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    सूरए आराफ़, आयतें 157-159, (कार्यक्रम 267)

    Rate this post आइये अब सूरए आराफ़ की आयत संख्या 157 की तिलावत सुनते हैंالَّذِينَ يَتَّبِعُونَ الرَّسُولَ النَّبِيَّ الْأُمِّيَّ الَّذِي يَجِدُونَهُ مَكْتُوبًا عِنْدَهُمْ فِي التَّوْرَاةِ وَالْإِنْجِيلِ يَأْمُرُهُمْ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَاهُمْ عَنِ الْمُنْكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبَاتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبَائِثَ وَيَضَعُ عَنْهُمْ إِصْرَهُمْ وَالْأَغْلَالَ الَّتِي كَانَتْ عَلَيْهِمْ فَالَّذِينَ آَمَنُوا بِهِ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَاتَّبَعُوا النُّورَ الَّذِي أُنْزِلَ مَعَهُ أُولَئِكَ […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 154-156, (कार्यक्रम 266)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 154 की तिलावत सुनते हैंوَلَمَّا سَكَتَ عَنْ مُوسَى الْغَضَبُ أَخَذَ الْأَلْوَاحَ وَفِي نُسْخَتِهَا هُدًى وَرَحْمَةٌ لِلَّذِينَ هُمْ لِرَبِّهِمْ يَرْهَبُونَ (154)और फिर जब मूसा का क्रोध ठंडा पड़ गया तो उन्होंने तौरैत की तख़्तियों को उठा लिया और उनमें अपने पालनहार से डरने वालों के लिए मार्गदर्शन […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 150-153, (कार्यक्रम 265)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 150 की तिलावत सुनते हैंوَلَمَّا رَجَعَ مُوسَى إِلَى قَوْمِهِ غَضْبَانَ أَسِفًا قَالَ بِئْسَمَا خَلَفْتُمُونِي مِنْ بَعْدِي أَعَجِلْتُمْ أَمْرَ رَبِّكُمْ وَأَلْقَى الْأَلْوَاحَ وَأَخَذَ بِرَأْسِ أَخِيهِ يَجُرُّهُ إِلَيْهِ قَالَ ابْنَ أُمَّ إِنَّ الْقَوْمَ اسْتَضْعَفُونِي وَكَادُوا يَقْتُلُونَنِي فَلَا تُشْمِتْ بِيَ الْأَعْدَاءَ وَلَا تَجْعَلْنِي مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ (150)और जब मूसा […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 147-149, (कार्यक्रम 264)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 147 की तिलावत सुनते हैंوَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآَيَاتِنَا وَلِقَاءِ الْآَخِرَةِ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (147)और जिन लोगों ने हमारी निशानियों और प्रलय की भेंट को झुठलाया, उनके सारे कर्म अकारत हैं। क्या इन्हें उसके अतिरिक्त कुछ और बदला दिया जाएगा, जैसे ये कर्म […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 143-146, (कार्यक्रम 263)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 143 की तिलावत सुनते हैंوَلَمَّا جَاءَ مُوسَى لِمِيقَاتِنَا وَكَلَّمَهُ رَبُّهُ قَالَ رَبِّ أَرِنِي أَنْظُرْ إِلَيْكَ قَالَ لَنْ تَرَانِي وَلَكِنِ انْظُرْ إِلَى الْجَبَلِ فَإِنِ اسْتَقَرَّ مَكَانَهُ فَسَوْفَ تَرَانِي فَلَمَّا تَجَلَّى رَبُّهُ لِلْجَبَلِ جَعَلَهُ دَكًّا وَخَرَّ مُوسَى صَعِقًا فَلَمَّا أَفَاقَ قَالَ سُبْحَانَكَ تُبْتُ إِلَيْكَ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُؤْمِنِينَ (143)और […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 141-142, (कार्यक्रम 262)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 141 की तिलावत सुनते हैं।وَإِذْ أَنْجَيْنَاكُمْ مِنْ آَلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ يُقَتِّلُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ وَفِي ذَلِكُمْ بَلَاءٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَظِيمٌ (141)(हे बनी इस्राईल!) याद करो उस समय को कि जब हमने तुम्हें फ़िरऔन वालों से मुक्ति दिलाई। वे तुम्हें बहुत बुरी यातनाएं देते थे, […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 136-140, (कार्यक्रम 261)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 136 की तिलावत सुनते हैं।فَانْتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ بِأَنَّهُمْ كَذَّبُوا بِآَيَاتِنَا وَكَانُوا عَنْهَا غَافِلِينَ (136)तो हमने उनसे प्रतिशोध लिया और उन्हें नदी में डुबो दिया क्योंकि उन्होंने हमारी निशानियों को झुठलाया था और वे उनकी ओर से निश्चेत थे। (7:136)इससे पहले हमने कहा था कि […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 132-135, (कार्यक्रम 260)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 132 की तिलावत सुनते हैंوَقَالُوا مَهْمَا تَأْتِنَا بِهِ مِنْ آَيَةٍ لِتَسْحَرَنَا بِهَا فَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ (132)और उन्होंने कहा, (हे मूसा!) तुम कोई भी निशानी (और चमत्कार) लाकर उसके द्वारा हम पर जादू करो, हम तुम पर ईमान लाने वाले नहीं हैं। (7:132)यह आयत और पवित्र […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 128-131, (कार्यक्रम 259)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 128 की तिलावत सुनते हैंقَالَ مُوسَى لِقَوْمِهِ اسْتَعِينُوا بِاللَّهِ وَاصْبِرُوا إِنَّ الْأَرْضَ لِلَّهِ يُورِثُهَا مَنْ يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَالْعَاقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ (128)मूसा ने अपनी जाति (के लोगों) से कहाः ईश्वर से सहायता चाहो और धैर्य रखो कि निसंदेह धरती ईश्वर की है और वो अपने बंदो में […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 124-127, (कार्यक्रम 258)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 124 और 125 की तिलावत सुनते हैं।لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ مِنْ خِلَافٍ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ (124) قَالُوا إِنَّا إِلَى رَبِّنَا مُنْقَلِبُونَ (125)(फ़िरऔन ने जादूगरों से कहा) में तुम्हारे हाथ-पांव विपरीत दिशाओं से कटवा दूंगा (और) फिर सबको सूली पर चढ़ा दूंगा। (7:124) उन्होंने उत्तर में कहा, निसंदेह […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 117-123, (कार्यक्रम 257)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 117 और 118 की तिलावत सुनते हैं।وَأَوْحَيْنَا إِلَى مُوسَى أَنْ أَلْقِ عَصَاكَ فَإِذَا هِيَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ (117) فَوَقَعَ الْحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ (118)और हमने मूसा पर वहि की (अर्थात उनके पास अपना विशेष संदेश भेजा) कि अपनी लाठी को फेंक दो तो सहसा ही […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 109-116, (कार्यक्रम 256)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 109 और 110 की तिलावत सुनते हैं।قَالَ الْمَلَأُ مِنْ قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ (109) يُرِيدُ أَنْ يُخْرِجَكُمْ مِنْ أَرْضِكُمْ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ (110)फ़िरऔन की जाति के सरदारों ने कहाः निसंदेह मूसा बड़ा दक्ष जादूगर है। (7:109) वह (तुम्हारा शासन छीन कर) तुम्हें तुम्हारी धरती से […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 103-108, (कार्यक्रम 255)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 103 की तिलावत सुनते हैं।ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ مُوسَى بِآَيَاتِنَا إِلَى فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَظَلَمُوا بِهَا فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُفْسِدِينَ (103)फिर उनके पश्चात हमने मूसा को फ़िरऔन तथा उसके सरदारों के पास अपनी निशानियों के साथ भेजा (परंतु) उन्होंने हमारी निशानियों (का इन्कार करते हुए उन) […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 97-102, (कार्यक्रम 254)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 97, 98 और 99 की तिलावत सुनते हैं।أَفَأَمِنَ أَهْلُ الْقُرَى أَنْ يَأْتِيَهُمْ بَأْسُنَا بَيَاتًا وَهُمْ نَائِمُونَ (97) أَوَأَمِنَ أَهْلُ الْقُرَى أَنْ يَأْتِيَهُمْ بَأْسُنَا ضُحًى وَهُمْ يَلْعَبُونَ (98) أَفَأَمِنُوا مَكْرَ اللَّهِ فَلَا يَأْمَنُ مَكْرَ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْخَاسِرُونَ (99)क्या बस्तियों के लोग इस बात से सुरक्षित हैं […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 94-96, (कार्यक्रम 253)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 94 और 95 की तिलावत सुनते हैं।وَمَا أَرْسَلْنَا فِي قَرْيَةٍ مِنْ نَبِيٍّ إِلَّا أَخَذْنَا أَهْلَهَا بِالْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ لَعَلَّهُمْ يَضَّرَّعُونَ (94) ثُمَّ بَدَّلْنَا مَكَانَ السَّيِّئَةِ الْحَسَنَةَ حَتَّى عَفَوْا وَقَالُوا قَدْ مَسَّ آَبَاءَنَا الضَّرَّاءُ وَالسَّرَّاءُ فَأَخَذْنَاهُمْ بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ (95)हमने किसी भी पैग़म्बर को किसी बस्ती में […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 90-93, (कार्यक्रम 252)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 90 और 91 की तिलावत सुनते हैं।وَقَالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لَئِنِ اتَّبَعْتُمْ شُعَيْبًا إِنَّكُمْ إِذًا لَخَاسِرُونَ (90) فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ (91)और हज़रत शुऐब की जाति के काफ़िर सरदारों ने कहाः यदि तुमने शुऐब का अनुसरण किया तो निश्चित रूप से घाटा […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 87-89, (कार्यक्रम 251)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 87 की तिलावत सुनते हैं।وَإِنْ كَانَ طَائِفَةٌ مِنْكُمْ آَمَنُوا بِالَّذِي أُرْسِلْتُ بِهِ وَطَائِفَةٌ لَمْ يُؤْمِنُوا فَاصْبِرُوا حَتَّى يَحْكُمَ اللَّهُ بَيْنَنَا وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ (87)और यदि तुम में से एक गुट उस वस्तु पर जिसके लिए मैं भेजा गया हूं अर्थात मेरे द्वारा लाए गए संदेश पर […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 83-86, (कार्यक्रम 250)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 83 और 84 की तिलावत सुनते हैं।فَأَنْجَيْنَاهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ (83) وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ مَطَرًا فَانْظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُجْرِمِينَ (84)तो हमने लूत और उनके परिवार को, सिवाय उनकी पत्नी के कि जो दंड में रहने वाली थी, मुक्ति दिला दी। (7:83) हमने उनपर […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 77-82, (कार्यक्रम 249)

    Rate this post आइये अब सूरए आराफ़ की आयत संख्या 77 और 78 की तिलावत सुनते हैं।فَعَقَرُوا النَّاقَةَ وَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ وَقَالُوا يَا صَالِحُ ائْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِنْ كُنْتَ مِنَ الْمُرْسَلِينَ (77) فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ (78)फिर उन्होंने उस ऊंटनी को मार डाला और अपने पालनहार के आदेश की अवहलेना की और […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 72-76, (कार्यक्रम 248)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 72 की तिलावत सुनते हैं।فَأَنْجَيْنَاهُ وَالَّذِينَ مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِنَّا وَقَطَعْنَا دَابِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآَيَاتِنَا وَمَا كَانُوا مُؤْمِنِينَ (72)तो हमने हूद और उनके साथियों को अपनी दया व कृपा से मुक्ति दिला दी। और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था हमने उनका वंश ही समाप्त […]

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