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    • सूरए यूसुफ़, आयतें 41-43, (कार्यक्रम 386)
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      सूरए यूसुफ़, आयतें 41-43, (कार्यक्रम 386)

      सूरए यूसुफ़, आयतें 41-43, (कार्यक्रम 386)Rate this post आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 41 की तिलावत सुनते हैं।يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ أَمَّا أَحَدُكُمَا فَيَسْقِي رَبَّهُ خَمْرًا وَأَمَّا الْآَخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْ رَأْسِهِ قُضِيَ الْأَمْرُ الَّذِي فِيهِ تَسْتَفْتِيَانِ (41)(यूसुफ़ ने कहा) हे मेरे बंदी साथियो! तुम में से एक तो (रिहा होकर) अपने स्वामी […]

    • सूरए निसा; आयतें 171-176 (कार्यक्रम 160)
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      सूरए निसा; आयतें 171-176 (कार्यक्रम 160)

      सूरए निसा; आयतें 171-176 (कार्यक्रम 160)Rate this post आइये पहले सूरए निसा की आयत नंबर 171 की तिलावत सुनें।يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لَا تَغْلُوا فِي دِينِكُمْ وَلَا تَقُولُوا عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ إِنَّمَا الْمَسِيحُ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ رَسُولُ اللَّهِ وَكَلِمَتُهُ أَلْقَاهَا إِلَى مَرْيَمَ وَرُوحٌ مِنْهُ فَآَمِنُوا بِاللَّهِ وَرُسُلِهِ وَلَا تَقُولُوا ثَلَاثَةٌ انْتَهُوا خَيْرًا لَكُمْ إِنَّمَا اللَّهُ […]

    • सूरए हज, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 598)
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      सूरए हज, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 598)

      सूरए हज, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 598)Rate this post आइये पहले सूरए हज की पैंतीसवीं आयत की तिलावत सुनें। الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَالصَّابِرِينَ عَلَى مَا أَصَابَهُمْ وَالْمُقِيمِي الصَّلَاةِ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنْفِقُونَ (35) ये वे लोग है कि जब ईश्वर को याद किया जाता है तो उनके दिल दहल जाते है और जो मुसीबत […]

    • सूरए मोमिनून, आयतें 57-62, (कार्यक्रम 616)
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      सूरए मोमिनून, आयतें 57-62, (कार्यक्रम 616)

      सूरए मोमिनून, आयतें 57-62, (कार्यक्रम 616)Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-597 आइये पहले सूरए मोमिनून की 57वीं, 58वीं और 59वीं आयतों की तिलावत सुनें। إِنَّ الَّذِينَ هُمْ مِنْ خَشْيَةِ رَبِّهِمْ مُشْفِقُونَ (57) وَالَّذِينَ هُمْ بِآَيَاتِ رَبِّهِمْ يُؤْمِنُونَ (58) وَالَّذِينَ هُمْ بِرَبِّهِمْ لَا يُشْرِكُونَ (59) निश्चय ही जो लोग अपने पालनहार के भय से काँपते रहते […]

    • सूरए बक़रह; आयतें १५-१६ (कार्यक्रम 8)
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      सूरए बक़रह; आयतें १५-१६ (कार्यक्रम 8)

      सूरए बक़रह; आयतें १५-१६ (कार्यक्रम 8)Rate this post सूरए बक़रह की पन्द्रहवीं आयत इस प्रकार है।اللَّهُ يَسْتَهْزِئُ بِهِمْ وَيَمُدُّهُمْ فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ (15)अल्लाह भी उनका परिहास करता है और उनको उनकी ढिठाई में ढील दिए जाता है ताकि वे भटकते फिरें। (2:15) पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के अहलेबैत […]

    • सूरए बक़रह; आयतें 19-20 (कार्यक्रम 10)
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      सूरए बक़रह; आयतें 19-20 (कार्यक्रम 10)

      सूरए बक़रह; आयतें 19-20 (कार्यक्रम 10)Rate this post सूरए बक़रह की 19वीं आयत इस प्रकार हैः-أَوْ كَصَيِّبٍ مِنَ السَّمَاءِ فِيهِ ظُلُمَاتٌ وَرَعْدٌ وَبَرْقٌ يَجْعَلُونَ أَصَابِعَهُمْ فِي آَذَانِهِمْ مِنَ الصَّوَاعِقِ حَذَرَ الْمَوْتِ وَاللَّهُ مُحِيطٌ بِالْكَافِرِينَ (19)या उनका उदाहरण उन लोगों जैसा है जो आकाश से हो रही तेज़ वर्षा, अंधकार तथा गरज व चमक में फंस […]

    • सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)
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      सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)

      सूरए ताहा, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 544)Rate this post इससे पहले सूरए मरयम की आयतों की व्याख्या समाप्त हुई और इस कार्यक्रम से हम क़ुरआने मजीद के बीसवें सूरे अर्थात सूरए ताहा की आयतों की व्याख्या आरंभ कर रहे हैं। आइये पहले इस सूरे की पहली और दूसरी आयतों की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ. […]

    • सूरए मरयम, आयतें 41-45, (कार्यक्रम 533)
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      सूरए मरयम, आयतें 41-45, (कार्यक्रम 533)

      सूरए मरयम, आयतें 41-45, (कार्यक्रम 533)Rate this post आइये पहले सूरए मरयम की आयत नंबर 41 और 42 की तिलावत सुनें। وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَبِيًّا (41) إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ يَا أَبَتِ لِمَ تَعْبُدُ مَا لَا يَسْمَعُ وَلَا يُبْصِرُ وَلَا يُغْنِي عَنْكَ شَيْئًا (42) और (हे पैग़म्बर!) इस किताब में इब्राहीम का […]

    • सूरए आले इमरान; आयतें १८७-१९० (कार्यक्रम 115)
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      सूरए आले इमरान; आयतें १८७-१९० (कार्यक्रम 115)

      सूरए आले इमरान; आयतें १८७-१९० (कार्यक्रम 115)Rate this post आइये पहले सूरए आले इमरान की आयत नंबर 187 की तिलावत सुनें।وَإِذْ أَخَذَ اللَّهُ مِيثَاقَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ لَتُبَيِّنُنَّهُ لِلنَّاسِ وَلَا تَكْتُمُونَهُ فَنَبَذُوهُ وَرَاءَ ظُهُورِهِمْ وَاشْتَرَوْا بِهِ ثَمَنًا قَلِيلًا فَبِئْسَ مَا يَشْتَرُونَ (187)और जब ईश्वर ने (विद्वानों से और) जिन्हें (आसमानी) किताब दी गई थी, यह […]

    • सूरए हूद, आयतें 38-41, (कार्यक्रम 355)
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      सूरए हूद, आयतें 38-41, (कार्यक्रम 355)

      सूरए हूद, आयतें 38-41, (कार्यक्रम 355)Rate this post आइये पहले सूरए हूद की आयत संख्या 38 और 39 की तिलावत सुनते हैं।وَيَصْنَعُ الْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِنْ قَوْمِهِ سَخِرُوا مِنْهُ قَالَ إِنْ تَسْخَرُوا مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنْكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ (38) فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَنْ يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُقِيمٌ (39)हज़रत नूह (ईश्वर के […]

    • सूरए नहल, आयतें 17-21, (कार्यक्रम 447)
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      सूरए नहल, आयतें 17-21, (कार्यक्रम 447)

      सूरए नहल, आयतें 17-21, (कार्यक्रम 447)Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 17 और 18 की तिलावत सुनें।أَفَمَنْ يَخْلُقُ كَمَنْ لَا يَخْلُقُ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ (17) وَإِنْ تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا إِنَّ اللَّهَ لَغَفُورٌ رَحِيمٌ (18)तो क्या जो रचना करता है वह उसके समान हो सकता है जो रचना नहीं करता? क्या […]

    • सूरए अन्फ़ाल, आयतें 65-69, (कार्यक्रम 293)
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      सूरए अन्फ़ाल, आयतें 65-69, (कार्यक्रम 293)

      सूरए अन्फ़ाल, आयतें 65-69, (कार्यक्रम 293)Rate this post आइये अब सूरए अन्फ़ाल की आयत संख्या 65 की तिलावत सुनते हैं।يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ إِنْ يَكُنْ مِنْكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ وَإِنْ يَكُنْ مِنْكُمْ مِئَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَا يَفْقَهُونَ (65)हे पैग़म्बर, आप ईमान वालों को जेहाद के लिए […]

    • सूरए निसा; आयतें 53-57 (कार्यक्रम 132)
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      सूरए निसा; आयतें 53-57 (कार्यक्रम 132)

      सूरए निसा; आयतें 53-57 (कार्यक्रम 132)Rate this post आइये पहले सूरए निसा की 53वीं, 54वीं और 55वीं आयतों की तिलावतों की सुनें।أَمْ لَهُمْ نَصِيبٌ مِنَ الْمُلْكِ فَإِذًا لَا يُؤْتُونَ النَّاسَ نَقِيرًا (53) أَمْ يَحْسُدُونَ النَّاسَ عَلَى مَا آَتَاهُمُ اللَّهُ مِنْ فَضْلِهِ فَقَدْ آَتَيْنَا آَلَ إِبْرَاهِيمَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَآَتَيْنَاهُمْ مُلْكًا عَظِيمًا (54) فَمِنْهُمْ مَنْ آَمَنَ بِهِ […]

    • सूरए कह्फ़, आयतें 15-17, (कार्यक्रम 507)
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      सूरए कह्फ़, आयतें 15-17, (कार्यक्रम 507)

      सूरए कह्फ़, आयतें 15-17, (कार्यक्रम 507)Rate this post आइये पहले सूरए कह्फ़ की आयत नंबर 15 की तिलावत सुनें। هَؤُلَاءِ قَوْمُنَا اتَّخَذُوا مِنْ دُونِهِ آَلِهَةً لَوْلَا يَأْتُونَ عَلَيْهِمْ بِسُلْطَانٍ بَيِّنٍ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَى عَلَى اللَّهِ كَذِبًا (15) (उन्होंने कहा) यह हमारी जाति (वाले) हैं जिन्होंने उस (अनन्य ईश्वर) के अतिरिक्त दूसरे पूज्य बना लिए […]

    • सूरए आराफ़, आयतें 157-159, (कार्यक्रम 267)
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      सूरए आराफ़, आयतें 157-159, (कार्यक्रम 267)

      सूरए आराफ़, आयतें 157-159, (कार्यक्रम 267)Rate this post आइये अब सूरए आराफ़ की आयत संख्या 157 की तिलावत सुनते हैंالَّذِينَ يَتَّبِعُونَ الرَّسُولَ النَّبِيَّ الْأُمِّيَّ الَّذِي يَجِدُونَهُ مَكْتُوبًا عِنْدَهُمْ فِي التَّوْرَاةِ وَالْإِنْجِيلِ يَأْمُرُهُمْ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَاهُمْ عَنِ الْمُنْكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبَاتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبَائِثَ وَيَضَعُ عَنْهُمْ إِصْرَهُمْ وَالْأَغْلَالَ الَّتِي كَانَتْ عَلَيْهِمْ فَالَّذِينَ آَمَنُوا بِهِ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَاتَّبَعُوا […]

    • सूरए तौबा, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 306)
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      सूरए तौबा, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 306)

      सूरए तौबा, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 306)Rate this post आइये पहले सूरए तौबा की 43वीं आयत की तिलावत सुनें।عَفَا اللَّهُ عَنْكَ لِمَ أَذِنْتَ لَهُمْ حَتَّى يَتَبَيَّنَ لَكَ الَّذِينَ صَدَقُوا وَتَعْلَمَ الْكَاذِبِينَ (43) हे पैग़म्बर! ईश्वर ने आपको क्षमा किया, कि क्यों आपने उन्हें पीछे रह जाने की अनुमति दे दी बिना यह स्पष्ट हुए कि कौन […]

    • सूरए अनआम, आयतें 20-24, (कार्यक्रम 198)
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      सूरए अनआम, आयतें 20-24, (कार्यक्रम 198)

      सूरए अनआम, आयतें 20-24, (कार्यक्रम 198)Rate this post आइये सूरए अनआम की 20वीं आयत की तिलावत सुनते हैंالَّذِينَ آَتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَعْرِفُونَهُ كَمَا يَعْرِفُونَ أَبْنَاءَهُمُ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنْفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ (20)जिन लोगों को हमने आस्मानी किताब दी है वे पैग़म्बर को अपने बच्चों की भांति पहचानते हैं (परंतु) जिन लोगों ने अपने आप को घाटे […]

    • सूरए इसरा, आयतें 56-59, (कार्यक्रम 490)
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      सूरए इसरा, आयतें 56-59, (कार्यक्रम 490)

      सूरए इसरा, आयतें 56-59, (कार्यक्रम 490)Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 56 की तिलावत सुनें। قُلِ ادْعُوا الَّذِينَ زَعَمْتُمْ مِنْ دُونِهِ فَلَا يَمْلِكُونَ كَشْفَ الضُّرِّ عَنْكُمْ وَلَا تَحْوِيلًا (56) कह दीजिए कि तुम ईश्वर को छोड़ कर जिन लोगों को (पूज्य) समझते थे, उन्हें पुकारो, वे न तो तुम्हारी किसी समस्या […]

    • सूरए मरयम, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 526)
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      सूरए मरयम, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 526)

      सूरए मरयम, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 526)Rate this post इससे पहले सूरए कह्फ़ की व्याख्या समाप्त हुई और अब क़ुरआने मजीद के 19वें सूरे अर्थात सूरए मरयम की व्याख्या आरंभ हो रही है। यह सूरा मक्का नगर में ईश्वर की ओर से पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पास भेजा गया। इस सूरे […]

    • सूरए निसा; आयत 34 (कार्यक्रम 127)
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      सूरए निसा; आयत 34 (कार्यक्रम 127)

      सूरए निसा; आयत 34 (कार्यक्रम 127)Rate this post आइये पहले सूरए निसा की 34वीं आयत की तिलावत सुनें।الرِّجَالُ قَوَّامُونَ عَلَى النِّسَاءِ بِمَا فَضَّلَ اللَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَى بَعْضٍ وَبِمَا أَنْفَقُوا مِنْ أَمْوَالِهِمْ فَالصَّالِحَاتُ قَانِتَاتٌ حَافِظَاتٌ لِلْغَيْبِ بِمَا حَفِظَ اللَّهُ وَاللَّاتِي تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَاهْجُرُوهُنَّ فِي الْمَضَاجِعِ وَاضْرِبُوهُنَّ فَإِنْ أَطَعْنَكُمْ فَلَا تَبْغُوا عَلَيْهِنَّ سَبِيلًا إِنَّ اللَّهَ كَانَ […]

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