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    सूरए इब्राहीम, आयतें 32-35, (कार्यक्रम 427)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर 32 और 33 की तिलावत सुनें।اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنْزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجَ بِهِ مِنَ الثَّمَرَاتِ رِزْقًا لَكُمْ وَسَخَّرَ لَكُمُ الْفُلْكَ لِتَجْرِيَ فِي الْبَحْرِ بِأَمْرِهِ وَسَخَّرَ لَكُمُ الْأَنْهَارَ (32) وَسَخَّرَ لَكُمُ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ دَائِبَيْنِ وَسَخَّرَ لَكُمُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ (33)ईश्वर ही है जिसने आकाशों […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 28-31, (कार्यक्रम 426)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर 28 और 29 की तिलावत सुनें।أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ بَدَّلُوا نِعْمَةَ اللَّهِ كُفْرًا وَأَحَلُّوا قَوْمَهُمْ دَارَ الْبَوَارِ (28) جَهَنَّمَ يَصْلَوْنَهَا وَبِئْسَ الْقَرَارُ (29)क्या तुमने नहीं देखा उन लोगों को जिन्होंने ईश्वरीय नेमतों को ईश्वर के इन्कार से बदल लिया और अपनी जाति को विनाश का […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 23-27, (कार्यक्रम 425)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर 23 की तिलावत सुनें।وَأُدْخِلَ الَّذِينَ آَمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِمْ تَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَامٌ (23)और जो लोग ईमान लाए हैं और अच्छे कार्य किये हैं उन्हे ऐसे बाग़ों में भेजा जिस के नीचे से नहरें बह रही हैं जिसमें […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 19-22, (कार्यक्रम 424)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर १९ और २० की तिलावत सुनें।أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ إِنْ يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ (19) وَمَا ذَلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ (20)क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर ने आकाशों और धरती की सत्य के साथ सृष्टि की? यदि वह चाहे तो […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 15-18, (कार्यक्रम 423)

    Rate this post आइये पहले सूरए इब्राहीम की आयत नंबर १५ और १६ की तिलावत सुनें।وَاسْتَفْتَحُوا وَخَابَ كُلُّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ (15) مِنْ وَرَائِهِ جَهَنَّمُ وَيُسْقَى مِنْ مَاءٍ صَدِيدٍ (16)और उन्हें (ईश्वर की ओर से) विजय की आशा थी जबकि हठधर्मी अत्याचारी निराश रह गए। (14:15) उनका ठिकाना नरक है जहां उन्हें अत्यंत दूषित व दुर्गंध […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 11-14, (कार्यक्रम 422)

    Rate this post आइये सूरए इब्राहीम की आयत नंबर ११ की तिलावत सुनें।قَالَتْ لَهُمْ رُسُلُهُمْ إِنْ نَحْنُ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُكُمْ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَمُنُّ عَلَى مَنْ يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَمَا كَانَ لَنَا أَنْ نَأْتِيَكُمْ بِسُلْطَانٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ (11)पैग़म्बरों ने विरोधियों के उत्तर में कहा कि हम भी तुम्हारी ही भांति मनुष्य […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 7-10, (कार्यक्रम 421)

    Rate this post सूरए इब्राहीम की आयत नंबर ७ और ८ की तिलावत सुनते हैं।وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكُمْ لَئِنْ شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ وَلَئِنْ كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذَابِي لَشَدِيدٌ (7) وَقَالَ مُوسَى إِنْ تَكْفُرُوا أَنْتُمْ وَمَنْ فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا فَإِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ حَمِيدٌ (8) और (हे पैग़म्बर!) याद कीजिए उस समय को जब आपके पालनहार ने घोषणा कर दी […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 4-6, (कार्यक्रम 420)

    Rate this post आइये सबसे पहले सूरे इब्राहीम की आयत नंबर 4 की तिलावत सुनें। وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ رَسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ فَيُضِلُّ اللَّهُ مَنْ يَشَاءُ وَيَهْدِي مَنْ يَشَاءُ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ (4)और हमने प्रत्येक पैग़म्बर को उसकी जाति की भाषा में भेजा ताकि वह ईश्वरीय संदेश का वर्णन करे तो ईश्वर जिसे […]

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    सूरए इब्राहीम, आयतें 1-3, (कार्यक्रम 419)

    Rate this post सूरए रअद की समीक्षा समाप्त हुई और अब हम सूरए इब्राहीम की समीक्षा आरंभ कर रहे हैं। इस सूरे की अधिकांश आयतें मक्का नगर में उतरी हैं और चूंकि इस सूरे में ईश्वरीय दूत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के बारे में, जिन से यहूदी, ईसाई तथा इस्लाम धर्म को संबधित बताया गया है, […]

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    सूरए रअद, आयतें 42-43, (कार्यक्रम 418)

    Rate this post आइये पहले सूरए रअद की आयत नंबर ४२ की तिलावत सुनें।وَقَدْ مَكَرَ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَلِلَّهِ الْمَكْرُ جَمِيعًا يَعْلَمُ مَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ وَسَيَعْلَمُ الْكُفَّارُ لِمَنْ عُقْبَى الدَّارِ (42)निश्चित रूप से जो लोग उनसे पहले थे, उन्होंने चालें चलीं, किंतु समस्त युक्तियां तो ईश्वर के लिए ही हैं। वह जानता है कि […]

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    सूरए रअद, आयतें 39-41, ( कार्यक्रम 417)

    Rate this post आइये पहले सूरए रअद की आयत नंबर ३९ की तिलावत सुनें।يَمْحُوا اللَّهُ مَا يَشَاءُ وَيُثْبِتُ وَعِنْدَهُ أُمُّ الْكِتَابِ (39)ईश्वर जिस वस्तु को चाहे मिटा देता है अथवा उपस्थित कर देता है और केवल उसी के पास मूल किताब है। (13:39)कुछ लोग यह सोचते हैं कि ईश्वर ने उनकी रचना करके उन्हें उनकी […]

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    सूरए रअद, आयतें 36-38, (कार्यक्रम 416)

    Rate this post आइये पहले सूरए रअद की आयत नंबर ३६ की तिलावत सुनें।وَالَّذِينَ آَتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يَفْرَحُونَ بِمَا أُنْزِلَ إِلَيْكَ وَمِنَ الْأَحْزَابِ مَنْ يُنْكِرُ بَعْضَهُ قُلْ إِنَّمَا أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ اللَّهَ وَلَا أُشْرِكَ بِهِ إِلَيْهِ أَدْعُو وَإِلَيْهِ مَآَبِ (36)और जिन लोगों को हमने (आसमानी) किताब दी है, वे उस (किताब) से प्रसन्न हैं किंतु कुछ […]

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    सूरए रअद, आयतें 32-35, (कार्यक्रम 415)

    Rate this post आइये अब सूरए रअद की आयत संख्या 32 की तिलावत सुनते हैं।وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِنْ قَبْلِكَ فَأَمْلَيْتُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ (32)(हे पैग़म्बर) निश्चित रूप से आपसे पहले वाले पैग़म्बरों का भी परिहास किया गया था तो मैंने कुफ़्र अपनाने वालों को मोहलत दी, फिर उसके बाद उन्हें (अपने […]

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    सूरए रअद, आयतें 29-31, (कार्यक्रम 414)

    Rate this post आइये पहले सूरए रअद की आयत नंबर २९ की तिलावत सुनें।الَّذِينَ آَمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ طُوبَى لَهُمْ وَحُسْنُ مَآَبٍ (29)धन्य हैं वे लोग जो ईमान लाए और भले कर्म करते रहे और उन (ही) के लिए भला अंत है। (13:29)पिछले कार्यक्रम में हमने ईश्वर की याद और उसके स्मरण के परिणामों के बारे […]

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    सूरए रअद, आयतें 27-28, (कार्यक्रम 413)

    Rate this post आइये पहले सूरए रअद की आयत संख्या 27 की तिलावत सुनते हैं।وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنْزِلَ عَلَيْهِ آَيَةٌ مِنْ رَبِّهِ قُلْ إِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَنْ يَشَاءُ وَيَهْدِي إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ (27)काफ़िर कहते हैं कि उनके अर्थात पैग़म्बर के पालनहार की ओर से उनके पास कोई चमत्कार क्यों नहीं आया है। कह दीजिए […]

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    सूरए रअद, आयतें 23-26, (कार्यक्रम 412)

    Rate this post आइये पहले सूरए रअद की आयत नंबर २३ और २४ की तिलावत सुनें।جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا وَمَنْ صَلَحَ مِنْ آَبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ وَالْمَلَائِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِمْ مِنْ كُلِّ بَابٍ (23) سَلَامٌ عَلَيْكُمْ بِمَا صَبَرْتُمْ فَنِعْمَ عُقْبَى الدَّارِ (24)(स्वर्ग में) सदैव रहने वाले बाग़ होंगे जिनमें वे, उनके पूर्वजों, उनकी पत्नियों तथा उनके अग्रजों में […]

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    सूरए रअद, आयतें 20-22, (कार्यक्रम 411)

    Rate this post आइये अब सूरए रअद की आयत संख्या 20 और 21 की तिलावत सुनते हैं।الَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَلَا يَنْقُضُونَ الْمِيثَاقَ (20) وَالَّذِينَ يَصِلُونَ مَا أَمَرَ اللَّهُ بِهِ أَنْ يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوءَ الْحِسَابِ (21)(वास्तविक बुद्धिजीवी) वे लोग हैं जो ईश्वरीय प्रतिज्ञा पर कटिबद्ध रहते हैं और वचनों को नहीं तोड़ते। (13:20) […]

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    सूरए रअद, आयतें 17-19, (कार्यक्रम 410)

    Rate this post आइये अब सूरए रअद की आयत संख्या 17 की तिलावत सुनते हैं।أَنْزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَسَالَتْ أَوْدِيَةٌ بِقَدَرِهَا فَاحْتَمَلَ السَّيْلُ زَبَدًا رَابِيًا وَمِمَّا يُوقِدُونَ عَلَيْهِ فِي النَّارِ ابْتِغَاءَ حِلْيَةٍ أَوْ مَتَاعٍ زَبَدٌ مِثْلُهُ كَذَلِكَ يَضْرِبُ اللَّهُ الْحَقَّ وَالْبَاطِلَ فَأَمَّا الزَّبَدُ فَيَذْهَبُ جُفَاءً وَأَمَّا مَا يَنْفَعُ النَّاسَ فَيَمْكُثُ فِي الْأَرْضِ كَذَلِكَ يَضْرِبُ اللَّهُ […]

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    सूरए रअद, आयतें 14-16, (कार्यक्रम 409)

    Rate this post आइये अब सूरए रअद की आयत संख्या 14 की तिलावत सुनते हैं।لَهُ دَعْوَةُ الْحَقِّ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِهِ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُمْ بِشَيْءٍ إِلَّا كَبَاسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى الْمَاءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَالِغِهِ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ (14)सत्य का निमंत्रण ईश्वर ही के लिए है और (अनेकेश्वरवाद) ईश्वर को छोड़कर जिन्हें […]

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    सूरए रअद, आयतें 11-13, (कार्यक्रम 408)

    Rate this post आइये अब सूरए रअद की आयत संख्या 11 की तिलावत सुनते हैं।لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِنْ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّى يُغَيِّرُوا مَا بِأَنْفُسِهِمْ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ وَمَا لَهُمْ مِنْ دُونِهِ مِنْ وَالٍ (11)हर एक (मनुष्य) के लिए उसके […]

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