islamic-sources

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 156-161 (कार्यक्रम 157)

    Rate this post आइये पहले सूरए निसा की आयत नंबर 156, 157 और 158 की तिलावत सुनें।وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلَى مَرْيَمَ بُهْتَانًا عَظِيمًا (156) وَقَوْلِهِمْ إِنَّا قَتَلْنَا الْمَسِيحَ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ اللَّهِ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَكِنْ شُبِّهَ لَهُمْ وَإِنَّ الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِيهِ لَفِي شَكٍّ مِنْهُ مَا لَهُمْ بِهِ مِنْ عِلْمٍ إِلَّا اتِّبَاعَ الظَّنِّ وَمَا […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 153-155 (कार्यक्रम 156)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 153 की तिलावत सुनते हैं।يَسْأَلُكَ أَهْلُ الْكِتَابِ أَنْ تُنَزِّلَ عَلَيْهِمْ كِتَابًا مِنَ السَّمَاءِ فَقَدْ سَأَلُوا مُوسَى أَكْبَرَ مِنْ ذَلِكَ فَقَالُوا أَرِنَا اللَّهَ جَهْرَةً فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ بِظُلْمِهِمْ ثُمَّ اتَّخَذُوا الْعِجْلَ مِنْ بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَاتُ فَعَفَوْنَا عَنْ ذَلِكَ وَآَتَيْنَا مُوسَى سُلْطَانًا مُبِينًا (153)(हे पैग़म्बर!) आसमानी किताब […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 147-152 (कार्यक्रम 155)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 147 की तिलावत सुनते हैं।مَا يَفْعَلُ اللَّهُ بِعَذَابِكُمْ إِنْ شَكَرْتُمْ وَآَمَنْتُمْ وَكَانَ اللَّهُ شَاكِرًا عَلِيمًا (147)ईश्वर को तुम्हें दण्डित करने की क्या आवश्यकता है, यदि तुम कृतज्ञ रहो और ईमान लाओ तो ईश्वर सदैव कृतज्ञ और जानकार है। (4:147) पिछले कार्यक्रम में हमने जो आयतें […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 142-146 (कार्यक्रम 154)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 142 की तिलावत सुनते हैं।إِنَّ الْمُنَافِقِينَ يُخَادِعُونَ اللَّهَ وَهُوَ خَادِعُهُمْ وَإِذَا قَامُوا إِلَى الصَّلَاةِ قَامُوا كُسَالَى يُرَاءُونَ النَّاسَ وَلَا يَذْكُرُونَ اللَّهَ إِلَّا قَلِيلًا (142)निसन्देह, मिथ्याचारी, ईश्वर को धोखा देना चाहते हैं और ईश्वर उन्हें धोखे में रखने वाला है, वे जब नमाज़ के लिए उठते […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 137-141 (कार्यक्रम 153)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 137 की तिलावत सुनते हैं।إِنَّ الَّذِينَ آَمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا ثُمَّ آَمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ سَبِيلًا (137)निसंदेह जो लोग ईमान लाए फिर काफ़िर हो गए, फिर दोबारा ईमान लाए (परन्तु) पुनः काफ़िर हो गए और अपने कुफ़्र […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 133-136 (कार्यक्रम 152)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 133 की तिलावत सुनते हैं।إِنْ يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ أَيُّهَا النَّاسُ وَيَأْتِ بِآَخَرِينَ وَكَانَ اللَّهُ عَلَى ذَلِكَ قَدِيرًا (133)हे लोगो! यदि ईश्वर तुम्हारा अंत करके तुम्हारे स्थान पर दूसरे को लाना चाहे तो जान लो कि वह इसमें सक्षम है। (4:133) यह आयत कहती है कि तुम […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 129-132 (कार्यक्रम 151)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 129 की तिलावत सुनते हैं।وَلَنْ تَسْتَطِيعُوا أَنْ تَعْدِلُوا بَيْنَ النِّسَاءِ وَلَوْ حَرَصْتُمْ فَلَا تَمِيلُوا كُلَّ الْمَيْلِ فَتَذَرُوهَا كَالْمُعَلَّقَةِ وَإِنْ تُصْلِحُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَحِيمًا (129)और तुम कितना ही चाहो, अपनी पत्नियों के बीच पूर्ण न्याय नहीं कर सकते तो केवल एक ही की […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 125-128 (कार्यक्रम 150)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 125 और 126 की तिलावत सुनते हैं।وَمَنْ أَحْسَنُ دِينًا مِمَّنْ أَسْلَمَ وَجْهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ وَاتَّبَعَ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا وَاتَّخَذَ اللَّهُ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلًا (125) وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُحِيطًا (126)और किसका धर्म उससे बेहतर है जिसने स्वयं को […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 120-124 (कार्यक्रम 149)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 120 और 121 की तिलावत सुनते हैं।يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا (120) أُولَئِكَ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَحِيصًا (121)शैतान सदैव उनसे वादे करता है और उन्हें कामनाओं में उलझाता है (परन्तु जान लो कि) शैतान धोखे के अतिरिक्त उनसे कोई वादा नहीं […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 115-119 (कार्यक्रम 148)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 115 की तिलावत सुनते हैं।وَمَنْ يُشَاقِقِ الرَّسُولَ مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُ الْهُدَى وَيَتَّبِعْ غَيْرَ سَبِيلِ الْمُؤْمِنِينَ نُوَلِّهِ مَا تَوَلَّى وَنُصْلِهِ جَهَنَّمَ وَسَاءَتْ مَصِيرًا (115)और जो कोई स्वयं के लिए मार्गदर्शन का रास्ता स्पष्ट होने के पश्चात, पैग़म्बर का विरोध करे और ईमान वालों के […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 110-114 (कार्यक्रम 147)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 110 की तिलावत सुनते हैं।وَمَنْ يَعْمَلْ سُوءًا أَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهُ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اللَّهَ يَجِدِ اللَّهَ غَفُورًا رَحِيمًا (110)और जो कोई बुरा कर्म करे या अपने आप पर अत्याचार करे और फिर ईश्वर से क्षमा चाहे तो वह ईश्वर को अत्यन्त क्षमाशील और दयावान पाएगा। (4:110) […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 104-109 (कार्यक्रम 146)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 104 की तिलावत सुनते हैं।وَلَا تَهِنُوا فِي ابْتِغَاءِ الْقَوْمِ إِنْ تَكُونُوا تَأْلَمُونَ فَإِنَّهُمْ يَأْلَمُونَ كَمَا تَأْلَمُونَ وَتَرْجُونَ مِنَ اللَّهِ مَا لَا يَرْجُونَ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا (104)(हे ईमान वालो! रणक्षेत्र में) शत्रु का पीछा करने में ढिलाई न करो कि यदि तुम्हें तकलीफ़ और पीड़ा […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 89-91 (कार्यक्रम 142)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 89 की तिलावत सुनते हैं।وَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ كَمَا كَفَرُوا فَتَكُونُونَ سَوَاءً فَلَا تَتَّخِذُوا مِنْهُمْ أَوْلِيَاءَ حَتَّى يُهَاجِرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَإِنْ تَوَلَّوْا فَخُذُوهُمْ وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ وَجَدْتُمُوهُمْ وَلَا تَتَّخِذُوا مِنْهُمْ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا (89)(हे ईमान वालो!) यह मिथ्याचारी चाहते हैं कि तुम भी उन्हीं की भांति […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 100-103 (कार्यक्रम 145)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 100 की तिलावत सुनते हैं।وَمَنْ يُهَاجِرْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ يَجِدْ فِي الْأَرْضِ مُرَاغَمًا كَثِيرًا وَسَعَةً وَمَنْ يَخْرُجْ مِنْ بَيْتِهِ مُهَاجِرًا إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ ثُمَّ يُدْرِكْهُ الْمَوْتُ فَقَدْ وَقَعَ أَجْرُهُ عَلَى اللَّهِ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَحِيمًا (100)और जो कोई अपने धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 95-99 (कार्यक्रम 144)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 95 और 96 की तिलावत सुनते हैं।لَا يَسْتَوِي الْقَاعِدُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ غَيْرُ أُولِي الضَّرَرِ وَالْمُجَاهِدُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنْفُسِهِمْ فَضَّلَ اللَّهُ الْمُجَاهِدِينَ بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنْفُسِهِمْ عَلَى الْقَاعِدِينَ دَرَجَةً وَكُلًّا وَعَدَ اللَّهُ الْحُسْنَى وَفَضَّلَ اللَّهُ الْمُجَاهِدِينَ عَلَى الْقَاعِدِينَ أَجْرًا عَظِيمًا (95) دَرَجَاتٍ مِنْهُ وَمَغْفِرَةً وَرَحْمَةً وَكَانَ […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 92-94 (कार्यक्रम 143)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 92 की तिलावत सुनते हैं।وَمَا كَانَ لِمُؤْمِنٍ أَنْ يَقْتُلَ مُؤْمِنًا إِلَّا خَطَأً وَمَنْ قَتَلَ مُؤْمِنًا خَطَأً فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مُؤْمِنَةٍ وَدِيَةٌ مُسَلَّمَةٌ إِلَى أَهْلِهِ إِلَّا أَنْ يَصَّدَّقُوا فَإِنْ كَانَ مِنْ قَوْمٍ عَدُوٍّ لَكُمْ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مُؤْمِنَةٍ وَإِنْ كَانَ مِنْ قَوْمٍ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ مِيثَاقٌ فَدِيَةٌ […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 86-88 (कार्यक्रम 141)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत संख्या 86 की तिलावत सुनते हैं।وَإِذَا حُيِّيتُمْ بِتَحِيَّةٍ فَحَيُّوا بِأَحْسَنَ مِنْهَا أَوْ رُدُّوهَا إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ حَسِيبًا (86)और जब कभी तुम्हें सलामती की दुआ दी जाए तो तुम भी जवाब में उससे बेहतर या कम से कम उस जैसी ही दुआ दो। निसन्देह, […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 83-85 (कार्यक्रम 140)

    Rate this post आइए पहले सूरए निसा की आयत नंबर 83 की तिलावत सुनें।) وَإِذَا جَاءَهُمْ أَمْرٌ مِنَ الْأَمْنِ أَوِ الْخَوْفِ أَذَاعُوا بِهِ وَلَوْ رَدُّوهُ إِلَى الرَّسُولِ وَإِلَى أُولِي الْأَمْرِ مِنْهُمْ لَعَلِمَهُ الَّذِينَ يَسْتَنْبِطُونَهُ مِنْهُمْ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ لَاتَّبَعْتُمُ الشَّيْطَانَ إِلَّا قَلِيلًا (83)और (मिथ्याचारियों की पद्धति यह है कि) जब भी उन्हें शांति […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 80-82 (कार्यक्रम 139)

    Rate this post आइये पहले सूरए निसा की आयत नम्बर 80 की तिलावत सुनें।مَنْ يُطِعِ الرَّسُولَ فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ وَمَنْ تَوَلَّى فَمَا أَرْسَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا (80)जिसने भी पैग़म्बर का आज्ञापालन किया तो निसंदेह उसने ईश्वर का आज्ञापालन किया और जिसने अवज्ञा की तो हे पैग़म्बर! जान लीजिए कि हमने आपको उन लोगों का रखवाला बनाकर […]

  • Rate this post

    सूरए निसा; आयतें 77-79 (कार्यक्रम 138)

    Rate this post आइये पहले सूरए निसा की 77वीं आयत की तिलावत सुनें।أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ قِيلَ لَهُمْ كُفُّوا أَيْدِيَكُمْ وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآَتُوا الزَّكَاةَ فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ الْقِتَالُ إِذَا فَرِيقٌ مِنْهُمْ يَخْشَوْنَ النَّاسَ كَخَشْيَةِ اللَّهِ أَوْ أَشَدَّ خَشْيَةً وَقَالُوا رَبَّنَا لِمَ كَتَبْتَ عَلَيْنَا الْقِتَالَ لَوْلَا أَخَّرْتَنَا إِلَى أَجَلٍ قَرِيبٍ قُلْ مَتَاعُ الدُّنْيَا قَلِيلٌ وَالْآَخِرَةُ خَيْرٌ […]

  • पेज30 से 37« आखिरी...1020...2829303132...पहला »