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  •  ईश्वरीय वाणी – 10
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    ईश्वरीय वाणी – 10

    Rate this post सूरे माएदा सूरे माएदा की आयत संख्या 27 से 31 धरती पर पहले मनुष्य व पहले ईश्वरीय दूत हज़रत आदम और उनके दो बेटों में से एक के दूसरे के हाथों क़त्ल किए जाने की घटना की ओर संकेत करती है। आयत क्रमांक 27 का अनुवाद है, (हे पैग़म्बऱ) आप उन्हें आदम […]

  •  सूरए नूर, आयतें 62-64, (कार्यक्रम 638)
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    सूरए नूर, आयतें 62-64, (कार्यक्रम 638)

    Rate this post إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ آَمَنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَإِذَا كَانُوا مَعَهُ عَلَى أَمْرٍ جَامِعٍ لَمْ يَذْهَبُوا حَتَّى يَسْتَأْذِنُوهُ إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَأْذِنُونَكَ أُولَئِكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ فَإِذَا اسْتَأْذَنُوكَ لِبَعْضِ شَأْنِهِمْ فَأْذَنْ لِمَنْ شِئْتَ مِنْهُمْ وَاسْتَغْفِرْ لَهُمُ اللَّهَ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ (62) ईमान वाले तो बस वही हैं जो ईश्वर और उसके पैग़म्बर पर […]

  •  सूरए नूर, आयतें 58-61, (कार्यक्रम 637)
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    सूरए नूर, आयतें 58-61, (कार्यक्रम 637)

    Rate this post يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آَمَنُوا لِيَسْتَأْذِنْكُمُ الَّذِينَ مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ وَالَّذِينَ لَمْ يَبْلُغُوا الْحُلُمَ مِنْكُمْ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ مِنْ قَبْلِ صَلَاةِ الْفَجْرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُمْ مِنَ الظَّهِيرَةِ وَمِنْ بَعْدِ صَلَاةِ الْعِشَاءِ ثَلَاثُ عَوْرَاتٍ لَكُمْ لَيْسَ عَلَيْكُمْ وَلَا عَلَيْهِمْ جُنَاحٌ بَعْدَهُنَّ طَوَّافُونَ عَلَيْكُمْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَعْضٍ كَذَلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآَيَاتِ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ (58) وَإِذَا […]

  •  सूरए नूर, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 636)
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    सूरए नूर, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 636)

    Rate this post وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ لَئِنْ أَمَرْتَهُمْ لَيَخْرُجُنَّ قُلْ لَا تُقْسِمُوا طَاعَةٌ مَعْرُوفَةٌ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ (53) قُلْ أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ فَإِنْ تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيْكُمْ مَا حُمِّلْتُمْ وَإِنْ تُطِيعُوهُ تَهْتَدُوا وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ (54) और उन्होंने अल्लाह की कड़ी क़सम खाई कि यदि आप […]

  •  सूरए नूर, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 635)
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    सूरए नूर, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 635)

    Rate this post وَإِذَا دُعُوا إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِنْهُمْ مُعْرِضُونَ (48) وَإِنْ يَكُنْ لَهُمُ الْحَقُّ يَأْتُوا إِلَيْهِ مُذْعِنِينَ (49) أَفِي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ أَمِ ارْتَابُوا أَمْ يَخَافُونَ أَنْ يَحِيفَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَرَسُولُهُ بَلْ أُولَئِكَ هُمَ الظَّالِمُونَ (50) और जब उन्हें ईश्वर और उसके पैग़म्बर की ओर बुलाया जाता हैताकि पैग़म्बर उनके बीच […]

  •  सूरए नूर, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 634)
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    सूरए नूर, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 634)

    Rate this post أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِنْ جِبَالٍ فِيهَا مِنْ بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَنْ يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَنْ مَنْ يَشَاءُ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ (43) يُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ إِنَّ فِي ذَلِكَ لَعِبْرَةً لِأُولِي الْأَبْصَارِ (44) क्या तुमने […]

  •  सूरए नूर, आयतें 39-42, (कार्यक्रम 633)
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    सूरए नूर, आयतें 39-42, (कार्यक्रम 633)

    Rate this post وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَعْمَالُهُمْ كَسَرَابٍ بِقِيعَةٍ يَحْسَبُهُ الظَّمْآَنُ مَاءً حَتَّى إِذَا جَاءَهُ لَمْ يَجِدْهُ شَيْئًا وَوَجَدَ اللَّهَ عِنْدَهُ فَوَفَّاهُ حِسَابَهُ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ (39) أَوْ كَظُلُمَاتٍ فِي بَحْرٍ لُجِّيٍّ يَغْشَاهُ مَوْجٌ مِنْ فَوْقِهِ مَوْجٌ مِنْ فَوْقِهِ سَحَابٌ ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ إِذَا أَخْرَجَ يَدَهُ لَمْ يَكَدْ يَرَاهَا وَمَنْ لَمْ يَجْعَلِ اللَّهُ لَهُ نُورًا […]

  •  सूरए नूर, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 632)
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    सूरए नूर, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 632)

    Rate this post सूरए नूर की आयत क्रमांक 35-38 اللَّهُ نُورُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ مَثَلُ نُورِهِ كَمِشْكَاةٍ فِيهَا مِصْبَاحٌ الْمِصْبَاحُ فِي زُجَاجَةٍ الزُّجَاجَةُ كَأَنَّهَا كَوْكَبٌ دُرِّيٌّ يُوقَدُ مِنْ شَجَرَةٍ مُبَارَكَةٍ زَيْتُونَةٍ لَا شَرْقِيَّةٍ وَلَا غَرْبِيَّةٍ يَكَادُ زَيْتُهَا يُضِيءُ وَلَوْ لَمْ تَمْسَسْهُ نَارٌ نُورٌ عَلَى نُورٍ يَهْدِي اللَّهُ لِنُورِهِ مَنْ يَشَاءُ وَيَضْرِبُ اللَّهُ الْأَمْثَالَ لِلنَّاسِ وَاللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ […]

  •  सूरए नूर, आयतें 32-34, (कार्यक्रम 631)
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    सूरए नूर, आयतें 32-34, (कार्यक्रम 631)

    Rate this post सूरए नूर की आयत क्रमांक 32-34, وَأَنْكِحُوا الْأَيَامَى مِنْكُمْ وَالصَّالِحِينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَإِمَائِكُمْ إِنْ يَكُونُوا فُقَرَاءَ يُغْنِهِمُ اللَّهُ مِنْ فَضْلِهِ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ (32) और तुम में जो (युवा व युवतियां) अविवाहित हों और तुम्हारे दासों व दासियों में जो भले व योग्य हों, उनका विवाह कर दो (और दरिद्रता से न […]

  •  सूरए नूर, आयतें 30-31, (कार्यक्रम 630)
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    सूरए नूर, आयतें 30-31, (कार्यक्रम 630)

    Rate this post सूरए नूर की आयत क्रमांक 30-31 قُلْ لِلْمُؤْمِنِينَ يَغُضُّوا مِنْ أَبْصَارِهِمْ وَيَحْفَظُوا فُرُوجَهُمْ ذَلِكَ أَزْكَى لَهُمْ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا يَصْنَعُونَ (30) (हे पैग़म्बर!) ईमान वाले पुरुषों से कह दीजिए कि अपनी निगाहें (हराम चीज़ों से) ब चाकर रखें और अपनी पवित्रता की रक्षा करें। यही उनके लिए अधिक (अच्छी व) पवित्र बात […]

  •  सूरए नूर, आयतें 24-29, (कार्यक्रम 629)
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    सूरए नूर, आयतें 24-29, (कार्यक्रम 629)

    Rate this post नूर की आयत क्रमांक 24 और 25 يَوْمَ تَشْهَدُ عَلَيْهِمْ أَلْسِنَتُهُمْ وَأَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (24) يَوْمَئِذٍ يُوَفِّيهِمُ اللَّهُ دِينَهُمُ الْحَقَّ وَيَعْلَمُونَ أَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ الْمُبِينُ (25) जिस दिन कि उनकी ज़बानें, उनके हाथ और उनके पाँव उनके विरुद्ध उन (कर्मों) की गवाही देंगे, जो वे करते रहे थे। (24:24) […]

  •  सूरए नूर, आयतें 21-23, (कार्यक्रम 628)
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    सूरए नूर, आयतें 21-23, (कार्यक्रम 628)

    Rate this post आइये पहले सूरए नूर की आयत क्रमांक 21 की तिलावत सुनें। يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آَمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ وَمَنْ يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنْكَرِ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَنْ يَشَاءُ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ (21) हे ईमान वालो! शैतान के […]

  •  सूरए नूर, आयतें 15-20, (कार्यक्रम 627)
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    सूरए नूर, आयतें 15-20, (कार्यक्रम 627)

    Rate this post आइये पहले सूरए नूर की आयत क्रमांक 15 और 16 की तिलावत सुनें। إِذْ تَلَقَّوْنَهُ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُمْ مَا لَيْسَ لَكُمْ بِهِ عِلْمٌ وَتَحْسَبُونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِنْدَ اللَّهِ عَظِيمٌ (15) وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُمْ مَا يَكُونُ لَنَا أَنْ نَتَكَلَّمَ بِهَذَا سُبْحَانَكَ هَذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ (16) जब तुम उस (झूठ बात) को एक […]

  •  सूरए नूर, आयतें 6-14, (कार्यक्रम 626)
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    सूरए नूर, आयतें 6-14, (कार्यक्रम 626)

    Rate this post आइये पहले सूरए नूर की आयत क्रमांक छः से दस तक की तिलावत सुनें। وَالَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ شُهَدَاءُ إِلَّا أَنْفُسُهُمْ فَشَهَادَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ (6) وَالْخَامِسَةُ أَنَّ لَعْنَةَ اللَّهِ عَلَيْهِ إِنْ كَانَ مِنَ الْكَاذِبِينَ (7) وَيَدْرَأُ عَنْهَا الْعَذَابَ أَنْ تَشْهَدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ إِنَّهُ لَمِنَ […]

  •  सूरए नूर, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 625)
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    सूरए नूर, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 625)

    Rate this post आइये सूरए नूर की पहली आयत की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ سُورَةٌ أَنْزَلْنَاهَا وَفَرَضْنَاهَا وَأَنْزَلْنَا فِيهَا آَيَاتٍ بَيِّنَاتٍ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ (1) अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। यह एक सूरा है, जिसे हमने उतारा है और इस (के आदेशों के पालन) को अनिवार्य किया है, और […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 9
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    ईश्वरीय वाणी – 9

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  •  ईश्वरीय वाणी – 7 – 8
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    ईश्वरीय वाणी – 7 – 8

    Rate this post कुरआने मजीद के पांचवें सूरे का नाम माएदा है। माएदा का अर्थ दस्तरखान होता है और चूंकि इस सूरे में उस घटना का वर्णन है जिसमें हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वरीय भोजन और दस्तरखान के लिए प्रार्थना की थी इस लिए इस का नाम माएदा अर्थात दस्तरखान पड़ गया। वास्तव में यह […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 5-6
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    ईश्वरीय वाणी – 5-6

    Rate this post पवित्र क़ुरआन के एक सूरे का नाम निसा है जिसका अर्थ होता है महिलाएं। इस सूरे के इस नामंकन का एक कारण यह है कि इसमें महिलाओं के अधिकारों और उनसे संबंधित मामलों का उल्लेख किया गया है। यह मदीने का सूरा है और इसमें 176 आयत है। मदीना में नई सरकार […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 4
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    ईश्वरीय वाणी – 4

    Rate this post पवित्र क़ुरआन के सूरए आले इमरान में आया है कि अलिफ़ लाम मीम, अल्लाह जिसके अतिरिक्त कोई ईश्वर नहीं है और वह सदैव जीवित है और हर वस्तु उसी की कृपा से स्थापित है। उसने आप पर वह सत्य पुस्तक उतारी है जो समस्त पुस्तकों की पुष्टि करने वाली है और तौरैत […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 3
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    ईश्वरीय वाणी – 3

    Rate this post पवित्र क़ुरआन का सबसे बड़ा सूरा सूरए बक़रह है जिसमें 286 आयते हैं। इस सूरे के उतरने से नवस्थापित इस्लामी समाज से संबंधित ज़रूरी मामले स्पष्ट हुए और मुसलमानों को ज्ञात हुआ कि किस प्रकार वे आपस में और विदेशियों के साथ संबंध स्थापित करें। जैसा कि हमने यह कहा कि इस […]

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