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  • समाज में औरत का अहेम रोल
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    समाज में औरत का अहेम रोल

    समाज में औरत का अहेम रोलRate this post औरत के विषय को आज की दुनिया का एक महत्वपूर्ण विषय कहना चाहिये जो हर मुल्क, हर कल्चर, हर सुसॉईटी का विषय है लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज तक किसी भी मुल्क और सुसॉइटी में इस विषय पर इस तरह बात नहीं की गई और […]

  • संसार की सर्वश्रेष्ठ महिला हज़रत फ़ातेमा का शुभ जन्म दिवस
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    संसार की सर्वश्रेष्ठ महिला हज़रत फ़ातेमा का शुभ जन्म दिवस

    संसार की सर्वश्रेष्ठ महिला हज़रत फ़ातेमा का शुभ जन्म दिवसRate this post मुस्लिम समाज विश्व का दूसरा सब से बड़ा धार्मिक समाज है जो डेढ़ अरब जनसंख्या के साथ विस्तृत हो रहा है। वर्तमान युग में और नये अंतर्राष्ट्रीय परिवर्तनों के दृष्टिगत, इस्लामी समाज के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में मुसलमान महिलाओं को समाज […]

  • उदाहरणीय महिला 4
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    उदाहरणीय महिला 4

    उदाहरणीय महिला 4Rate this post पुस्तकः पश्चाताप दया की आलिंग्न लेखकः आयतुल्ला अनसारीयान   وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلاً لِلَّذِينَ آمَنُوا امْرَأَةَ فِرْعَوْنَ إِذْ قَالَتْ رَبِّ ابْنِ لِي عِندَكَ بَيْتاً فِي الْجَنَّةِ وَنَجِّنِي مِن فِرْعَوْنَ وَعَمَلِهِ وَنَجِّنِي مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ   “वा ज़राबल्लाहो मसालन लिललज़ीन आमानू इम्रअता फ़िरऔना इज़ क़ालत रब्बिबने ली इनदका बैतन फ़ील जन्नते वानज्जेनी […]

  • उदाहरणीय महिला 3
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    उदाहरणीय महिला 3

    उदाहरणीय महिला 3Rate this post पुस्तकः पश्चाताप दया की आलिंग्न लेखकः आयतुल्ला अनसारीयान जी हाँ, यह कैसे सम्भव है कि ईश्वर को फ़िरऔन से, सत्य को झूठ से, प्रकाश को अंधकार से, सही को ग़लत से, परलोक को लोक से, स्वर्ग को नर्क से तथा शालीनता (सआदत) को बदबख्ती से परिवर्तित कर ले। आसिया ने […]

  • उदाहरणीय महिला 2
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    उदाहरणीय महिला 2

    उदाहरणीय महिला 2Rate this post पुस्तकः पश्चाताप दया की आलिंग्न लेखकः आयतुल्ला अनसारीयान जबकि उसको इस बात का ज्ञान था कि इमान लाने के कारण उसकी सारी ख़ुशिया, स्थान छिन सकता है तथा उसके प्राण भी जा सकते है, परन्तु उसने हक़ को स्वीकार कर लिया और वह दयालु ईश्वर पर इमान ले आई, और […]

  • औरत इस्लाम की नज़र में (2)
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    औरत इस्लाम की नज़र में (2)

    औरत इस्लाम की नज़र में (2)Rate this post इस्लाम इन्सान को मानवता, इन्सानियत, उसकी असलियत और आध्यात्मिकता की चोटी तक पहुँचाता है इसलिये इस्लाम की नज़र में मर्द और औरत में कोई अन्तर नहीं है। इस्लाम में मर्द होने या औरत होने की कोई हैसियत नहीं है बल्कि अस्ल हैसियत इन्सानियत की है। इस्लाम कभी […]

  • औरत इस्लाम की नज़र में (1)
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    औरत इस्लाम की नज़र में (1)

    औरत इस्लाम की नज़र में (1)Rate this post अरब के उस ज़माने में जब हर तरफ़ जिहालत और गवार पन था और औरत सुसाइटी के लिये एक कलंक समझी जाती थी। रसूले इस्लाम स. नें आकर दुनिया को औरत की हैसियत   और उसकी श्रेष्ठता बताई और एक बेटी का इस तरह पालन पोषण किया […]

  • क़ुरआने मजीद और नारी
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    क़ुरआने मजीद और नारी

    क़ुरआने मजीद और नारीRate this post इस्लाम में नारी के विषय पर अध्धयन करने से पहले इस बात पर तवज्जो करना चाहिये कि इस्लाम ने इन बातों को उस समय पेश किया जब बाप अपनी बेटी को ज़िन्दा दफ़्न कर देता था और उस कुर्रता को अपने लिये इज़्ज़त और सम्मान समझता था। औरत दुनिया […]

  • क़ुरआने मजीद और नारी
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    क़ुरआने मजीद और नारी

    क़ुरआने मजीद और नारीRate this post इस्लाम में नारी के विषय पर अध्धयन करने से पहले इस बात पर तवज्जो करना चाहिये कि इस्लाम ने इन बातों को उस समय पेश किया जब बाप अपनी बेटी को ज़िन्दा दफ़्न कर देता था और उस कुर्रता को अपने लिये इज़्ज़त और सम्मान समझता था। औरत दुनिया […]

  • उस लिबास के पहनने का बयान जो औरतों और काफ़िरों के लिये मख़सूस है
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    उस लिबास के पहनने का बयान जो औरतों और काफ़िरों के लिये मख़सूस है

    उस लिबास के पहनने का बयान जो औरतों और काफ़िरों के लिये मख़सूस हैRate this post मर्दों के लिये औरतों का मख़सूस लिबास जैसे मक़ना, महरम (अंगिया) बुरक़ा वग़ैरह पहनना हराम है इसी तरह औरतों के लिये मर्दों का मख़सूस लिबास पहनना हराम है जैसे टोपी, अम्मामा, क़बा वग़ैरह और काफ़िरों का मख़सूस लिबास जैसे […]

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