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    सूरए बक़रह; आयतें १३-१४ (कार्यक्रम 7)

    Rate this post सूरए बक़रह की 13वीं आयत इस प्रकार हैः وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ آَمِنُوا كَمَا آَمَنَ النَّاسُ قَالُوا أَنُؤْمِنُ كَمَا آَمَنَ السُّفَهَاءُ أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ السُّفَهَاءُ وَلَكِنْ لَا يَعْلَمُونَ (13)और जब मुनाफ़िक़ों से कहा जाता है कि तुम भी अन्य लोगों की भांति ईमान ले आओ तो वे अकड़कर घमण्ड से कहते हैं कि […]

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    सूरए बक़रह; आयतें १०-१२(कार्यक्रम 6)

    Rate this post सूरए बक़रह की 10वीं आयत इस प्रकार हैःفِي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ فَزَادَهُمُ اللَّهُ مَرَضًا وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ (10)उन मुनाफ़िक़ों अर्थात मिथ्याचारियों के हृदय में रोग है और ईश्वर ने उनके रोग में वृद्धि कर दी है तथा उनके झूठ के कारण उनके लिए दण्ड है। (2:10) क़ुरआन की दृष्टि में […]

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    सूरए बक़रह; आयतें ३-६ (कार्यक्रम 4)

    Rate this post सूरए बक़रह की तीसरी आयत इस प्रकार हैःالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنْفِقُونَ (3)ये ऐसे लोग हैं जो ग़ैब (ईश्वर के गुप्त ज्ञान) पर बिना देखे ईमान लाते हैं, नमाज़ क़ाएम करते हैं तथा जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से दान देते हैं। (2:3) पवित्र क़ुरआन ने जीवन […]

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    सूरए बक़रह; आयतें १-२ (कार्यक्रम 3)

    Rate this post पिछले कार्यक्रम में आपने पवित्र क़ुरआन के सूरए हम्द की अन्तिम आयत तक की व्याख्या की गई थी। इस लेख में हम पवित्र क़ुरआन के दूसरे सूरे अर्थात सूरए बक़रह की व्याख्या आरंभ कर रहे हैं।बक़रह शब्द का अर्थ होता है गाय। बनी इस्राईल की गाय की कथा के कारण इस सूरे […]

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    भूमिका, सूरए हम्द आयत १ (कार्यक्रम 1)

    Rate this post   हमें ज्ञात है कि वर्तमान विकसित और औद्योगिक जगत में जो वस्तु भी बनाई जाती है उसके साथ उसे बनाने वाली कंपनी द्वारा एक पुस्तिका भी दी जाती है जिसमें उस वस्तु की तकनीकी विशेषताओं और उसके सही प्रयोग की शैली का उल्लेख होता है। इसके साथ ही उसमें उन बातों […]

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    क़ुरआन में तहरीफ़ नही

    Rate this post हमारा अक़ीदह यह है कि आज जो क़ुरआन उम्मते मुस्लेमाँ के हाथों में है यह वही क़ुरआन है जो पैगम्बरे इस्लाम (स.)पर नाज़िल हुआ था। न इस में से कुछ कम हुआ है और न ही इस में कुछ बढ़ाया गया है। पहले दिन से ही कातिबाने वही का एक बड़ा गिरोह […]

  •  क़ुरआन का व्याख्या
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    क़ुरआन का व्याख्या

    Rate this post क़ुरआन “फ़बश्शिर इबादि * अल्लज़ीना यसतमिऊना अलक़ौलाफ़ यत्तबिऊना अहसनहु[68]” यानी मेरे बन्दों को ख़ुशख़बरी दो,उन बन्दो को जो बातों को सुन कर उन में नेक बातों की पैरवी करते हैं। आज कल हमारे होज़ाते इल्मिया में उलूमे क़ुरआन एक वसी पैमाने पर पढ़ाया जा रहा है। और इन दुरूस में सब से […]

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