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    सूरए हूद, आयतें 45-49, (कार्यक्रम 357)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 45 और 46 की तिलावत सुनते हैं।وَنَادَى نُوحٌ رَبَّهُ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ابْنِي مِنْ أَهْلِي وَإِنَّ وَعْدَكَ الْحَقُّ وَأَنْتَ أَحْكَمُ الْحَاكِمِينَ (45) قَالَ يَا نُوحُ إِنَّهُ لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ إِنَّهُ عَمَلٌ غَيْرُ صَالِحٍ فَلَا تَسْأَلْنِ مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ إِنِّي أَعِظُكَ أَنْ تَكُونَ مِنَ […]

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    सूरए हूद, आयतें 42-44, (कार्यक्रम 356)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 42 की तिलावत सुनते हैं।وَهِيَ تَجْرِي بِهِمْ فِي مَوْجٍ كَالْجِبَالِ وَنَادَى نُوحٌ ابْنَهُ وَكَانَ فِي مَعْزِلٍ يَا بُنَيَّ ارْكَبْ مَعَنَا وَلَا تَكُنْ مَعَ الْكَافِرِينَ (42)और वह जहाज़ उन्हें पर्वत जैसी लहरों के बीच लिए चला जा रहा था कि नूह ने अपने पुत्र को पुकारा […]

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    सूरए हूद, आयतें 38-41, (कार्यक्रम 355)

    Rate this post आइये पहले सूरए हूद की आयत संख्या 38 और 39 की तिलावत सुनते हैं।وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِنْ قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ قَالَ إِنْ تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنْكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ (38) فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَنْ يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُقِيمٌ (39)हज़रत नूह (ईश्वर के आदेश से) जहाज़ बनाने में […]

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    सूरए हूद, आयतें 33-37, (कार्यक्रम 354)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 33 और 34 की तिलावत सुनते हैं।قَالَ إِنَّمَا يَأْتِيكُمْ بِهِ اللَّهُ إِنْ شَاءَ وَمَا أَنْتُمْ بِمُعْجِزِينَ (33) وَلَا يَنْفَعُكُمْ نُصْحِي إِنْ أَرَدْتُ أَنْ أَنْصَحَ لَكُمْ إِنْ كَانَ اللَّهُ يُرِيدُ أَنْ يُغْوِيَكُمْ هُوَ رَبُّكُمْ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ (34)(और हज़रत नूह ने काफ़िरों से) कहा। निसंदेह यदि ईश्वर […]

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    सूरए हूद, आयतें 29-32, (कार्यक्रम 353)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 29 और 30 की तिलावत सुनते हैं।وَيَا قَوْمِ لَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مَالًا إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَى اللَّهِ وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الَّذِينَ آَمَنُوا إِنَّهُمْ مُلَاقُو رَبِّهِمْ وَلَكِنِّي أَرَاكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ (29) وَيَا قَوْمِ مَنْ يَنْصُرُنِي مِنَ اللَّهِ إِنْ طَرَدْتُهُمْ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ (30)(हज़रत नूह ने कहा) हे […]

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    सूरए हूद, आयतें 25-28, (कार्यक्रम 352)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 25 और 26 की तिलावत सुनते हैं।وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَى قَوْمِهِ إِنِّي لَكُمْ نَذِيرٌ مُبِينٌ (25) أَنْ لَا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ أَلِيمٍ (26)निसंदेह हमने नूह को उनकी जाति की ओर भेजा (और उन्होंने उन लोगों से कहा कि) मैं तुम्हें […]

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    सूरए हूद, आयतें 20-24, (कार्यक्रम 351)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या बीस की तिलावत सुनते हैं।أُولَئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُمْ مِنْ دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُ مَا كَانُوا يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ (20)वे लोग धरती में ईश्वर को कदापि असहाय नहीं बना सकते और ईश्वर के अतिरिक्त उनका कोई […]

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    सूरए हूद, आयतें 17-19, (कार्यक्रम 350)

    Rate this post आइये पहले सूरए हूद की आयत संख्या 17 की तिलावत सुनते हैं।أَفَمَنْ كَانَ عَلَى بَيِّنَةٍ مِنْ رَبِّهِ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌ مِنْهُ وَمِنْ قَبْلِهِ كِتَابُ مُوسَى إِمَامًا وَرَحْمَةً أُولَئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِ وَمَنْ يَكْفُرْ بِهِ مِنَ الْأَحْزَابِ فَالنَّارُ مَوْعِدُهُ فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِنْهُ إِنَّهُ الْحَقُّ مِنْ رَبِّكَ وَلَكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ (17)क्या (पैग़म्बरे […]

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    सूरए हूद, आयतें 13-16, (कार्यक्रम 349)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 13 और 14 की तिलावत सुनते हैं।أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ قُلْ فَأْتُوا بِعَشْرِ سُوَرٍ مِثْلِهِ مُفْتَرَيَاتٍ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُمْ مِنْ دُونِ اللَّهِ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ (13) فَإِنْ لَمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا أُنْزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ وَأَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ فَهَلْ أَنْتُمْ مُسْلِمُونَ (14)क्या (काफ़िर) यह […]

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    सूरए हूद, आयतें 9-12, (कार्यक्रम 348)

    Rate this post आइये अब सूरए हूद की आयत संख्या 9 और 10 की तिलावत सुनते हैं।وَلَئِنْ أَذَقْنَا الْإِنْسَانَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَاهَا مِنْهُ إِنَّهُ لَيَئُوسٌ كَفُورٌ (9) وَلَئِنْ أَذَقْنَاهُ نَعْمَاءَ بَعْدَ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنِّي إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌ (10)और यदि हम मनुष्य को अपनी ओर से दया का स्वाद चखाते हैं और […]

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    सूरए हूद, आयतें 6-8, (कार्यक्रम 347)

    Rate this post आइये सूरए हूद की आयत संख्या छह की तिलावत सुनते हैं।وَمَا مِنْ دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ إِلَّا عَلَى اللَّهِ رِزْقُهَا وَيَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَمُسْتَوْدَعَهَا كُلٌّ فِي كِتَابٍ مُبِينٍ (6)और धरती में चलने फिरने वाला ऐसा कोई (प्राणी) नहीं है जिसकी आजीविका का दायित्व ईश्वर पर न हो और वह उसके अस्थाई और स्थाई ठिकाने […]

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    सूरए हूद, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 346)

    Rate this post पिछले कार्यक्रम में सूरए यूनुस की व्याख्या समाप्त हुई, इस कार्यक्रम में सूरए हूद की व्याख्या आरंभ करेंगे। यह सूरा मक्के में पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैह व आलेही व सल्लम के निवास के अंतिम वर्षों में उतरा है। इसमें पिछले पैग़म्बरों विशेषकर हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के इतिहास का वर्णन किया गया है […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 107-109, (कार्यक्रम 345)

    Rate this post आइये अब सूरए यूनुस की आयत संख्या 107 की तिलावत सुनते हैं।وَإِنْ يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ وَإِنْ يُرِدْكَ بِخَيْرٍ فَلَا رَادَّ لِفَضْلِهِ يُصِيبُ بِهِ مَنْ يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ (107)और यदि ईश्वर (परीक्षा लेने या पाप पर दंडित करने के लिए) तुम्हें कोई हानि पहुंचाए तो […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 101-106, (कार्यक्रम 344)

    Rate this post आइये अब सूरए यूनुस की आयत संख्या 101 की तिलावत सुनते हैं।قُلِ انْظُرُوا مَاذَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا تُغْنِي الْآَيَاتُ وَالنُّذُرُ عَنْ قَوْمٍ لَا يُؤْمِنُونَ (101)(हे पैग़म्बर उनसे) कह दीजिए कि जो कुछ आकाशों और धरती में है उसे (ध्यान से) देखो किन्तु यह निशानियां और डरावा ईमान न लाने वाली जाति […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 98-100, (कार्यक्रम 343)

    Rate this post आइये पहले सूरए यूनुस की आयत संख्या 98 की तिलावत सुनते हैं।فَلَوْلَا كَانَتْ قَرْيَةٌ آَمَنَتْ فَنَفَعَهَا إِيمَانُهَا إِلَّا قَوْمَ يُونُسَ لَمَّا آَمَنُوا كَشَفْنَا عَنْهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَى حِينٍ (98)तो ऐसी कोई बस्ती क्यों नहीं है जो (सही समय पर) ईमान लाती कि उसका ईमान उसे लाभ पहुंचाता सिवाय […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 93-97, (कार्यक्रम 342)

    Rate this post आइये अब सूरए यूनुस की आयत संख्या 93 की तिलावत सुनते हैं।وَلَقَدْ بَوَّأْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مُبَوَّأَ صِدْقٍ وَرَزَقْنَاهُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِ فَمَا اخْتَلَفُوا حَتَّى جَاءَهُمُ الْعِلْمُ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ (93)निश्चित रूप से हमने बनी इस्राईल को उचित ठिकाना प्रदान किया और पवित्र वस्तुओं में से उन […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 87-92, (कार्यक्रम 341)

    Rate this post आइये पहले सूरए यूनुस की आयत संख्या 87 की तिलावत सुनते हैं।وَأَوْحَيْنَا إِلَى مُوسَى وَأَخِيهِ أَنْ تَبَوَّآَ لِقَوْمِكُمَا بِمِصْرَ بُيُوتًا وَاجْعَلُوا بُيُوتَكُمْ قِبْلَةً وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ (87)और हमने मूसा और उनके भाई (हारून) के पास अपना विशेष संदेश भेजा कि मिस्र में अपनी जाति के लिए घर तैयार करो और अपने […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 79-86, (कार्यक्रम 340)

    Rate this post आइये अब सूरए यूनुस की आयत संख्या 79 और 80 की तिलावत सुनते हैं।وَقَالَ فِرْعَوْنُ ائْتُونِي بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ (79) فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالَ لَهُمْ مُوسَى أَلْقُوا مَا أَنْتُمْ مُلْقُونَ (80)और फ़िरऔन ने कहा कि हर दक्ष जादूगर को मेरे पास लाओ (10:79) तो जब जादूगर आए तो मूसा ने उनसे कहा […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 74-78, (कार्यक्रम 339)

    Rate this post आइये अब सूरए यूनुस की आयत संख्या 74 और 75 की तिलावत सुनते हैं।ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِهِ رُسُلًا إِلَى قَوْمِهِمْ فَجَاءُوهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا بِمَا كَذَّبُوا بِهِ مِنْ قَبْلُ كَذَلِكَ نَطْبَعُ عَلَى قُلُوبِ الْمُعْتَدِينَ (74) ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ مُوسَى وَهَارُونَ إِلَى فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ بِآَيَاتِنَا فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُجْرِمِينَ (75)फिर हमने […]

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    सूरए यूनुस, आयतें 68-73, (कार्यक्रम 338)

    Rate this post आइये अब सूरए यूनुस की आयत संख्या 68,69 और 70 की तिलावत सुनते हैं।قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا سُبْحَانَهُ هُوَ الْغَنِيُّ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ إِنْ عِنْدَكُمْ مِنْ سُلْطَانٍ بِهَذَا أَتَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ (68) قُلْ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ (69) مَتَاعٌ فِي الدُّنْيَا […]

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