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    सूरए इसरा, आयतें 45-48, (कार्यक्रम 487)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 45 और 46 की तिलावत सुनें। وَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآَنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآَخِرَةِ حِجَابًا مَسْتُورًا (45) وَجَعَلْنَا عَلَى قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَنْ يَفْقَهُوهُ وَفِي آَذَانِهِمْ وَقْرًا وَإِذَا ذَكَرْتَ رَبَّكَ فِي الْقُرْآَنِ وَحْدَهُ وَلَّوْا عَلَى أَدْبَارِهِمْ نُفُورًا (46) और (हे पैग़म्बर!) जब भी आप […]

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    सूरए इसरा, आयतें 41-44, (कार्यक्रम 486)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 41 की तिलावत सुनें। وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِي هَذَا الْقُرْآَنِ لِيَذَّكَّرُوا وَمَا يَزِيدُهُمْ إِلَّا نُفُورًا (41) और निश्चित रूप से इस क़ुरआन में (सत्य को) विभिन्न शैलियों में दोहरा कर बयान किया गया है कि वे इस से नसीहत प्राप्त करें किंतु (इससे सत्य की ओर […]

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    सूरए इसरा, आयतें 37-40, (कार्यक्रम 485)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 37 और 38 की तिलावत सुनें। وَلَا تَمْشِ فِي الْأَرْضِ مَرَحًا إِنَّكَ لَنْ تَخْرِقَ الْأَرْضَ وَلَنْ تَبْلُغَ الْجِبَالَ طُولًا (37) كُلُّ ذَلِكَ كَانَ سَيِّئُهُ عِنْدَ رَبِّكَ مَكْرُوهًا (38) और धरती पर घमंड से अकड़ कर न चलो, निश्चित रूप से न तो तुम धरती को […]

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    सूरए इसरा, आयतें 34-36, (कार्यक्रम 484)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 34 की तिलावत सुनें। وَلَا تَقْرَبُوا مَالَ الْيَتِيمِ إِلَّا بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ حَتَّى يَبْلُغَ أَشُدَّهُ وَأَوْفُوا بِالْعَهْدِ إِنَّ الْعَهْدَ كَانَ مَسْئُولًا (34) और अनाथ के माल के निकट (भी) न जाओ सिवाय सबसे उत्तम शैली के (जो उसके हित में हो) यहां तक कि वह […]

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    सूरए इसरा, आयतें 32-33, (कार्यक्रम 483)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 32 की तिलावत सुनें। وَلَا تَقْرَبُوا الزِّنَا إِنَّهُ كَانَ فَاحِشَةً وَسَاءَ سَبِيلًا (32) और व्यभिचार के (तो) निकट भी न जाओ की यह अत्यंत बुरा कर्म और बहुत बुरा मार्ग है।(17:32) इससे पूर्व की आयतों में ईश्वर ने लोगों को अज्ञानता के काल के बुहत […]

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    सूरए इसरा, आयतें 29-31, (कार्यक्रम 482)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 29 की तिलावत सुनें। وَلَا تَجْعَلْ يَدَكَ مَغْلُولَةً إِلَى عُنُقِكَ وَلَا تَبْسُطْهَا كُلَّ الْبَسْطِ فَتَقْعُدَ مَلُومًا مَحْسُورًا (29) और कभी भी अपने हाथ को (कंजूसी से) अपनी गर्दन से मत बांधो और न (ही दानशीलता से) उसे पूरा खुला छोड़ दो कि इस स्थिति में […]

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    सूरए इसरा, आयतें 25-28, (कार्यक्रम 481)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 25 की तिलावत सुनें। رَبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَا فِي نُفُوسِكُمْ إِنْ تَكُونُوا صَالِحِينَ فَإِنَّهُ كَانَ لِلْأَوَّابِينَ غَفُورًا (25) जो कुछ तुम्हारे भीतर है, उसके बारे में तुम्हारा पालनहार अधिक ज्ञान रखने वाला है। यदि तुम भले (बन कर) रहोगे तो निश्चित रूप से वह तौबा अर्थात […]

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    सूरए इसरा, आयतें 22-24, (कार्यक्रम 480)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 22 की तिलावत सुनें। لَا تَجْعَلْ مَعَ اللَّهِ إِلَهًا آَخَرَ فَتَقْعُدَ مَذْمُومًا مَخْذُولًا (22) अल्लाह के साथ किसी अन्य को पूज्य न ठहराओ कि तुम निंदनीय व असहाय बैठे रह जाओगे।(17:22) यह छोटी सी आयत इस संसार में अनेकेश्वरवाद के परिणामों की ओर संकेत करते […]

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    सूरए इसरा, आयतें 18-21, (कार्यक्रम 479)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 18 की तिलावत सुनें। مَنْ كَانَ يُرِيدُ الْعَاجِلَةَ عَجَّلْنَا لَهُ فِيهَا مَا نَشَاءُ لِمَنْ نُرِيدُ ثُمَّ جَعَلْنَا لَهُ جَهَنَّمَ يَصْلَاهَا مَذْمُومًا مَدْحُورًا (18) जो कोई तेज़ी से गुज़र जाने वाले (इस संसार) को चाहता है तो हम जिसे जितना चाहते हैं बड़ी तीव्रता से प्रदान […]

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    सूरए इसरा, आयतें 15-17, (कार्यक्रम 478)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 15 की तिलावत सुनें। مَنِ اهْتَدَى فَإِنَّمَا يَهْتَدِي لِنَفْسِهِ وَمَنْ ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَا وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَى وَمَا كُنَّا مُعَذِّبِينَ حَتَّى نَبْعَثَ رَسُولًا (15) जो कोई मार्गदर्शन प्राप्त करता है वह अपने हित में मार्गदर्शन प्राप्त करता है और जो कोई पथभ्रष्ट होता […]

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    सूरए इसरा, आयतें 11-14, (कार्यक्रम 477)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 11 की तिलावत सुनें। وَيَدْعُ الْإِنْسَانُ بِالشَّرِّ دُعَاءَهُ بِالْخَيْرِ وَكَانَ الْإِنْسَانُ عَجُولًا (11) और मनुष्य बुराई की इसी प्रकार इच्छा करता है जैसे वह भलाई को चाहता है और मनुष्य सदैव ही उतावला रहा है।(17:11) क़ुरआने मजीद में मनुष्य के बारे में उतावले और कंजूस […]

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    सूरए इसरा, आयतें 7-10, (कार्यक्रम 476)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 7 की तिलावत सुनें। إِنْ أَحْسَنْتُمْ أَحْسَنْتُمْ لِأَنْفُسِكُمْ وَإِنْ أَسَأْتُمْ فَلَهَا فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ الْآَخِرَةِ لِيَسُوءُوا وُجُوهَكُمْ وَلِيَدْخُلُوا الْمَسْجِدَ كَمَا دَخَلُوهُ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَلِيُتَبِّرُوا مَا عَلَوْا تَتْبِيرًا (7) यदि तुम कोई भलाई करोगे तो वह अपने लिए ही करोगे और यदि कोई बुराई करोगे तो […]

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    सूरए इसरा, आयतें 3-6, (कार्यक्रम 475)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की आयत नंबर 3 की तिलावत सुनें। ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ إِنَّهُ كَانَ عَبْدًا شَكُورًا (3) हे उन लोगों की पीढ़ियो जिन्हें हम नूह के साथ (नौका में) ले गए। निश्चित रूप से वे ईश्वर के अत्यंत कृतज्ञ दास थे।(17:3) इससे पहले वाली आयतों में बताया गया […]

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    सूरए इसरा, आयतें 1-2, (कार्यक्रम 474)

    Rate this post आइये पहले सूरए इसरा की पहली आयत की तिलावत सुनें। بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ .سُبْحَانَ الَّذِي أَسْرَى بِعَبْدِهِ لَيْلًا مِنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَى الَّذِي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ آَيَاتِنَا إِنَّه هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ (1) ईश्वर के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। (हर प्रकार की बुराई व किसी […]

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    सूरए नहल, आयतें 125-128, (कार्यक्रम 473)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 125 की तिलावत सुनें।ادْعُ إِلَى سَبِيلِ رَبِّكَ بِالْحِكْمَةِ وَالْمَوْعِظَةِ الْحَسَنَةِ وَجَادِلْهُمْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ (125)(हे पैग़म्बर! लोगों को) तत्वदर्शी बातों तथा अच्छे उपदेश द्वारा अपने पालनहार के मार्ग की ओर बुलाइये और (विरोधियों के […]

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    सूरए नहल, आयतें 120-124, (कार्यक्रम 472)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 120 की तिलावत सुनें।إِنَّ إِبْرَاهِيمَ كَانَ أُمَّةً قَانِتًا لِلَّهِ حَنِيفًا وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِكِينَ (120)निश्चित रूप से इब्राहीम (अपने आप में) एक समुदाय थे, वे ईश्वर के समक्ष विनम्र, उसके आज्ञापालक तथा (हर प्रकार की पथभ्रष्टता से दूर रहते हुए) सत्यवादी थे और वे अनेकेश्वरवादियों […]

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    सूरए नहल, आयतें 116-119, (कार्यक्रम 471)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 116 और 117 की तिलावत सुनें।وَلَا تَقُولُوا لِمَا تَصِفُ أَلْسِنَتُكُمُ الْكَذِبَ هَذَا حَلَالٌ وَهَذَا حَرَامٌ لِتَفْتَرُوا عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ إِنَّ الَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ (116) مَتَاعٌ قَلِيلٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ (117)और जो कुछ तुम्हारी ज़बानें झूठ कहती हैं, उनके चलते यह न […]

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    सूरए नहल, आयतें 112-115, (कार्यक्रम 470)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 112 और 113 की तिलावत सुनें। وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَرْيَةً كَانَتْ آَمِنَةً مُطْمَئِنَّةً يَأْتِيهَا رِزْقُهَا رَغَدًا مِنْ كُلِّ مَكَانٍ فَكَفَرَتْ بِأَنْعُمِ اللَّهِ فَأَذَاقَهَا اللَّهُ لِبَاسَ الْجُوعِ وَالْخَوْفِ بِمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ (112) وَلَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مِنْهُمْ فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ وَهُمْ ظَالِمُونَ (113)और ईश्वर (लोगों के पाठ […]

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    सूरए नहल, आयतें 108-111, (कार्यक्रम 469)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 108 और 109 की तिलावत सुनें। أُولَئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَى قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ وَأُولَئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ (108) لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآَخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ (109)ये वे लोग हैं जिनके हृदयों, कानों तथा आंखों पर ईश्वर ने ठप्पा लगा दिया है और यही लोग निश्चेत […]

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    सूरए नहल, आयतें 104-107, (कार्यक्रम 468)

    Rate this post आइये पहले सूरए नहल की आयत नंबर 104 और 105 की तिलावत सुनें। إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِآَيَاتِ اللَّهِ لَا يَهْدِيهِمُ اللَّهُ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ (104) إِنَّمَا يَفْتَرِي الْكَذِبَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِآَيَاتِ اللَّهِ وَأُولَئِكَ هُمُ الْكَاذِبُونَ (105)निश्चित रूप से जो लोग ईश्वरीय आयतों पर ईमान नहीं लाते, ईश्वर उनका मार्गदर्शन नहीं […]

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