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    (2) जिमाअ-Rate this post जिमाअ रोज़े को बातिल कर देता है चाहे अज़वे तनासुल(लिंग) सुपारी तक ही दाखिल हो और मनी(वीर्य) भी ख़ारिज न होई हो। (1594) अगर आला-ए-तनासुल(लिंग) सुपारी से कम दाखिल हो और मनी भी खारिज न हो तो रोज़ा बातिल नही होता लेकिन जिस शख़्स कि सुपारी कटी हुई हो अगर वह […]