता होगी।(19:87) पिछली आयतों में बताया गया था कि अनेकेश्वरवादी एक ओर तो अपनी धन-संपत्ति तथा […]

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    सूरए मरयम, आयतें 81-86, (कार्यक्रम 541)

    Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर ८१ और ८२ की तिलावत सुनें। وَاتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللَّهِ آَلِهَةً لِيَكُونُوا لَهُمْ عِزًّا (81) كَلَّا سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ وَيَكُونُونَ عَلَيْهِمْ ضِدًّا (82) उन लोगों ने एक ईश्वर के स्थान पर दूसरे देवताओं का चयन किया ताकि वह देवता उन के लिए सम्मान का कारण बनें […]

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    सूरए मरयम, आयतें 75-80, (कार्यक्रम 540)

    Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर 75 की तिलावत सुनें। قُلْ مَنْ كَانَ فِي الضَّلَالَةِ فَلْيَمْدُدْ لَهُ الرَّحْمَنُ مَدًّا حَتَّى إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ إِمَّا الْعَذَابَ وَإِمَّا السَّاعَةَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ شَرٌّ مَكَانًا وَأَضْعَفُ جُنْدًا (75) (हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि जो कोई पथभ्रष्टता में है, उसे दयावान (ईश्वर) कुछ समय […]

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    सूरए मरयम, आयतें 71-74, (कार्यक्रम 539)

    Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर 71 और 72 की तिलावत सुनें। وَإِنْ مِنْكُمْ إِلَّا وَارِدُهَا كَانَ عَلَى رَبِّكَ حَتْمًا مَقْضِيًّا (71) ثُمَّ نُنَجِّي الَّذِينَ اتَّقَوْا وَنَذَرُ الظَّالِمِينَ فِيهَا جِثِيًّا (72) और तुममें से ऐसा कोई नहीं जो नरक में न जाने वाला हो, यह तुम्हारे पालनहार का निश्चित फ़ैसला है, […]

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    सूरए मरयम, आयतें 66-70, (कार्यक्रम 538)

    Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर 66 और 67 की तिलावत सुनें। وَيَقُولُ الْإِنْسَانُ أَئِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا (66) أَوَلَا يَذْكُرُ الْإِنْسَانُ أَنَّا خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْئًا (67) और मनुष्य कहेगा कि क्या जब मैं मर जाऊंगा तो शीघ्र ही (क़ब्र से) पुनः जीवित हो कर निकलूंगा? […]

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