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    क़ुरआने मजीद और औरतें

    Rate this post क़ुरआने मजीद और औरतें 1 बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम इस्लाम में औरतों के मौज़ू पर ग़ौर करने से पहले इस नुक्ता को पेशे नज़र रखना ज़रूरी है कि इस्लाम ने इन अफ़कार का मुज़ाहिरा उस वक़्त किया है जब बाप अपनी बेटी को ज़िन्दा दफ़्न कर देता था। और उस जल्लादीयत को अपने लिये बाईसे […]

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    क़ुरआन और अहकाम

    Rate this post तहारत يا ايها الذين امنوا كلوا من طيبات ما رزقناكم 1. ऐ मोमिनों हमारे दिये हुए पाक रिज़्क़ को खाओ।(बक़रह 172) وَلاَ تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّىَ يَطْهُرْنَ 1. औरतों से उस वक़्त नज़दीकी न करो जब तक वह हैज़ से पाक न हो जायें। (बक़रह 222) يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُواْ إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلوةِ […]

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    कुरआन की फ़साहत व बलाग़त

    Rate this post अल्लाह के पवित्र कुरआन मजीद, और प्रसिद्ध ग्रंथ एक ज्ञान व हुनर, फ़िक्री व अक़ली, मददी व मानबी के व्यतीत एक आसमानी मोज़ेज़ा भी है, क्योंकी कुरआन मजीद बूलन्द ध्वनी के साथ जनसाधारण को अमंत्रन किया है. कि हमारे उदाहरण एक पवित्र कुरआन को ले आएं, इस का कारण यह है की […]

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    कुरआनतर्हीफ़-परिवर्तन नहीं हुआ

    Rate this post इस चीज़ में कोई शक नहीं है, कि पृथ्वी के समस्त प्रकार मुस्लमान प्रसिद्ध व पवित्र ग्रंथ कुरआनमजीद पर एक विशेष यक़ीन रख़ते है। वेसात शुरु होने से पहले विभिन्न क़ौम और दल के अन्दर एक फ़साहत व वलाग़त का एक विशेश चर्चा था, या विशेश स्थान था और यह इस स्थान […]

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    क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का सब से बड़ा मोजज़ा है।

    Rate this post हमारा अक़ादह है कि क़ुरआने करीम पैग़म्बरे इस्लाम (स.)का सब से बड़ा मोजज़ा है और यह फ़क़त फ़साहत व बलाग़त, शीरीन बयान और मअनी के रसा होने के एतबार से ही नही बल्कि और मुख़्तलिफ़ जहतों से भी मोजज़ा है। और इन तमाम जिहात की शरह अक़ाइद व कलाम की किताबों में […]

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    तिलावत,तदब्बुर ,अमल

    Rate this post   क़ुरआने करीम की तिलावत अफ़ज़ल तरीन इबादतों में से एक है और बहुत कम इबादते ऐसी हैं जो इसके पाये को पहुँचती हैं। क्यों कि यह इल्हाम बख़्श तिलावत क़ुरआने करीम में ग़ौर व फ़िक्र का सबब बनती है और ग़ौर व फ़िक्र नेक आमाल का सरचश्मा है।

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    इनहेराफ़ी बहसें

    Rate this post हमारा मानना है कि मुस्लमानों को क़ुरआने करीम की आयात में तदब्बुर करने से रोकने के लिए हमेशा ही साज़िशें होती रही हैम इन साज़िशों के तहत कभी बनी उमय्यह व बनी अब्बास के दौरे हुकूमत में अल्लाह के कलाम के क़दीम या हादिस होने की बहसों को हवा दे कर मुस्लमानों […]

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    तावील का अर्थ

    Rate this post लेखक: हज़रत आयतुल्लाह मुहम्मद हादी मारेफ़त तावील का माद्दा ال یوول ای رجع رجوعا है और लौटने के मायना में है अत: तावील जो मज़ीद फ़ी है उसका अर्थ इरजा यानी लौटाना है। इरजा हर चीज़ के लिये लौटाने को कहते हैं और तावील केवल मफ़ाहीम के लिये प्रयोग होता है। तावील […]

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    क़ुरआने करीम की अहमियत व मौक़ेईयत

    Rate this post इस वक्त क़ुरआन करीम ही एक आसमानी किताब है जो इन्सान की दस्तरस में है। नहजुल बलाग़ा में बीस से ज़ियादा ख़ुतबात हैं जिन में क़ुरआने मजीद का तआर्रुफ़ और उस की अहमियत व मौक़ेईयत बयान हुई है बाज़ औक़ात आधे से ज़्यादा खु़त्बे में क़ुरआने करीम की अहमियत, मुसलमानों की ज़िन्दगी […]

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    क़ुरआन नातिक़ भी है और सामित भी

    Rate this post हज़रत अली (अ) एक तरफ़ तो फ़रमाते हैं कि यह किताब नातिक़ है जब कि दूसरे मक़ाम पर फ़रमाते हैं यह किताब सामित है नातिक़ नहीं इस को बोलने पर आमादा करना चाहिये और यह मैं हूँ जो क़ुरआन को तुम्हारे सामने बयान करता हूं। ख़ुत्ब ए 147 में यह तअबीर इस्तेमाल […]

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    क़ुरआने करीम हर दौर की दवा है

    Rate this post हज़रत तमाम मुशकिलात के हल के लिये क़ुरआने करीम का तआरुफ़ फ़रमाते हैं। क़ुरआन ही वह शफ़ा बख़्श दवा है जो तमाम दर्दों का दरमान और परेशानियों के लिये मरहम है। अलबत्ता यह वाज़ेह है कि दर्द की शिनाख्त और अहसास के बग़ैर इलाज या दरमान की बात करना बे फ़ाएदा है। […]

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    मआशरेती मुश्किलात का बेहतरीन हल

    Rate this post इस सिलसिले में हज़रत (अ.स.) पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का क़ौल नक़्ल फ़रमाते हैं कि आप फ़रमाते हैं तर्जुमा : जब कभी सियाह रात की मान्निद तुम्हें फ़ितने घेर लें तो क़ुरआन का दामन थामना। पस इज़्तिराब, परेशान, मुश्किलात, नाहम आहंगियाँ और बे सरो सामानियाँ तुम्हारे मआशिरे पर जब स्याह रात की मान्निद […]

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    मआशिरती उमूर में नज़्मो ज़ब्त

    Rate this post हज़रत फ़रमाते हैं : “नज़्मो माबैनाकुम” यानी मुसलमानों के माबैन रवाबित व नज़्मो ज़ब्त को सरोसामान बख़्शने वाला क़ुरआने हकीम है हर सियासी नज़्मो ज़ब्त में बड़ा हदफ़ मआशिरती नज़्मो ज़ब्त और अमनो आमान का क़ाएम करना होता है और यह बात क़तअन क़ाबिले इन्कार नहीं है। अलबत्ता समाजी व मआशिरती ज़िन्दगी […]

  • क़ुरआने करीम से वाबस्तगी बेनियाज़ी का बाइस है
    5 (100%) 1 vote[s]

    क़ुरआने करीम से वाबस्तगी बेनियाज़ी का बाइस है

    क़ुरआने करीम से वाबस्तगी बेनियाज़ी का बाइस है5 (100%) 1 vote[s] इसी ख़ुत्बे में हज़रत (अ.स.) इर्शाद फ़रमाते हैं>: “यक़ीन करो क़ुरआने करीम ऐसा नसीहत करने वाला और मौऐज़ा करने वाला है जो अपने पैरोंकारों से ख़्यानत नहीं करता ऐसा हादी है जो गुमराह नहीं करता ऐसा कलाम करने वाला है जो झूट नहीं बोलता […]

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    क़ुरआनी आईने और चराग़

    Rate this post हदीसे सक़लैन की रौशनी में “क़ुरआन और इतरत”ऐसे दो इलाही अतिये हैं जो एक दूसरे की तकमील करने वाले हैं। हिकमत व रविशे इलाही इस तरह क़रार पाई है कि लोग अहले बैत (अ.स.) के ज़रीए से मआरिफ़े क़ुरआन से आशना हों। बिनाबर ईन अल्लाह ने तालिबाने सआदत के लिये इमामत का […]

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    क़ुरआने करीम के पैरोकार के लिये इस्लाह व सआदत

    Rate this post यह ज़िन्दगी क्योंकि आख़िरत की खेती है लिहाज़ा इन्सान का तमाम हम्म व ग़म आख़िरत की सआदत होना चाहिये। बस इन्सान अपने आमाल व किरदार को क़ुरआने करीम और अहले बैत (अ.स.) के मआरिफ़ व उलूम के मुताबिक़ बनाए तो दुनिया व आख़िरत की इज़्ज़त सर बलन्दी हासिल कर सकता। ईमाम (अ.स.) […]

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    क़ुरआन ख़ैरख्वाह और नसीहत करने वाला है

    Rate this post ईमाम अली (अ.स.) फ़रमाते हैं : लोगों! क़ुरआन के जमा करने वालों और पैरोकारों में से हो जाओ और उस को अपने परवरदिगार के लिये दलील क़रार दो। अल्लाह को उस के कलाम के पहचानों। परवरदिगार के औसाफ़ को क़ुरआन के ज़रिए पहचानों क़ुरआन ऐसा राहनुमा है जो तुम्हें अल्लाह की तरफ़ […]

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    क़ुरआने मजीद नासिख़ व मंसूख़ का इल्म रखता है

    Rate this post क़ुरआने मजीद में अहकाम की आयतों के बीच कुछ ऐसी आयतें भी पाई जाती हैं जो नाज़िल होने के बाद पहले नाज़िल होने वाली अहकाम की आयतों की जगह ले लेती हैं जिन पर उस से पहले अमल होता था लिहाज़ा बाद वाली आयतों के नाज़िल होने के साथ ही पहले से […]

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    क़ुरआने मजीद में जर्य और इंतेबाक़

    Rate this post इस बात के पेशे नज़र कि क़ुरआने मजीद एक ऐसी किताब है जो सब के लिये और हमेशा बाक़ी रहने वाली है और उस की छुपी हुई बातें भी ज़ाहिर बातों की तरह जारी हैं और मुस्तक़बिल और माज़ी के साथ भी ज़मान ए हाल की तरह से हैं। जैसे एक किताब […]

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    क़ुरआने मजीद के अल्फ़ाज़ की तफ़सीर, उस की शुरुवात और तरक़्क़ी

    Rate this post क़ुरआने मजीद के अल्फ़ाज़ व इबारात और बयानात की तफ़सीर उस के नाज़िल होने के ज़माने से ही शुरु गो गई थी और ख़ुद पैग़म्बरे अकरम (स) क़ुरआन की तालीम उस के मअनों के बयानात और आयतों के मक़सद की वज़ाहत किया करते थे जैसा कि ख़ुदा वंदे आलम का इरशाद है: […]

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