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  • क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी हैं -2
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    क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी हैं -2

    क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी हैं -2Rate this post हम मुस्लमान अक्सर बहाने बनाते है की हमारे पास कुरआन मजीद का तर्जुमा पढने का टाइम नहीहै। हम अपने रोज़-मर्रा के कामों मे मसरुफ़ है, अपनी पढाई मे, अपने कारोबार मे, वगैरह वगैरह।हम सब ये जानते है की जो भी वक्त हम स्कुल-कालेज मे लगाते है और कई किताबें हिफ़्ज़ (कंठित)कर लेते है, क्या हमारे पास कुरआन मजीद पढने का टाइम नही हैं? अगर आप कुरआन मजीद कातर्जुमा पढेंगे, चन्द दिनॊं मे पढ सकते है। लेकिन मौहम्मद रसुल अल्लाह सल्लललाहो अलैहेवाआलेही [...]

  • क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी है – 1
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    क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी है – 1

    क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी है – 1Rate this post कुरआन मजीद अल्लाह तआला की आखिरी वही (पैगाम) अपने आखिरी पैगम्बर मुहम्मद रसुलअल्लाह सल्लल लाहोअलैहे वा [...]

  • इमाम महदी (अ) क़ुरआन और दीगर आसमानी किताबों में
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    इमाम महदी (अ) क़ुरआन और दीगर आसमानी किताबों में

    इमाम महदी (अ) क़ुरआन और दीगर आसमानी किताबों मेंRate this post इमाम महदी (अ) क़ुरआन और दीगर आसमानी किताबों में हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का नामे नामी तमाम आसमानी किताबों तौरैत, ज़बूर, इन्जील में मौजूद है। क़ुरआने करीम की कई आयात में आपके बारे में तफ़्सीर व तावील की गई है। पैगम्बरे इस्लाम (स.) की […]

  • क्या क़ुरआन दस्तूर है?
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    क्या क़ुरआन दस्तूर है?

    क्या क़ुरआन दस्तूर है?Rate this post वाज़ेह रहना चाहिये के जिस तरह क़ुरआन आम किताबों की तरह की किताब नही है। इसी तरह आम दसातीर की तरह का दस्तूर भी नही है। दस्तूर का मौजूदा तसव्वुर क़ुरआन मजीद पर किसी तरह सादिक़ नही आता और ना उसे इन्सानी इसलाह के ऐतेबार से दस्तूर कह सकते […]

  • कुरआन में वादा और अमानत
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    कुरआन में वादा और अमानत

    कुरआन में वादा और अमानतRate this post 1. हे आस्तिको ! प्रतिज्ञाओं को पूरा करो। -कुरआन [5, 1] 2. …और अपनी प्रतिज्ञाओं का पालन करो, निःसंदेह प्रतिज्ञा के विषय में जवाब तलब किया जाएगा। -कुरआन [17, 34] 3. …और अल्लाह से जो प्रतिज्ञा करो उसे पूरा करो। -कुरआन [6,153] 4. और तुम अल्लाह के वचन […]

  • आसमानी किताबों के नज़ूल का फलसफा
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    आसमानी किताबों के नज़ूल का फलसफा

    आसमानी किताबों के नज़ूल का फलसफाRate this post हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह ने आलमे इंसानियत की हिदायत के लिए बहुत सी आसमानी किताबें भेजी जैसे सुहुफ़े इब्राहीम, सुहुफ़े नूह, तौरात, इँजील और इन में सबसे जामे क़ुरआने करीम है। अगर यह किताबे नाज़िल न होती तो इंसान अल्लाह की मारफ़त और इबादत में बहुत […]

  • क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का सब से बड़ा मोजज़ा है
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    क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का सब से बड़ा मोजज़ा है

    क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का सब से बड़ा मोजज़ा हैRate this post हमारा अक़ादह है कि क़ुरआने करीम पैग़म्बरे इस्लाम (स.)का सब से बड़ा मोजज़ा है और यह फ़क़त फ़साहत व बलाग़त, शीरीन बयान और मअनी के रसा होने के एतबार से ही नही बल्कि और मुख़्तलिफ़ जहतों से भी मोजज़ा है। और इन तमाम […]

  • मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 9
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    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 9

    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 9Rate this post क़ुरआने मजीद जो इन फ़ैसला कुन और पुख़्ता अंदाज़ से ख़ुदा का कलाम होने का ऐलान और उसका सबूत फ़राहम करता है। अव्वल से लेकर आख़िर तक साफ़ तौर पर हज़रत मुहम्मद (स) का अपने रसूल और पैग़म्बर के तौर पर तआरुफ़ कराता […]

  • मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 8
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    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 8

    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 8Rate this post और फिर फ़रमाता है:ऐ रसूल कह दो कि अगर (सारे जहान के) आदमी और जिन इस बात पर इकठ्ठे और मुत्तफ़िक़ हों कि क़ुरआन की मिस्ल ले आयें तो (नामुम्किन) उसके बराबर नही ला सकते अगरचे (उस कोशिश में) वह एक दूसरे की […]

  • मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 7
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    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 7

    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 7Rate this post और ख़ुसूसन अमल पर ऐतेक़ाद के सिलसिले में अल्लाह तआला यूँ फ़रमाता है: उसके बाद आख़िर कार जो लोग बुरे काम करते थे उनका काम यहाँ तक आ पहुचा कि ख़ुदा की आयतों को झुटलाते थे और उनके साथ मसख़रा पन करते थे। […]

  • मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 6
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    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 6

    मुसलमानो के दरमियान क़ुरआन की क्या अहमियत है? : 6Rate this post क़ुरआने मजीद ने अपने प्रोग्राम की बुनियाद ख़ुदा शिनासी पर रखी है और इसी तरह मा सिवलल्लाह से बेगानगी को शिनाख़्ते दीन की अव्वलीन बुनियाद क़रार दिया है। इस तरह ख़ुदा को पहचनवाने के बाद मआद शिनासी (रोज़े क़यामत पर ऐतेक़ाद जिस दिन […]

  • मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 5
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    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 5

    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 5Rate this post जैसे कि क़ुरआने करीम के सूरए अलक़ की आयत न. 1-5 में वर्णन हुआ है कि “इक़रा बिस्मि रब्बिका अल्लज़ी ख़लक़ * ख़लाक़ल इंसाना मिन अलक़ *इक़रा व रब्बुकल अकरम * अल्लज़ी अल्लमा बिल क़लम * अल्लमल इंसाना मा लम याअलम।” अनुवाद– उस अल्लाह का […]

  •  मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 4
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    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 4

    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 4Rate this post क़ुरआन एक आसमानी किताब है और इसमें वह सब चीज़े मौजूद हैं जिनका इस्लाम वर्णन करता है। इस किताब में उन चीज़ों का भी वर्णन है जो इस समय मौजूद हैं और उन चीज़ों का भी वर्णन है जो भविषय में पैदा होंगी। परन्तु मानव […]

  • मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 3
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    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 3

    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 3Rate this post इस्लाम की शिक्षाऐं इस्लाम की शिक्षाओं को इन तीन भागो में विभाजित किया जा सकता हैक- एतिक़ादाती (आस्था से सम्बंधित) ख- अखलाक़ियाती (सदाचार से सम्बंधित) ग- फ़िक़्ही (धर्म निर्देशों से सम्बंधित) इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम कहते हैं कि नबी ने कहा है कि ज्ञान केवल तीन […]

  • मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 2
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    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 2

    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 2Rate this post इसी प्रकार इस्लामें मुहम्मदी (स.) पूर्व के समस्त आसमानी धर्मों की सत्यता को भी प्रमाणित करता है। जैसे कि क़ुरआने करीम के सूरए बक़रा की आयत न. 136 में वर्णन होता है कि “ क़ूलू आमन्ना बिल्लाहि व मा उन्ज़िला इलैना व मा उन्ज़िला इला […]

  • मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 1
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    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 1

    मुसलमानों के दरमियान क़ुरआन की अहमियत : 1Rate this post इस्लाम का शाब्दिक अर्थ “समर्पण” है। और क़ुरआन की भाषा में इसका अर्थ “अल्लाह के आदेशों के सम्मुख समर्पित”होना है। यह इस्लाम शब्द का आम अर्थ है। क़ुरआने करीम इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म को इस अर्थ मे मान्यता नही देता। जैसे कि क़ुरआने […]