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    सूरए ताहा, आयतें 131-135, (कार्यक्रम 567)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 131वीं आयत की तिलावत सुनें। وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَى مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِنْهُمْ زَهْرَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَأَبْقَى (131) और (हे पैग़म्बर!) जो कुछ हमने लोगों के कुछ गुटों को (भौतिक अनुकंपाएं) दे रखी हैं उनको (आप आंख उठा कर भी) न […]

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    सूरए ताहा, आयतें 127-130, (कार्यक्रम 566)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 127वीं आयत की तिलावत सुनें। وَكَذَلِكَ نَجْزِي مَنْ أَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِنْ بِآَيَاتِ رَبِّهِ وَلَعَذَابُ الْآَخِرَةِ أَشَدُّ وَأَبْقَى (127) और इस प्रकार हम, सीमा का उल्लंघन करने और अपने पालनहार की आयतों पर ईमान न लाने वाले को बदला देते हैं और निश्चय ही प्रलय का दंड तो […]

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    सूरए ताहा, आयतें 121-126, (कार्यक्रम 565)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 121वीं और 122वीं आयतों की तिलावत सुनें। فَأَكَلَا مِنْهَا فَبَدَتْ لَهُمَا سَوْآَتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِنْ وَرَقِ الْجَنَّةِ وَعَصَى آَدَمُ رَبَّهُ فَغَوَى (121) ثُمَّ اجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَى (122) अन्ततः उन दोनों ने (शैतान के उकसावे में आकर) उस (वर्जित वृक्ष) में से खा लिया जिसके […]

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    सूरए ताहा, आयतें 115-120, (कार्यक्रम 564)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 115वीं आयत की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ عَهِدْنَا إِلَى آَدَمَ مِنْ قَبْلُ فَنَسِيَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُ عَزْمًا (115) और हमने इससे पहले आदम से वचन लिया था (कि वे शैतान के बहकावे में न आएंगे) किन्तु वे भूल गए और हमने उन्हें प्रतिज्ञा (की पूर्ति) में दृढ़ न […]

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    सूरए ताहा, आयतें 110-114, (कार्यक्रम 563)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 110वीं और 111वीं आयतों की तिलावत सुनें। يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِ عِلْمًا (110) وَعَنَتِ الْوُجُوهُ لِلْحَيِّ الْقَيُّومِ وَقَدْ خَابَ مَنْ حَمَلَ ظُلْمًا (111) जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है, ईश्वर उससे भली भांति अवगत है किन्तु वे […]

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    सूरए ताहा, आयतें 105-109, (कार्यक्रम 562)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 105वीं से लेकर 107वीं आयतों तक की तिलावत सुनें। وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْجِبَالِ فَقُلْ يَنْسِفُهَا رَبِّي نَسْفًا (105) فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًا (106) لَا تَرَى فِيهَا عِوَجًا وَلَا أَمْتًا (107) (हे पैग़म्बरः) वे आपसे पर्वतों के विषय में पूछते हैं। (कि प्रलय में उनका क्या होगा?) कह दीजिए कि […]

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    सूरए ताहा, आयतें 99-104, (कार्यक्रम 561)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 99 की तिलावत सुनें। كَذَلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنْبَاءِ مَا قَدْ سَبَقَ وَقَدْ آَتَيْنَاكَ مِنْ لَدُنَّا ذِكْرًا (99) (हे पैग़म्बरः) इस प्रकार हम आपके समक्ष विगत की घटनाओं के एक भाग का वर्णन करते हैं और हमने आपको अपने पास से (क़ुरआने मजीद जैसी एक […]

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    सूरए ताहा, आयतें 95-98, (कार्यक्रम 560)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 95 और 96 की तिलावत सुनें। قَالَ فَمَا خَطْبُكَ يَا سَامِرِيُّ (95) قَالَ بَصُرْتُ بِمَا لَمْ يَبْصُرُوا بِهِ فَقَبَضْتُ قَبْضَةً مِنْ أَثَرِ الرَّسُولِ فَنَبَذْتُهَا وَكَذَلِكَ سَوَّلَتْ لِي نَفْسِي (96) (मूसा ने) कहाः हे सामेरी! तेरा क्या मामला है? (तूने यह कार्य क्यों किया) (20:95) उसने […]

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    सूरए ताहा, आयतें 90-94, (कार्यक्रम 559)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 90 और 91 की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ قَالَ لَهُمْ هَارُونُ مِنْ قَبْلُ يَا قَوْمِ إِنَّمَا فُتِنْتُمْ بِهِ وَإِنَّ رَبَّكُمُ الرَّحْمَنُ فَاتَّبِعُونِي وَأَطِيعُوا أَمْرِي (90) قَالُوا لَنْ نَبْرَحَ عَلَيْهِ عَاكِفِينَ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَيْنَا مُوسَى (91) और निश्चित रूप से हारून इससे पहले उनसे कह चुके थे […]

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    सूरए ताहा, आयतें 85-89, (कार्यक्रम 558)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 85 की तिलावत सुनें। قَالَ فَإِنَّا قَدْ فَتَنَّا قَوْمَكَ مِنْ بَعْدِكَ وَأَضَلَّهُمُ السَّامِرِيُّ (85) (ईश्वर ने मूसा से) कहाः निश्चय ही हमने तुम्हारे (तूर पर्वत की ओर आने के) बाद तुम्हारी जाति (के लोगों) की परीक्षा ली और सामेरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया। (20:85) […]

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    सूरए ताहा, आयतें 81-84, (कार्यक्रम 557)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 81 की तिलावत सुनें। كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَلَا تَطْغَوْا فِيهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبِي وَمَنْ يَحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَبِي فَقَدْ هَوَى (81) हमने तुम्हें जो कुछ पवित्र वस्तुएं (रोज़ी स्वरूप) प्रदान की हैं, उनमें से खाओ किन्तु इसमें सीमा से आगे न बढ़ो कि तुम […]

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    सूरए ताहा, आयतें 77-80, (कार्यक्रम 556)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 77 की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَى مُوسَى أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًا لَا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَى (77) और हमने मूसा की ओर अपना विशेष संदेश वहि भेजा कि मेरे बन्दों को रातों रात (मिस्र से) लेकर निकल पड़ो और […]

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    सूरए ताहा, आयतें 72-76, (कार्यक्रम 555)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 72 और 73 की तिलावत सुनें। قَالُوا لَنْ نُؤْثِرَكَ عَلَى مَا جَاءَنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالَّذِي فَطَرَنَا فَاقْضِ مَا أَنْتَ قَاضٍ إِنَّمَا تَقْضِي هَذِهِ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا (72) إِنَّا آَمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِ وَاللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَى (73) जादूगरों ने (फ़िरऔन से) […]

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    सूरए ताहा, आयतें 67-71, (कार्यक्रम 554)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की आयत क्रमांक 67, 68 और 69 की तिलावत सुनें। فَأَوْجَسَ فِي نَفْسِهِ خِيفَةً مُوسَى (67) قُلْنَا لَا تَخَفْ إِنَّكَ أَنْتَ الْأَعْلَى (68) وَأَلْقِ مَا فِي يَمِينِكَ تَلْقَفْ مَا صَنَعُوا إِنَّمَا صَنَعُوا كَيْدُ سَاحِرٍ وَلَا يُفْلِحُ السَّاحِرُ حَيْثُ أَتَى (69) तो मूसा ने अपने मन में (जाति के […]

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    सूरए ताहा, आयतें 61-66, (कार्यक्रम 553)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 61वीं और 62वीं आयतों की तिलावत सुनें। قَالَ لَهُمْ مُوسَى وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُمْ بِعَذَابٍ وَقَدْ خَابَ مَنِ افْتَرَى (61) فَتَنَازَعُوا أَمْرَهُمْ بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّوا النَّجْوَى (62) मूसा ने उन लोगों से कहाः धिक्कार हो तुम पर! झूठ गढ़ कर उसे ईश्वर पर न थोपो […]

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    सूरए ताहा, आयतें 55-60, (कार्यक्रम 552)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 55वीं आयत की तिलावत सुनें। مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَى (55) हमने मिट्टी से ही तुम्हारी रचना की है और उसी में तुम्हें लौटाएंगे और एक बार फिर तुम्हें मिट्टी से बाहर निकालेंगे। (20:55) इससे पहले हमने कहा कि क़ुरआने मजीद ने एकेश्वरवाद और […]

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    सूरए ताहा, आयतें 49-54, (कार्यक्रम 551)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 49वीं और 50वीं आयतों की तिलावत सुनें। قَالَ فَمَنْ رَبُّكُمَا يَا مُوسَى (49) قَالَ رَبُّنَا الَّذِي أَعْطَى كُلَّ شَيْءٍ خَلْقَهُ ثُمَّ هَدَى (50) (फ़िरऔन ने) कहाः तो हे मूसा! तुम दोनों का पालनहार कौन है? (20:49) मूसा ने कहाः हमारा पालनहार वह है जिसने हर वस्तु की […]

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    सूरए ताहा, आयतें 43-48, (कार्यक्रम 550)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 43वीं और 44वीं आयतों की तिलावत सुनें। اذْهَبَا إِلَى فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَى (43) فَقُولَا لَهُ قَوْلًا لَيِّنًا لَعَلَّهُ يَتَذَكَّرُ أَوْ يَخْشَى (44) (हे मूसा! तुम और हारून) दोनों फ़िरऔन के पास जाओ की निश्चित रूप से वह उद्दंडी हो गया है। (20:43) और तुम दोनों उससे बड़े […]

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    सूरए ताहा, आयतें 37-42, (कार्यक्रम 549)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 37वीं से लेकर 39वीं आयत तक की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَى (37) إِذْ أَوْحَيْنَا إِلَى أُمِّكَ مَا يُوحَى (38) أَنِ اقْذِفِيهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِفِيهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوٌّ لِي وَعَدُوٌّ لَهُ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِنِّي وَلِتُصْنَعَ عَلَى عَيْنِي (39) और (हे […]

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    सूरए ताहा, आयतें 25-36, (कार्यक्रम 548)

    Rate this post आइये पहले सूरए ताहा की 25वीं से लेकर 28वीं आयत तक की तिलावत सुनें। قَالَ رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي (25) وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي (26) وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَانِي (27) يَفْقَهُوا قَوْلِي (28) (मूसा ने) कहा कि हे मेरे पालनहार! मेरे सीने को फैला दे (20:25) और मेरे लिए मेरे कार्य को सरल […]

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