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  •  ईश्वरीय वाणी- 31
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    ईश्वरीय वाणी- 31

    Rate this post पवित्र क़ुरआन ईश्वर की अमानत और महान ईश्वरीय दूत हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सलल्ललाहो अलैह व आलेही व सल्लम का अमर चमत्कार है जिसके बारे में उनका कथन है कि इसके साथ रहने से तुम पथभ्रष्टता से मुक्ति पा जाओगे। पूरे विश्वास के साथ यह कहा जा सकता है कि पवित्र क़ुरआन के […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 30
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    ईश्वरीय वाणी – 30

    Rate this post क़ुराने मजीद के 15वें सूरे ‘हिज्र’ है। इस सूरे में 99 आयतें हैं। यह हिजरत से पूर्व मक्के में नाज़िल हुआ था। इस सूरे का नाम आयत क्रमाक 80 में असहाबे हिज्र अर्थात हज़रत सालेह की क़ौम के नाम पर पड़ा है। इस सूरे में पैग़म्बरे इस्लाम (स) के ख़िलाफ़ काफ़िरों के […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 29
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    ईश्वरीय वाणी – 29

    Rate this post सूरेए इब्राहीम की २१वीं आयत में महान ईश्वर कहता है प्रलय में सभी ईश्वर के समक्ष लाए जाएंगे तो कमज़ोर लोग बलवानों से कहेंगे, हम संसार में तुम्हारे अधीन थे, तो क्या आज तुम ईश्वरीय दण्ड के कुछ भाग को हमसे रोक सकते हो? वे कहेंगे, यदि ईश्वर हमारा मार्गदर्शन करता तो […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 28
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    ईश्वरीय वाणी – 28

    Rate this post पवित्र क़ुरआन के चौदहवें सूरे का नाम इब्राहीम है जिसमें 52 आयतें हैं। इस सूरे की 28वीं और 29वीं आयतें को छोड़कर इसकी सभी आयतें मक्के में उतरी हैं। इसका कारण यह है कि इस सूरे में हज़रत इब्राहीम और उनकी दुआओं और लोगों के मार्गदर्शन की दिशा में इस महान ईश्वरीय […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 27
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    ईश्वरीय वाणी – 27

    Rate this post कार्यक्रम में पवित्र क़ुरआन के सूरे राद में बिजली और उसकी कड़क, सत्य और असत्य की विशेषताएं, बुद्धिजीवियों के ख़ूबियां और ईश्वर की याद से मन को मिलने वाली शांति की समीक्षा की गयी है। आशा है यह प्रयास भी आपको पसंद आएगा। चूंकि इस आयत में बिजली की कड़क को ईश्वर […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 26
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    ईश्वरीय वाणी – 26

    Rate this post पवित्र क़ुरआन के जो सूरे मक्के में नाज़िल हुए उन्हें मक्की कहा जाता है और जो सूरे मदीने में उतरे उन्हें मदनी कहा जाता है। जो सूरे मक्के में नाज़िल हुए है उनमें आम तौर पर एकेश्वरवाद, अनेकेश्वरवाद से संघर्ष और प्रलय के बारे में बात की गयी है क्योंकि ये सूरे […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 25
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    ईश्वरीय वाणी – 25

    Rate this post इससे पहले वाली कड़ी में हम ने उल्लेख किया था कि हज़रत यूसुफ़ (अ) को निर्दोष होने के बावजूद जेल में डाल दिया गया। दो और युवाओं को भी उसी समय हज़रत यूसुफ़ के साथ जेल में डाला गया। एक दिन उन दोनों ने एक सपना देखा और हज़रत यूसुफ़ के सामने […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 24
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    ईश्वरीय वाणी – 24

    Rate this post हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के भाई उन्हें कुएं में डालने के बाद रोते हुए अपने पिता के पास आए। उन्होंने पिता के समक्ष यह सिद्ध करने के लिए यूसुफ़ को भेड़िया खा गया है, उनके शरीर से कुर्ता उतार लिया था और उस पर किसी पशु का ख़ून लगा कर उसे पिता के […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 23
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    ईश्वरीय वाणी – 23

    Rate this post और निसंदेह हमारे फ़रिश्ते शुभ सूचना लेकर इब्राहीम के पास आए और उन्होंने कहा कि तुम पर सलाम हो, इब्राहीम ने भी कहा कि तुम पर भी सलाम हो तो थोड़ा समय भी न बीता था कि वे (अतिथियों के लिए) एक भुना हुआ बछड़ा ले आए। जैसा कि हमने बताया था […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 22
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    ईश्वरीय वाणी – 22

    Rate this post वह वही है कि जिसने आसमानों और ज़मीन को छः दिन में बनाया और उसका अर्श (प्रभुत्व) पानी पर था, ताकि तुम्हें परखे कि तुम में से कौन सबसे अधिक भलाई करने वाला है। (हे पैग़म्बर) अगर तुम उनसे कहोगे कि मरने के बाद पुनः जीवित किए जाओगे, तो काफ़िर कहेंगे कि […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 20
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    ईश्वरीय वाणी – 20

    Rate this post वही ईश्वर है जो तुम्हें थल व समुद्र की सैर कराता है, यहां तक कि जब तुम नौका में थे और ठंडी एवं सुखद हवाएं उसे लिए जा रही थीं और सारे (यात्री) प्रसन्न थे तो (साहसा ही) एक तेज़ हवा चली और लहरों ने चारों ओर से उन्हें अपने घेरे में […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 19
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    ईश्वरीय वाणी – 19

    Rate this post सूरए यूनुस, क़ुराने करीम का दसवां सूरा है जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पैग़म्बर बनने के शुरूआती दिनों में नाज़िल अर्थात अवतरित हुआ था। इस सूरे में 109 आयते हैं। यूनुस एक ईश्वरीय दूत का नाम है। क़ुरान में यह नाम चार बार आया है। इस सूरे की 98वीं आयत में यूनुस […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 18
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    ईश्वरीय वाणी – 18

    Rate this post ताएफ़ नगर के निकट एक क्षेत्र है जहां हुनैन नाम का युद्ध हुआ। ताएफ़वासी विशेषकर दो कबीलों एक “हवाज़न” और दूसरे “सक़ीफ़” के नाम से प्रसिद्ध थे। इस्लामी सेना ने जब पवित्र नगर मक्का पर विजय प्राप्त कर ली और इस्लाम तेज़ी से फैलने लगा तो वे भयभीत हो गये और उन्होंने […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 17
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    ईश्वरीय वाणी – 17

    Rate this post पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकारों के अनुसार सूरए तौबा का आरंभ बिस्मिल्लाह से न होकर वचन तोड़ने वाले शत्रुओं से विरक्तता से होना, इस गुट के प्रति ईश्वर के प्रकोप और क्रोध को दर्शाता है। क्योंकि इस सूरे का आरंभ, अनेकेश्वरवादियों से विरक्तता की घोषणा से हो रहा है, और यही कारण है […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 16
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    ईश्वरीय वाणी – 16

    Rate this post अनफाल सूरा पवित्र कुरआन का आठवां सूरा है जो पवित्र नगर मदीना में दूसरे हिजरी वर्ष में उतरा और इसमें ७५ आयतें हैं। चूंकि इस सूरे के आरंभ में जन सम्पत्ति और उसके खर्च का तरीक़ा बयान किया गया है इसलिए इसका नाम अनफाल रखा गया है। इस सूरे का दूसरा नाम […]

  •  ईश्वरीय वाणी -15
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    ईश्वरीय वाणी -15

    Rate this post इब्ने अब्बास के अनुसार, पैग़म्बरे इस्लाम (स) ने बद्र युद्ध में मुसलमान लड़ाकों के प्रोत्साहन के लिए इनामों की घोषणा की। इस घोषणा के कारण युवा सैनिकों ने गौरवपूर्ण वीरता के साथ युद्ध किया, लेकिन बूढ़े लोग झंडों के नीचे खड़े रहे। जब युद्ध समाप्त हो गया तो युवा अपना इनाम लेने […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 14
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    ईश्वरीय वाणी – 14

    Rate this post सूरए आराफ़ की आयत संख्या 31 और 32 में ईश्वर कहता है। हे आदम की संतानो! हर मस्जिद के निकट (उपासना के समय) अपनी शोभा को धारण कर लो और खाओ पियो परंतु अपव्यय न करो कि ईश्वर अपव्यय करने वालों को पसंद नहीं करता। (हे पैग़म्बर! ईमान वालों से) कह दीजिए […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 13
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    ईश्वरीय वाणी – 13

    Rate this post सूरए आराफ़ पवित्र क़ुरआन का सातंवा सूरा है। यह सूरा मक्का में उतरा। यह सूरा जिस समय उतरा उस समय तक पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने मदीना पलायन नहीं किया था। इस सूरे में 206 आयते हैं। सूरे आराफ़ की आरंभिक आयतों में कुछ आस्था संबंधी विषयों […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 12
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    ईश्वरीय वाणी – 12

    Rate this post पवित्र क़रआन के सूरए अनआम की 32वीं आयत में आया हैः संसार का जीवन खेल तमाशे के अतिरिक्त कुछ नहीं और परलोक, ईश्वर से डरने वालों के लिए सबसे अच्छा ठिकाना है। क्या तुम चिंतन नहीं करते? पवित्र क़ुरआन की इस आयत में लोक परलोक के जीवन की तुलना की गयी है […]

  •  ईश्वरीय वाणी – 11
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    ईश्वरीय वाणी – 11

    Rate this post सारी प्रशंसा ईश्वर के लिए है जिसने आकाशों और धरती की रचना की और उनमें अंधकार तथा प्रकाश बनाया परंतु काफ़िर, लोगों व वस्तुओं को अपने पालनहार का समकक्ष ठहराते हैं। पवित्र क़ुरआन के सूरए अनआम में 165 आयतें हैं और मक्के में उतरने वाली सूरों में है। यह सूरे सामान्य रूप […]

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