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  •  सूरए नूर, आयतें 62-64, (कार्यक्रम 638)
    सूरए नूर, आयतें 62-64, (कार्यक्रम 638)
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    सूरए नूर, आयतें 62-64, (कार्यक्रम 638)Rate this post إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ آَمَنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَإِذَا كَانُوا مَعَهُ عَلَى أَمْرٍ جَامِعٍ لَمْ يَذْهَبُوا حَتَّى يَسْتَأْذِنُوهُ إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَأْذِنُونَكَ أُولَئِكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ فَإِذَا اسْتَأْذَنُوكَ لِبَعْضِ شَأْنِهِمْ فَأْذَنْ لِمَنْ شِئْتَ مِنْهُمْ وَاسْتَغْفِرْ لَهُمُ اللَّهَ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ (62) ईमान वाले तो बस वही हैं जो […]

  •  सूरए नूर, आयतें 58-61, (कार्यक्रम 637)
    सूरए नूर, आयतें 58-61, (कार्यक्रम 637)
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    सूरए नूर, आयतें 58-61, (कार्यक्रम 637)Rate this post يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آَمَنُوا لِيَسْتَأْذِنْكُمُ الَّذِينَ مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ وَالَّذِينَ لَمْ يَبْلُغُوا الْحُلُمَ مِنْكُمْ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ مِنْ قَبْلِ صَلَاةِ الْفَجْرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُمْ مِنَ الظَّهِيرَةِ وَمِنْ بَعْدِ صَلَاةِ الْعِشَاءِ ثَلَاثُ عَوْرَاتٍ لَكُمْ لَيْسَ عَلَيْكُمْ وَلَا عَلَيْهِمْ جُنَاحٌ بَعْدَهُنَّ طَوَّافُونَ عَلَيْكُمْ بَعْضُكُمْ عَلَى بَعْضٍ كَذَلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآَيَاتِ […]

  •  सूरए नूर, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 636)
    सूरए नूर, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 636)
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    सूरए नूर, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 636)

    सूरए नूर, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 636)Rate this post وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ لَئِنْ أَمَرْتَهُمْ لَيَخْرُجُنَّ قُلْ لَا تُقْسِمُوا طَاعَةٌ مَعْرُوفَةٌ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ (53) قُلْ أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ فَإِنْ تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا عَلَيْهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيْكُمْ مَا حُمِّلْتُمْ وَإِنْ تُطِيعُوهُ تَهْتَدُوا وَمَا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ (54) और उन्होंने अल्लाह की कड़ी […]

  •  सूरए नूर, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 635)
    सूरए नूर, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 635)
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    सूरए नूर, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 635)

    सूरए नूर, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 635)Rate this post وَإِذَا دُعُوا إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِنْهُمْ مُعْرِضُونَ (48) وَإِنْ يَكُنْ لَهُمُ الْحَقُّ يَأْتُوا إِلَيْهِ مُذْعِنِينَ (49) أَفِي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ أَمِ ارْتَابُوا أَمْ يَخَافُونَ أَنْ يَحِيفَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَرَسُولُهُ بَلْ أُولَئِكَ هُمَ الظَّالِمُونَ (50) और जब उन्हें ईश्वर और उसके पैग़म्बर की ओर बुलाया […]

  •  सूरए नूर, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 634)
    सूरए नूर, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 634)
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    सूरए नूर, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 634)

    सूरए नूर, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 634)Rate this post أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِنْ جِبَالٍ فِيهَا مِنْ بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَنْ يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَنْ مَنْ يَشَاءُ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ (43) يُقَلِّبُ اللَّهُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ إِنَّ فِي ذَلِكَ لَعِبْرَةً […]

  •  सूरए नूर, आयतें 39-42, (कार्यक्रम 633)
    सूरए नूर, आयतें 39-42, (कार्यक्रम 633)
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    सूरए नूर, आयतें 39-42, (कार्यक्रम 633)

    सूरए नूर, आयतें 39-42, (कार्यक्रम 633)Rate this post وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَعْمَالُهُمْ كَسَرَابٍ بِقِيعَةٍ يَحْسَبُهُ الظَّمْآَنُ مَاءً حَتَّى إِذَا جَاءَهُ لَمْ يَجِدْهُ شَيْئًا وَوَجَدَ اللَّهَ عِنْدَهُ فَوَفَّاهُ حِسَابَهُ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ (39) أَوْ كَظُلُمَاتٍ فِي بَحْرٍ لُجِّيٍّ يَغْشَاهُ مَوْجٌ مِنْ فَوْقِهِ مَوْجٌ مِنْ فَوْقِهِ سَحَابٌ ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ إِذَا أَخْرَجَ يَدَهُ لَمْ يَكَدْ يَرَاهَا وَمَنْ […]

  •  सूरए नूर, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 632)
    सूरए नूर, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 632)
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    सूरए नूर, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 632)

    सूरए नूर, आयतें 35-38, (कार्यक्रम 632)Rate this post सूरए नूर की आयत क्रमांक 35-38 اللَّهُ نُورُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ مَثَلُ نُورِهِ كَمِشْكَاةٍ فِيهَا مِصْبَاحٌ الْمِصْبَاحُ فِي زُجَاجَةٍ الزُّجَاجَةُ كَأَنَّهَا كَوْكَبٌ دُرِّيٌّ يُوقَدُ مِنْ شَجَرَةٍ مُبَارَكَةٍ زَيْتُونَةٍ لَا شَرْقِيَّةٍ وَلَا غَرْبِيَّةٍ يَكَادُ زَيْتُهَا يُضِيءُ وَلَوْ لَمْ تَمْسَسْهُ نَارٌ نُورٌ عَلَى نُورٍ يَهْدِي اللَّهُ لِنُورِهِ مَنْ يَشَاءُ وَيَضْرِبُ اللَّهُ […]

  •  सूरए नूर, आयतें 32-34, (कार्यक्रम 631)
    सूरए नूर, आयतें 32-34, (कार्यक्रम 631)
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    सूरए नूर, आयतें 32-34, (कार्यक्रम 631)

    सूरए नूर, आयतें 32-34, (कार्यक्रम 631)Rate this post सूरए नूर की आयत क्रमांक 32-34, وَأَنْكِحُوا الْأَيَامَى مِنْكُمْ وَالصَّالِحِينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَإِمَائِكُمْ إِنْ يَكُونُوا فُقَرَاءَ يُغْنِهِمُ اللَّهُ مِنْ فَضْلِهِ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ (32) और तुम में जो (युवा व युवतियां) अविवाहित हों और तुम्हारे दासों व दासियों में जो भले व योग्य हों, उनका विवाह कर […]

  •  सूरए नूर, आयतें 30-31, (कार्यक्रम 630)
    सूरए नूर, आयतें 30-31, (कार्यक्रम 630)
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    सूरए नूर, आयतें 30-31, (कार्यक्रम 630)

    सूरए नूर, आयतें 30-31, (कार्यक्रम 630)Rate this post सूरए नूर की आयत क्रमांक 30-31 قُلْ لِلْمُؤْمِنِينَ يَغُضُّوا مِنْ أَبْصَارِهِمْ وَيَحْفَظُوا فُرُوجَهُمْ ذَلِكَ أَزْكَى لَهُمْ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا يَصْنَعُونَ (30) (हे पैग़म्बर!) ईमान वाले पुरुषों से कह दीजिए कि अपनी निगाहें (हराम चीज़ों से) ब चाकर रखें और अपनी पवित्रता की रक्षा करें। यही उनके लिए […]

  •  सूरए नूर, आयतें 24-29, (कार्यक्रम 629)
    सूरए नूर, आयतें 24-29, (कार्यक्रम 629)
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    सूरए नूर, आयतें 24-29, (कार्यक्रम 629)

    सूरए नूर, आयतें 24-29, (कार्यक्रम 629)Rate this post नूर की आयत क्रमांक 24 और 25 يَوْمَ تَشْهَدُ عَلَيْهِمْ أَلْسِنَتُهُمْ وَأَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (24) يَوْمَئِذٍ يُوَفِّيهِمُ اللَّهُ دِينَهُمُ الْحَقَّ وَيَعْلَمُونَ أَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ الْمُبِينُ (25) जिस दिन कि उनकी ज़बानें, उनके हाथ और उनके पाँव उनके विरुद्ध उन (कर्मों) की गवाही देंगे, जो […]

  •  सूरए नूर, आयतें 21-23, (कार्यक्रम 628)
    सूरए नूर, आयतें 21-23, (कार्यक्रम 628)
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    सूरए नूर, आयतें 21-23, (कार्यक्रम 628)

    सूरए नूर, आयतें 21-23, (कार्यक्रम 628)Rate this post आइये पहले सूरए नूर की आयत क्रमांक 21 की तिलावत सुनें। يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آَمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ وَمَنْ يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنْكَرِ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَنْ يَشَاءُ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ (21) […]

  •  सूरए नूर, आयतें 15-20, (कार्यक्रम 627)
    सूरए नूर, आयतें 15-20, (कार्यक्रम 627)
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    सूरए नूर, आयतें 15-20, (कार्यक्रम 627)

    सूरए नूर, आयतें 15-20, (कार्यक्रम 627)Rate this post आइये पहले सूरए नूर की आयत क्रमांक 15 और 16 की तिलावत सुनें। إِذْ تَلَقَّوْنَهُ بِأَلْسِنَتِكُمْ وَتَقُولُونَ بِأَفْوَاهِكُمْ مَا لَيْسَ لَكُمْ بِهِ عِلْمٌ وَتَحْسَبُونَهُ هَيِّنًا وَهُوَ عِنْدَ اللَّهِ عَظِيمٌ (15) وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُمْ مَا يَكُونُ لَنَا أَنْ نَتَكَلَّمَ بِهَذَا سُبْحَانَكَ هَذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ (16) जब तुम […]

  •  सूरए नूर, आयतें 6-14, (कार्यक्रम 626)
    सूरए नूर, आयतें 6-14, (कार्यक्रम 626)
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    सूरए नूर, आयतें 6-14, (कार्यक्रम 626)

    सूरए नूर, आयतें 6-14, (कार्यक्रम 626)Rate this post आइये पहले सूरए नूर की आयत क्रमांक छः से दस तक की तिलावत सुनें। وَالَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ شُهَدَاءُ إِلَّا أَنْفُسُهُمْ فَشَهَادَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ (6) وَالْخَامِسَةُ أَنَّ لَعْنَةَ اللَّهِ عَلَيْهِ إِنْ كَانَ مِنَ الْكَاذِبِينَ (7) وَيَدْرَأُ عَنْهَا الْعَذَابَ أَنْ تَشْهَدَ […]

  •  सूरए नूर, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 625)
    सूरए नूर, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 625)
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    सूरए नूर, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 625)

    सूरए नूर, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 625)Rate this post आइये सूरए नूर की पहली आयत की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ سُورَةٌ أَنْزَلْنَاهَا وَفَرَضْنَاهَا وَأَنْزَلْنَا فِيهَا آَيَاتٍ بَيِّنَاتٍ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ (1) अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। यह एक सूरा है, जिसे हमने उतारा है और इस (के आदेशों के पालन) […]

  • सूरए मोमिनून, आयतें 112-118, (कार्यक्रम 624)
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    सूरए मोमिनून, आयतें 112-118, (कार्यक्रम 624)

    सूरए मोमिनून, आयतें 112-118, (कार्यक्रम 624)Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-605الَ كَمْ لَبِثْتُمْ فِي الْأَرْضِ عَدَدَ سِنِينَ (112) قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ فَاسْأَلِ الْعَادِّينَ (113) قَالَ إِنْ لَبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا لَوْ أَنَّكُمْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ (114) (ईश्वर) कहेगाः तुम धरती में कितने वर्ष रहे? (23:112) वे (उत्तर में) कहेंगे, एक दिन या एक दिन […]

  • मोमिनून आयत 105
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    मोमिनून आयत 105

    मोमिनून आयत 105Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-604 आइये पहले सूरए मोमिनून की आयत क्रमांक 105 और 106 की तिलावत सुनें। أَلَمْ تَكُنْ آَيَاتِي تُتْلَى عَلَيْكُمْ فَكُنْتُمْ بِهَا تُكَذِّبُونَ (105) قَالُوا رَبَّنَا غَلَبَتْ عَلَيْنَا شِقْوَتُنَا وَكُنَّا قَوْمًا ضَالِّينَ (106) (उनसे कहा जाएगा) क्या तुम्हें मेरी आयातें सुनाई नहीं जाती थीं? तो तुम उन्हें झुठलाते थे? […]

  • सूरए मोमिनून, आयतें 91-98, (कार्यक्रम 621)
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    सूरए मोमिनून, आयतें 91-98, (कार्यक्रम 621)

    सूरए मोमिनून, आयतें 91-98, (कार्यक्रम 621)Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-602 (हसन अब्बास) प्रिय श्रोताओ कार्यक्रम क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार की एक अन्य कड़ी लेकर आपकी सेवा में उपस्थित हैं, आशा है, पसंद करेंगे। आइये पहले सूरए मोमिनून की आयत क्रमांक 91 और 92 की तिलावत सुनें। مَا اتَّخَذَ اللَّهُ مِنْ وَلَدٍ وَمَا كَانَ مَعَهُ مِنْ […]

  • सूरए मोमिनून, आयतें 81-90, (कार्यक्रम 620)
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    सूरए मोमिनून, आयतें 81-90, (कार्यक्रम 620)

    सूरए मोमिनून, आयतें 81-90, (कार्यक्रम 620)Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-601 आइये पहले सूरए मोमिनून की आयत क्रमांक 81, 82 और 83 की तिलावत सुनें। بَلْ قَالُوا مِثْلَ مَا قَالَ الْأَوَّلُونَ (81) قَالُوا أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَئِنَّا لَمَبْعُوثُونَ (82) لَقَدْ وُعِدْنَا نَحْنُ وَآَبَاؤُنَا هَذَا مِنْ قَبْلُ إِنْ هَذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ (83) (काफ़िर […]

  • सूरए मोमिनून, आयतें 75-80, (कार्यक्रम 619)
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    सूरए मोमिनून, आयतें 75-80, (कार्यक्रम 619)

    सूरए मोमिनून, आयतें 75-80, (कार्यक्रम 619)Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-600 आइये पहले सूरए मोमिनून की 75वीं आयत की तिलावत सुनें। وَلَوْ رَحِمْنَاهُمْ وَكَشَفْنَا مَا بِهِمْ مِنْ ضُرٍّ لَلَجُّوا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ (75) और यदि हम इन पर दया करें और जिस पीड़ा में वे (इस समय) ग्रस्त हैं उसे दूर कर दें तो ये […]

  • सूरए मोमिनून, आयतें 70-74, (कार्यक्रम 618)
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    सूरए मोमिनून, आयतें 70-74, (कार्यक्रम 618)

    सूरए मोमिनून, आयतें 70-74, (कार्यक्रम 618)Rate this post क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-599 आइये पहले सूरए मोमिनून की 70वीं आयत की तिलावत सुनें। أَمْ يَقُولُونَ بِهِ جِنَّةٌ بَلْ جَاءَهُمْ بِالْحَقِّ وَأَكْثَرُهُمْ لِلْحَقِّ كَارِهُونَ (70) या वे कहते हैं कि उन्हें उन्माद है। (ऐसा नहीं है) बल्कि वे उनके पास सत्य लेकर आए हैं किंतु उनमें से अधिकांश […]

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