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    सूरए नहल, आयतें 101-103, (कार्यक्रम 467)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 101 की तिलावत सुनें। وَإِذَا بَدَّلْنَا آَيَةً مَكَانَ آَيَةٍ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُنَزِّلُ قَالُوا إِنَّمَا أَنْتَ مُفْتَرٍ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ (101)और जब हम एक आयत के स्थान पर दूसरी आयत बदल कर ले आते हैं, और ईश्वर जो कुछ उतारता है उसके बारे में […]

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    सूरए नहल, आयतें 97-100, (कार्यक्रम 466)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 97 की तिलावत सुनें।مَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِنْ ذَكَرٍ أَوْ أُنْثَى وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيَاةً طَيِّبَةً وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُمْ بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (97)जो कोई ईश्वर पर ईमान रखता हो, चाहे वह पुरुष हो अथवा स्त्री, और भले कर्म करे तो निश्चित रूप से हम उसे पवित्र […]

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    सूरए नहल, आयतें 93-96, (कार्यक्रम 465)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 93 की तिलावत सुनें।وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَلَكِنْ يُضِلُّ مَنْ يَشَاءُ وَيَهْدِي مَنْ يَشَاءُ وَلَتُسْأَلُنَّ عَمَّا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ (93)यदि ईश्वर चाहता तो तुम सभी को एक समुदाय बना देता किंतु वह जिसे चाहता है पथभ्रष्ट कर देता है और जिसका चाहता है मार्गदर्शन […]

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    सूरए नहल, आयतें 90-92, (कार्यक्रम 464)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 90 की तिलावत सुनें।إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُ بِالْعَدْلِ وَالْإِحْسَانِ وَإِيتَاءِ ذِي الْقُرْبَى وَيَنْهَى عَنِ الْفَحْشَاءِ وَالْمُنْكَرِ وَالْبَغْيِ يَعِظُكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ (90)निश्चित रूप से ईश्वर न्याय, भलाई और अपने निकटवर्ती लोगों के साथ उपकार का आदेश देता है तथा बुरे व अप्रिय कर्मों एवं दूसरों पर अतिक्रमण […]

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    सूरए नहल, आयतें 85-89, (कार्यक्रम 463)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 85 और 86 की तिलावत सुनें।وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ ظَلَمُوا الْعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ وَلَا هُمْ يُنْظَرُونَ (85) وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ أَشْرَكُوا شُرَكَاءَهُمْ قَالُوا رَبَّنَا هَؤُلَاءِ شُرَكَاؤُنَا الَّذِينَ كُنَّا نَدْعُوا مِنْ دُونِكَ فَأَلْقَوْا إِلَيْهِمُ الْقَوْلَ إِنَّكُمْ لَكَاذِبُونَ (86)और जब अत्याचार करने वाले (ईश्वरीय) दण्ड को देखेंगे […]

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    सूरए नहल, आयतें 81-84, (कार्यक्रम 462)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 81 की तिलावत सुनें।وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُمْ مِمَّا خَلَقَ ظِلَالًا وَجَعَلَ لَكُمْ مِنَ الْجِبَالِ أَكْنَانًا وَجَعَلَ لَكُمْ سَرَابِيلَ تَقِيكُمُ الْحَرَّ وَسَرَابِيلَ تَقِيكُمْ بَأْسَكُمْ كَذَلِكَ يُتِمُّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْلِمُونَ (81) ईश्वर ने जो कुछ बनाया है उसमें से तुम्हारे लिए छायाएं बनाई हैं और पर्वतों में […]

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    सूरए नहल, आयतें 78-80, (कार्यक्रम 461)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 78 की तिलावत सुनें। وَاللَّهُ أَخْرَجَكُمْ مِنْ بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ لَا تَعْلَمُونَ شَيْئًا وَجَعَلَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ (78)और ईश्वर ने तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेट से ऐसी स्थिति में बाहर निकाला कि तुम कुछ भी नहीं जानते थे और उसने तुम्हारे लिए कान, […]

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    सूरए नहल, आयतें 73-77, (कार्यक्रम 460)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 73 और 74 की तिलावत सुनें। وَيَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَهُمْ رِزْقًا مِنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ شَيْئًا وَلَا يَسْتَطِيعُونَ (73) فَلَا تَضْرِبُوا لِلَّهِ الْأَمْثَالَ إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ وَأَنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ (74)और (अनेकेश्वरवादी) ईश्वर के स्थान पर ऐसी (प्रतिमाओं) को पूजते हैं जो आकाशों […]

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    सूरए नहल, आयतें 70-72, (कार्यक्रम 459)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 70 की तिलावत सुनें।وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ ثُمَّ يَتَوَفَّاكُمْ وَمِنْكُمْ مَنْ يُرَدُّ إِلَى أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْ لَا يَعْلَمَ بَعْدَ عِلْمٍ شَيْئًا إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ قَدِيرٌ (70)और ईश्वर ने ही तुम्हारी रचना की, फिर वही तुम्हें मृत्यु देता है और तुममें से कुछ को इतनी बुरी आयु तक […]

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    सूरए नहल, आयतें 66-69, (कार्यक्रम 458)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 66 की तिलावत सुनें। وَإِنَّ لَكُمْ فِي الْأَنْعَامِ لَعِبْرَةً نُسْقِيكُمْ مِمَّا فِي بُطُونِهِ مِنْ بَيْنِ فَرْثٍ وَدَمٍ لَبَنًا خَالِصًا سَائِغًا لِلشَّارِبِينَ (66)और निश्चित रूप से तुम्हारे लिए चौपायों में शिक्षा (सामग्री) है। जो कुछ उनके पेट में है उसमें से गोबर और रक्त के बीच […]

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    सूरए नहल, आयतें 62-65, (कार्यक्रम 457)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 62 की तिलावत सुनें। وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ مَا يَكْرَهُونَ وَتَصِفُ أَلْسِنَتُهُمُ الْكَذِبَ أَنَّ لَهُمُ الْحُسْنَى لَا جَرَمَ أَنَّ لَهُمُ النَّارَ وَأَنَّهُمْ مُفْرَطُونَ (62)और अनेकेश्वरवादी जो कुछ अपने लिए पसंद नहीं करते थे, उसे ईश्वर के लिए गढ़ लेते हैं और उनकी ज़बान झूठ ही यह कहती […]

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    सूरए नहल, आयतें 58-61, (कार्यक्रम 456)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 58 और 59 की तिलावत सुनें। وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُمْ بِالْأُنْثَى ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ (58) يَتَوَارَى مِنَ الْقَوْمِ مِنْ سُوءِ مَا بُشِّرَ بِهِ أَيُمْسِكُهُ عَلَى هُونٍ أَمْ يَدُسُّهُ فِي التُّرَابِ أَلَا سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ (59)और जब उनमें से किसी को पुत्री (के जन्म) की […]

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    सूरए नहल, आयतें 53-57, (कार्यक्रम 455)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 53 और 54 की तिलावत सुनें। وَمَا بِكُمْ مِنْ نِعْمَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فَإِلَيْهِ تَجْأَرُونَ (53) ثُمَّ إِذَا كَشَفَ الضُّرَّ عَنْكُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِنْكُمْ بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ (54)और तुम्हारे पास जो भी अनुकंपा है वह ईश्वर की ओर से है तो जब भी […]

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    सूरए नहल, आयतें 48-52, (कार्यक्रम 454)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 48 की तिलावत सुनें। أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى مَا خَلَقَ اللَّهُ مِنْ شَيْءٍ يَتَفَيَّأُ ظِلَالُهُ عَنِ الْيَمِينِ وَالشَّمَائِلِ سُجَّدًا لِلَّهِ وَهُمْ دَاخِرُونَ (48)क्या उन्होंने ईश्वर द्वारा बनाई गई वस्तुओं को नहीं देखा है कि किस प्रकार उनकी छायाएं दाहिनी और बाईं ओर से फैलती हैं और […]

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    सूरए नहल, आयतें 43-47, (कार्यक्रम 453)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 43 और 44 की तिलावत सुनें।وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُوحِي إِلَيْهِمْ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِنْ كُنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ (43) بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ وَأَنْزَلْنَا إِلَيْكَ الذِّكْرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيْهِمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ (44)और (हे पैग़म्बर!) हमने आपसे पूर्व भी पुरूषों को ही रसूल बना […]

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    सूरए नहल, आयतें 38-42, (कार्यक्रम 452)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 38 और 39 की तिलावत सुनें।وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ لَا يَبْعَثُ اللَّهُ مَنْ يَمُوتُ بَلَى وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلَكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ (38) لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي يَخْتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِبِينَ (39)और वे ईश्वर की बड़ी बड़ी सौगंध खाते हैं कि […]

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    सूरए नहल, आयतें 35-37, (कार्यक्रम 451)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 35 की तिलावत सुनें।وَقَالَ الَّذِينَ أَشْرَكُوا لَوْ شَاءَ اللَّهُ مَا عَبَدْنَا مِنْ دُونِهِ مِنْ شَيْءٍ نَحْنُ وَلَا آَبَاؤُنَا وَلَا حَرَّمْنَا مِنْ دُونِهِ مِنْ شَيْءٍ كَذَلِكَ فَعَلَ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَهَلْ عَلَى الرُّسُلِ إِلَّا الْبَلَاغُ الْمُبِينُ (35)और अनेकेश्वरवादी कहते हैं कि यदि ईश्वर चाहता तो हम […]

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    सूरए नहल, आयतें 30-34, (कार्यक्रम 450)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 30 और 31 की तिलावत सुनें।وَقِيلَ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا مَاذَا أَنْزَلَ رَبُّكُمْ قَالُوا خَيْرًا لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا فِي هَذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌ وَلَدَارُ الْآَخِرَةِ خَيْرٌ وَلَنِعْمَ دَارُ الْمُتَّقِينَ (30) جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ لَهُمْ فِيهَا مَا يَشَاءُونَ كَذَلِكَ يَجْزِي اللَّهُ الْمُتَّقِينَ (31)और जब ईश्वर से […]

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    सूरए नहल, आयतें 26-29, (कार्यक्रम 449)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 26 की तिलावत सुनें।قَدْ مَكَرَ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَأَتَى اللَّهُ بُنْيَانَهُمْ مِنَ الْقَوَاعِدِ فَخَرَّ عَلَيْهِمُ السَّقْفُ مِنْ فَوْقِهِمْ وَأَتَاهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ (26)निश्चित रूप से जो लोग उनसे पहले थे, उन्होंने भी चालें चली थीं तो ईश्वर (के दण्ड) ने उनकी इमारतों को […]

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    सूरए नहल, आयतें 22-25, (कार्यक्रम 448)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 22 और 23 की तिलावत सुनें।إِلَهُكُمْ إِلَهٌ وَاحِدٌ فَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآَخِرَةِ قُلُوبُهُمْ مُنْكِرَةٌ وَهُمْ مُسْتَكْبِرُونَ (22) لَا جَرَمَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْتَكْبِرِينَ (23)तुम्हारा पालनहार, अनन्य ईश्वर है तो जो लोग प्रलय के दिन पर ईमान नहीं रखते, […]

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