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    सूरए नहल, आयतें 17-21, (कार्यक्रम 447)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 17 और 18 की तिलावत सुनें।أَفَمَنْ يَخْلُقُ كَمَنْ لَا يَخْلُقُ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ (17) وَإِنْ تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا إِنَّ اللَّهَ لَغَفُورٌ رَحِيمٌ (18)तो क्या जो रचना करता है वह उसके समान हो सकता है जो रचना नहीं करता? क्या तुम विचार नहीं करते? (16:17) […]

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    सूरए नहल, आयतें 12-16, (कार्यक्रम 446)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर १२ और १३ की तिलावत सुनें।وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ وَالنُّجُومُ مُسَخَّرَاتٌ بِأَمْرِهِ إِنَّ فِي ذَلِكَ لَآَيَاتٍ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ (12) وَمَا ذَرَأَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ إِنَّ فِي ذَلِكَ لَآَيَةً لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ (13)और ईश्वर ने रात्रि, दिवस, सूर्य, चंद्रमा को तुम्हारे लिए नियंत्रित […]

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    सूरए नहल, आयतें 7-11, (कार्यक्रम 445)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर ७ और ८ की तिलावत सुनें।وَتَحْمِلُ أَثْقَالَكُمْ إِلَى بَلَدٍ لَمْ تَكُونُوا بَالِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ الْأَنْفُسِ إِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌ رَحِيمٌ (7) وَالْخَيْلَ وَالْبِغَالَ وَالْحَمِيرَ لِتَرْكَبُوهَا وَزِينَةً وَيَخْلُقُ مَا لَا تَعْلَمُونَ (8)और चौपाए तुम्हारे बोझ को ऐसे नगरों तक ढोते हैं जहाँ तक तुम (शरीर के) अत्यधिक […]

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    सूरए नहल, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 444)

    Rate this post सूरए हिज्र की आयतों की व्याख्या समाप्त हुई। अब हम क़ुरआने मजीद के सोलहवें सूरे अर्थात सूरए नहल की आयतों की व्याख्या करेंगे। इस सूरे में १२८ आयतें हैं। चूंकि इस सूरे में मधुमक्खी की सृष्टि का भी उल्लेख हुआ है जिसे अरबी भाषा में नहल कहते हैं, अतः इस सूरे का […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 90-99, (कार्यक्रम 443)

    Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर ९० से ९३ तक की तिलावत सुनें।كَمَا أَنْزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِمِينَ (90) الَّذِينَ جَعَلُوا الْقُرْآَنَ عِضِينَ (91) فَوَرَبِّكَ لَنَسْأَلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ (92) عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ (93)जिस प्रकार से हमने विभाजन करने वालों पर दंड भेजा, (15:90) जिन लोगों ने क़ुरआन का विभाजन तथा उसके टुकड़े कर दिए थे। […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 85-89, (कार्यक्रम 442)

    Rate this post आइये पहले सूरए हिज्र की आयत नंबर ८५ और ८६ तक की तिलावत सुनें।وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَإِنَّ السَّاعَةَ لَآَتِيَةٌ فَاصْفَحِ الصَّفْحَ الْجَمِيلَ (85) إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَلِيمُ (86)और निश्चित रूप से हमने आकाशों और धरती की तथा जो कुछ उनके बीच है केवल सत्य के साथ […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 74-84, (कार्यक्रम 441)

    Rate this post आइये पहले सूरए हिज्र की आयत नंबर ७४ से ७७ तक की तिलावत सुनें।فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجِّيلٍ (74) إِنَّ فِي ذَلِكَ لَآَيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّمِينَ (75) وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُقِيمٍ (76) إِنَّ فِي ذَلِكَ لَآَيَةً لِلْمُؤْمِنِينَ (77)तो हमने उस नगर को उलट-पलट कर रख दिया और उन लोगों पर पत्थरों की […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 65-73, (कार्यक्रम 440)

    Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर ६५ और ६६ की तिलावत सुनें।فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَاتَّبِعْ أَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ (65) وَقَضَيْنَا إِلَيْهِ ذَلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَؤُلَاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِحِينَ (66)हे लूत! अपने परिवार वालों को लेकर रात के किसी भाग में निकल जाओ और स्वयं उनके […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 54-64, (कार्यक्रम 439)

    Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर ५४, ५५ और ५६ की तिलावत सुनें। قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِي عَلَى أَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ (54) قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُنْ مِنَ الْقَانِطِينَ (55) قَالَ وَمَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ (56)हज़रत इब्राहीम ने कहा क्या तुम मुझे वृद्धावस्था तक पहुंच जाने के बाद इस […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 45-53, (कार्यक्रम 438)

    Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर ४५, ४६, ४७ और ४८ की तिलावत सुनें।إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ (45) ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آَمِنِينَ (46) وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَى سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ (47) لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَجِينَ (48)निश्चित रूप से ईश्वर से डरने वाले (स्वर्ग के) बाग़ों […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 39-44, (कार्यक्रम 437)

    Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर ३९ और ४० की तिलावत सुनें।قَالَ رَبِّ بِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ (39) إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ (40)इब्लीस ने कहा, प्रभुवर! जिस प्रकार से तूने मुझे बहकाया मैं भी उसी प्रकार धरती में (मनुष्यों के समक्ष बुराइयों को) सुंदर बना कर प्रस्तुत करूंगा […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 32-38, (कार्यक्रम 436)

    Rate this post आइये पहले सूरए हिज्र की आयत नंबर ३२ और ३३ की तिलावत सुनें।قَالَ يَا إِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ السَّاجِدِينَ (32) قَالَ لَمْ أَكُنْ لِأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ (33)ईश्वर ने कहा, हे इब्लीस तुझे क्या हुआ है कि तू सजदा करने वालों के साथ नहीं है? (15:32) […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 26-31, (कार्यक्रम 435)

    Rate this post आइये पहले सूरए हिज्र की आयत नंबर २६ और २७ की तिलावत सुनें।وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنْسَانَ مِنْ صَلْصَالٍ مِنْ حَمَإٍ مَسْنُونٍ (26) وَالْجَانَّ خَلَقْنَاهُ مِنْ قَبْلُ مِنْ نَارِ السَّمُومِ (27)और निश्चित रूप से हमने मनुष्य की रचना काली और दुर्गंध वाली मिट्टी में से सूखी हुई मिट्टी से की (15:26) और (उससे पूर्व) […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 21-25, (कार्यक्रम 434)

    Rate this post आइये पहले सूरए हिज्र की आयत नंबर २१ की तिलावत सुनें।وَإِنْ مِنْ شَيْءٍ إِلَّا عِنْدَنَا خَزَائِنُهُ وَمَا نُنَزِّلُهُ إِلَّا بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ (21)और कोई भी वस्तु ऐसी नहीं जिसके ख़ज़ाने हमारे पास न हों और हम हर वस्तु को एक निर्धारित मात्रा में ही उतारते हैं।(15:21)ईश्वर ने, जो संपूर्ण सृष्टि तथा सभी जीवों […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 12-20, (कार्यक्रम 433)

    Rate this post आइये सूरए हिज्र की आयत नंबर १२ और १३ की तिलावत सुनें।كَذَلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ (12) لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ (13)इस प्रकार हम क़ुरआन को उनके हृदयों में उतार देते हैं (15:12) (किंतु) वे उस पर ईमान नहीं लाते और पिछले लोगों की परंपरा भी यही रही है।(15:13)इससे […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 7-11, (कार्यक्रम 432)

    Rate this post आइये पहले सूरए हिज्र की आयत नंबर ७ और ८ की तिलावत सुनें।لَوْ مَا تَأْتِينَا بِالْمَلَائِكَةِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ (7) مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُنْظَرِينَ (8)(विरोधियों ने कहा, हे पैग़म्बर!) यदि आप सच बोल रहे हैं तो फ़रिश्तों को हमारे पास क्यों नहीं लाते?(15:7) (जबकि) हम तो […]

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    सूरए हिज्र, आयतें 1-6, (कार्यक्रम 431)

    Rate this post इससे पहले क़ुरआने मजीद के सूरए इब्राहीम की आयतों की व्याख्या समाप्त हुई। आज से हम क़ुरआने मजीद के पंद्रहवें सूरे अर्थात सूरए हिज्र की व्याख्या आरंभ करेंगे। इस सूरे में ९९ आयतें हैं और यह पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के मदीना पलायन से पूर्व ईश्वर की ओर […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 46-52, (कार्यक्रम 430)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर ४६ और ४७ की तिलावत सुनें।وَقَدْ مَكَرُوا مَكْرَهُمْ وَعِنْدَ اللَّهِ مَكْرُهُمْ وَإِنْ كَانَ مَكْرُهُمْ لِتَزُولَ مِنْهُ الْجِبَالُ (46) فَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ مُخْلِفَ وَعْدِهِ رُسُلَهُ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ ذُو انْتِقَامٍ (47)और उन्होंने अपनी सभी चालें चलीं किंतु उनकी सभी चालें ईश्वर के निकट (स्पष्ट) हैं। यद्यपि […]

  • सूरए इब्राहीम, आयतें 40-45, (कार्यक्रम 429)
    4 (80%) 1 vote[s]

    सूरए इब्राहीम, आयतें 40-45, (कार्यक्रम 429)

    सूरए इब्राहीम, आयतें 40-45, (कार्यक्रम 429)4 (80%) 1 vote[s] आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर ४० और ४१ की तिलावत सुनें।رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِنْ ذُرِّيَّتِي رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ (40) رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ (41)प्रभुवर! मुझे नमाज़ स्थापित करने वालों में रख तथा मेरे वंश के साथ भी ऐसा ही […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 36-39, (कार्यक्रम 428)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर ३६ की तिलावत सुनें।رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضْلَلْنَ كَثِيرًا مِنَ النَّاسِ فَمَنْ تَبِعَنِي فَإِنَّهُ مِنِّي وَمَنْ عَصَانِي فَإِنَّكَ غَفُورٌ رَحِيمٌ (36)प्रभुवर! इन मूर्तियों ने बहुत अधिक लोगों को पथभ्रष्ठ किया है तो जो कोई मेरा अनुसरण करे तो वह मुझ से है और जो मेरा विरोध करे […]

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