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    सूरए आराफ़, आयतें 67-71, (कार्यक्रम 247)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 67 की तिलावत सुनते हैं।قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي سَفَاهَةٌ وَلَكِنِّي رَسُولٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَمِينَ (67)(अपनी जाति के दुस्साहस के उत्तर में हज़रत हूद ने) कहा कि हे मेरी जाति वालो! मुझ में मूर्खता नहीं है बल्कि मैं तो ब्रह्मांड के पालनहार की ओर से (भेजा […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 63-66, (कार्यक्रम 246)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 63 की तिलावत सुनते हैंأَوَعَجِبْتُمْ أَنْ جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِنْ رَبِّكُمْ عَلَى رَجُلٍ مِنْكُمْ لِيُنْذِرَكُمْ وَلِتَتَّقُوا وَلَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ (63)क्या तुम्हें इस बात पर आश्चर्य है कि तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हारे पास तुम्हीं में से एक व्यक्ति द्वारा ज़िक्र अर्थात नसीहत आई है ताकि वह तुम्हें […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 57-62, (कार्यक्रम 245)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 57 की तिलावत सुनते हैंوَهُوَ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ حَتَّى إِذَا أَقَلَّتْ سَحَابًا ثِقَالًا سُقْنَاهُ لِبَلَدٍ مَيِّتٍ فَأَنْزَلْنَا بِهِ الْمَاءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِ مِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِ كَذَلِكَ نُخْرِجُ الْمَوْتَى لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ (57)और वह (ईश्वर) वही है जो हवाओं को अपनी दया की शुभ सूचना […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 53-56, (कार्यक्रम 244)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 53 की तिलावत सुनते हैंهَلْ يَنْظُرُونَ إِلَّا تَأْوِيلَهُ يَوْمَ يَأْتِي تَأْوِيلُهُ يَقُولُ الَّذِينَ نَسُوهُ مِنْ قَبْلُ قَدْ جَاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّ فَهَلْ لَنَا مِنْ شُفَعَاءَ فَيَشْفَعُوا لَنَا أَوْ نُرَدُّ فَنَعْمَلَ غَيْرَ الَّذِي كُنَّا نَعْمَلُ قَدْ خَسِرُوا أَنْفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَفْتَرُونَ (53)क्या ये लोग ईश्वरीय […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 49-52, (कार्यक्रम 243)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 49 की तिलावत सुनते हैंأَهَؤُلَاءِ الَّذِينَ أَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ اللَّهُ بِرَحْمَةٍ ادْخُلُوا الْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَا أَنْتُمْ تَحْزَنُونَ (49)क्या यह स्वर्ग वाले वही लोग हैं जिनके बारे में तुम नरक वाले सौगंध खाया करते थे कि इन्हें ईश्वर की दया प्राप्त नहीं होगी? अब देखो […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 44-48, (कार्यक्रम 242)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 44 की तिलावत सुनते हैंوَنَادَى أَصْحَابُ الْجَنَّةِ أَصْحَابَ النَّارِ أَنْ قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّا فَهَلْ وَجَدْتُمْ مَا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقًّا قَالُوا نَعَمْ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنٌ بَيْنَهُمْ أَنْ لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ (44)और स्वर्ग वाले, नरक वालों को पुकार कर कहेंगे, हमारे पालनहार ने हमसे जो […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 39-43, (कार्यक्रम 241)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 39 और 40 की तिलावत सुनते हैंوَقَالَتْ أُولَاهُمْ لِأُخْرَاهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِنْ فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنْتُمْ تَكْسِبُونَ (39) إِنَّ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآَيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّى يَلِجَ الْجَمَلُ فِي سَمِّ الْخِيَاطِ وَكَذَلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِمِينَ (40)और पहले […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 34-38, (कार्यक्रम 240)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 34वीं आयत की तिलावत सुनते हैंوَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ فَإِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ (34)और हर जाति के लिए एक नियम समय हे तो जब उनका समय आ जाए तो न वे उसे एक घड़ी के लिए पीछे टाल सकते हैं और न ही उसे आगे […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 31-33, (कार्यक्रम 239)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 31वीं आयत की तिलावत सुनते हैं।يَا بَنِي آَدَمَ خُذُوا زِينَتَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ وَكُلُوا وَاشْرَبُوا وَلَا تُسْرِفُوا إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُسْرِفِينَ (31)हे आदम की संतानो! हर मस्जिद के निकट (उपासना के समय) अपनी शोभा को धारण कर लो और खाओ पियो परंतु अपव्यय न को कि ईश्वर अपव्यय […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 28-30, (कार्यक्रम 238)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 28वीं आयत की तिलावत सुनते हैं।وَإِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً قَالُوا وَجَدْنَا عَلَيْهَا آَبَاءَنَا وَاللَّهُ أَمَرَنَا بِهَا قُلْ إِنَّ اللَّهَ لَا يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ أَتَقُولُونَ عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ (28)और जब वे कोई अशिष्ट कर्म करते हैं तो (उसके औचित्य में) कहते हैं, हमने अपने पूर्वजों को भी यही कर्म […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 24-27, (कार्यक्रम 237)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 24वीं और 25वीं आयतों की तिलावत सुनते हैं।قَالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ وَلَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَمَتَاعٌ إِلَى حِينٍ (24) قَالَ فِيهَا تَحْيَوْنَ وَفِيهَا تَمُوتُونَ وَمِنْهَا تُخْرَجُونَ (25)(ईश्वर ने आदम, हव्वा और शैतान से) कहाः उतर जाओ कि तुममें से कुछ, कुछ अन्य के शत्रु हो। और तुम्हारे […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 20-23, (कार्यक्रम 236)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 20वीं और 21वीं आयत की तिलावत सुनते हैंفَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُورِيَ عَنْهُمَا مِنْ سَوْآَتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَاكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ إِلَّا أَنْ تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِدِينَ (20) وَقَاسَمَهُمَا إِنِّي لَكُمَا لَمِنَ النَّاصِحِينَ (21)फिर शैतान ने उन दोनों को बहकाया ताकि उनके गुप्तांग […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 16-19, (कार्यक्रम 235)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 16वीं और 17वीं आयतों की तिलावत सुनते हैंقَالَ فَبِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأَقْعُدَنَّ لَهُمْ صِرَاطَكَ الْمُسْتَقِيمَ (16) ثُمَّ لَآَتِيَنَّهُمْ مِنْ بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ أَيْمَانِهِمْ وَعَنْ شَمَائِلِهِمْ وَلَا تَجِدُ أَكْثَرَهُمْ شَاكِرِينَ (17)शैतान ने कहाः तो जैसा तूने मुझे पथभ्रष्ट किया, मैं भी तेरे सीधे मार्ग पर बहकाने के लिए […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 11-15, (कार्यक्रम 234)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की 11वीं और 12वीं आयतों की तिलावत सुनते हैं।وَلَقَدْ خَلَقْنَاكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَاكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآَدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ لَمْ يَكُنْ مِنَ السَّاجِدِينَ (11) قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسْجُدَ إِذْ أَمَرْتُكَ قَالَ أَنَا خَيْرٌ مِنْهُ خَلَقْتَنِي مِنْ نَارٍ وَخَلَقْتَهُ مِنْ طِينٍ (12)और निसंदेह हमने तुम्हारी रचना की, फिर […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 6-10, (कार्यक्रम 233)

    Rate this post आइये सूरए आराफ़ की छठी और सातवीं आयतों की तिलावत सुनते हैंفَلَنَسْأَلَنَّ الَّذِينَ أُرْسِلَ إِلَيْهِمْ وَلَنَسْأَلَنَّ الْمُرْسَلِينَ (6) فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِمْ بِعِلْمٍ وَمَا كُنَّا غَائِبِينَ (7)तो निश्चित रूप से हम उन लोगों से प्रश्न करेंगे जिनकी ओर (हमारे) पैग़म्बर भेजे गये और (इसी प्रकार) हम (अपने) पैग़म्बरों से भी अवश्य ही प्रश्न करेंगे। […]

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    सूरए आराफ़, आयतें 1-5, (कार्यक्रम 232)

    Rate this post अब हम क़ुरआने मजीद के सातवें सूरे की व्याख्या आरंभ करेंगे जिसका नाम सूरए आराफ़ है, तो पहले इस सूरे की पहली और दूसरी आयतों की तिलावत सुनते हैं।بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ المص (1) كِتَابٌ أُنْزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُنْ فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِنْهُ لِتُنْذِرَ بِهِ وَذِكْرَى لِلْمُؤْمِنِينَ (2)ईश्वर के नाम से जो […]

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    सूरए अनआम, आयतें 162-165 (कार्यक्रम 231)

    Rate this post आइये सूरए अनआम की आयत संख्या 162 और 163 की तिलावत सुनते हैंقُلْ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ (162) لَا شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ (163)(हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि मेरी नमाज़, मेरी उपासनाएं, मेरा जीवन और मेरी मृत्यु सब कुछ ईश्वर के लिए है जो पूरे […]

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    सूरए अनआम, आयतें 158-161, (कार्यक्रम 230)

    Rate this post आइये सूरए अनआम की आयत संख्या 158 की तिलावत सुनते हैंهَلْ يَنْظُرُونَ إِلَّا أَنْ تَأْتِيَهُمُ الْمَلَائِكَةُ أَوْ يَأْتِيَ رَبُّكَ أَوْ يَأْتِيَ بَعْضُ آَيَاتِ رَبِّكَ يَوْمَ يَأْتِي بَعْضُ آَيَاتِ رَبِّكَ لَا يَنْفَعُ نَفْسًا إِيمَانُهَا لَمْ تَكُنْ آَمَنَتْ مِنْ قَبْلُ أَوْ كَسَبَتْ فِي إِيمَانِهَا خَيْرًا قُلِ انْتَظِرُوا إِنَّا مُنْتَظِرُونَ (158)क्या यह लोग इस बात […]

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    सूरए अनआम, आयतें 153-157, (कार्यक्रम 229)

    Rate this post आइये सूरए अनआम की 153वीं आयत की तिलावत सुनते हैं।وَأَنَّ هَذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيمًا فَاتَّبِعُوهُ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَبِيلِهِ ذَلِكُمْ وَصَّاكُمْ بِهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ (153)और निसंदेह यह मेरा सीधा मार्ग है, तो इसका अनुसरण करो और अन्य मार्गों पर मत चलो कि वे तुम्हें ईश्वर के मार्ग से दूर कर […]

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    सूरए अनआम, आयतें 150-152, (कार्यक्रम 228)

    Rate this post आइये सूरए अनआम की आयत नंबर 150 की तिलावत सुनते हैंقُلْ هَلُمَّ شُهَدَاءَكُمُ الَّذِينَ يَشْهَدُونَ أَنَّ اللَّهَ حَرَّمَ هَذَا فَإِنْ شَهِدُوا فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآَيَاتِنَا وَالَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآَخِرَةِ وَهُمْ بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ (150)(हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि ज़रा तुम अपने गवाहों को तो लाओ जो इस बात […]

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