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  •  इस्लाम के बाक़ी रहने में इमाम हुसैन अ.ह के आंदोलन की भूमिका
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    इस्लाम के बाक़ी रहने में इमाम हुसैन अ.ह के आंदोलन की भूमिका

    Rate this post हज़रत इमाम हुसैन अ. ने अपने रिश्तेदारों और साथियों के साथ इस्लाम को क़यामत तक के लिये अमर बना देने के लिए महान बलिदान दिया है। इस रास्ते में इमाम किसी क़ुरबानी से भी पीछे नहीं हटे, यहां तक ​​कि छः महीने के दूध पीते बच्चे को भी इस्लाम के लिए क़ुरबान […]

  •  कर्बला में औरतों की भूमिका
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    कर्बला में औरतों की भूमिका

    Rate this post कर्बला वालों की शहादत और रसूले इस्लाम स.अ के अहलेबैत को बंदी बनाये जाने के दौरान औरतों ने अपनी व़फादारी, त्याग व बलिदान द्वारा इस्लामी आंदोलन में वह रंग भरे हैं जिनकी अहमियत का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। बाप, भाई, पति और कलेजे के टुकड़ों को इस्लाम व कुरआन की बक़ा […]

  •  शबे आशूर के आमाल
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    शबे आशूर के आमाल

    Rate this post यह शब शबे आशूर अर्थात नौ मुहर्रम की रात है। इस रात की बहुत सी महत्वपूर्ण नमाज़ें और दुआऐं बयान हुई हैं। उनमें से एक, सौ रकअत नमाज़ है, जो इस रात पढ़ी जाती है उसकी हर रकअत में सूरए हम्द के बाद तीन बार सूरए तौहीद पढ़े और नमाज़ समाप्त करने […]

  •  आशूरा के आमाल
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    आशूरा के आमाल

    Rate this post रोज़े आशूरा मुहम्मद और आले मुहम्मद (स.अ.) पर मुसीबत का दिन है। आशूर के दिन इमाम हुसैन अ. ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना भरा घर और अपने साथियों को ख़ुदा की राह में क़ुर्बान कर दिया है, हमारे आइम्मा-ए-मासूमीन अ. ने इस दिन को रोने और शोक मनाने से विशेष […]

  •  सच्चा अज़ादार
    सच्चा अज़ादार
    3.25 (65%) 12 votes

    सच्चा अज़ादार

    सच्चा अज़ादार 3.25 (65%) 12 votes केताब का नामः सच्चा अज़ादार लेखकः मौहम्माद शुजाई अनुवादकः मौलाना सय्यद कौसर मुजतबा नक़वी प्रकाशकः कलचर हाऊस जमहुरी इस्लामी ईरान, नई दिल्ली

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    इमाम हुसैन अ.ने मदीने से अपना आंदोलन…..

    Rate this post इमाम जिस समय मदीने में थे उस समय तक मुआविया के मरने का ऐलान नहीं हुआ था उसके अलावा आम लोग अभी यज़ीद और मुआविया की हुकूमत के अंतर को अच्छी तरह से महसूस नहीं कर पा रहे थे …..   सवाल-2-  इमाम ह़ुसैन (अ स) ने मदीने से ही अपने आंदोलन […]

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    इमाम हुसैन अ. का मक्के जाना

    Rate this post मदीने से इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम के निकलने का कारण यह था कि यज़ीद ने मदीने के शासक वलीद इब्ने अतबा के नाम ख़त में हुक्म दिया था कि मेरे कुछ विरोधियों से (जिनमें से एक इमाम-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम भी थे) ज़रूर बैयत ली जाए   सवाल-2-  इमाम ह़ुसैन (अ स) ने मदीने से ही […]

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    हुसैनी आंदोलन-8

    Rate this post इमाम हुसैन के आंदोलन में शामिल न होने वालों में कुछ एसे लोग भी थे जो धर्म का पालन करते थे। एसा नहीं था कि वह सारे लोग दुनिया परस्त थे। उस समय के इस्लामी जगत में एसे महत्वपूर्ण लोग थे जो अपने कर्तव्य का निर्वाह करना चाहते थे किंतु कर्त्वय की […]

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    हुसैनी आंदोलन-7

    Rate this post दसवीं मोहर्रम की घटना, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का आंदोलन, उनका चेहलुम और अन्य धार्मिक अवसर इस्लामी इतिहास का वह महत्वपूर्ण मोड़ हैं जहां सत्य और असत्य का अंतर खुलकर सामने आ जाता है। इमाम हुसैन के बलिदान से इस्लाम धर्म को नया जीवन मिला और तथा इस ईश्वरीय धर्म के प्रकाशमान दीप […]

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    हुसैनी आंदोलन-6

    Rate this post इससे हमने बताया था कि किन परिस्थितियों में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने कर्तव्य के पालन का निर्णय किया था और यह कि इस प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न हो जाएं तो फिर कर्तव्य के पालन से पीछे नहीं हटा जा सकता। अलबत्ता इसके लिए शर्त यह है कि व्यक्ति को ज्ञान हो […]

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    हुसैनी आंदोलन-5

    Rate this post हुसैनी आंदोलन के विषय में हमारी चर्चा इस मोड़ तक पहुंची थी कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को अपने महान लक्ष्य तथा महान कर्तव्य का पूर्ण आभास था अतः उन्होंने जान दे देने की ठान ली। अब्दुल्लाह इब्ने जाफ़र, मोहम्मद इब्ने हनफ़िया और अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास यह लोग कोई आम मुसलमान नहीं थे […]

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    हुसैनी आंदोलन-4

    Rate this post दसवीं मोहर्रम की घटना, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का आंदोलन, उनका चेहलुम और अन्य धार्मिक अवसर इस्लामी इतिहास का वह महत्वपूर्ण मोड़ हैं जहां सत्य और असत्य का अंतर खुलकर सामने आ जाता है। इमाम हुसैन के बलिदा से इस्लाम धर्म को नया जीवन मिला और तथा इस ईश्वरीय धर्म के प्रकाशमान दीप […]

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    आशूरा- वास्तुकला

    Rate this post इस कार्यक्रम में हम कर्बला, इमाम हुसैन (अ) और उनके साथियों की शहादत की याद में निर्माण किए जाने वाले पवित्र स्थलों जैसे कि इमाम बाड़ा और सक्क़ा ख़ाने अर्थात प्याऊ का विवरण पेश करेंगे। समाज, परिवार और जलवायु परिस्थितियों की भांति धर्म भी मनुष्य की जीवन शैली को प्रभावित करता है। […]

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    ख़ून की विजय – 8

    Rate this post आज आशूर अर्थात दसवीं मुहर्रम है जो ऐसा दुखों भरा दिन है जिसका सामना करके इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों ने धर्म और मानवता की रक्षा की। अत्याचारी शासक का यज़ीद की हज़ारों की सेना ७२ लोगों को घेरे हुए थी और सत्य व असत्य की कभी न भूलने वाली युद्ध […]

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    ख़ून की विजय – 7

    Rate this post नवीं मोहर्रम सन 61 हिजरी क़मरी का दिन था जो तासूआ के नाम से जाना जाता है। इस दिन दोपहर हो चुकी थी और सूरज धीरे धीरे ढल रहा था। ख़ूंख़ार शत्रु ने कर्बला के मरुस्थल में अपनी गतिविधियां तेज़ कर दी थी और ऐसा लग रहा था कि किसी भी पल […]

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    ख़ून की विजय – 6

    Rate this post धर्म, कलात्मक दृश्यों एवं चरित्रों का प्रेरणा स्रोत है और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कलाकार को धार्मिक घटना की पुनः प्रस्तुति के लिए प्रेरित करता है। इस प्रभाव के उदाहरण को कर्बला की घटना एवं इमाम हुसैन (अ) और उनके 72 साथियों की शहादत की घटना से प्रभावित कला प्रवृत्ति में […]

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    ख़ून की विजय – 5

    Rate this post दसवीं मुहर्रम को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने युद्ध के समय भी सोई अंतरात्माओं को जगाने का प्रयास किया। उन्होंने ईश्वरीय मार्गदर्शक होने के अपने कर्तव्य की उस दशा में भी अनदेखी नहीं की। इसी लिए वे अज्ञानता के अंधकार में डूबे लोगों को प्रकाश में लाने के लिए संसार के बारे में […]

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    ख़ून की विजय – 4

    Rate this post इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम प्रत्येक अवसर पर लोगों का मार्गदर्शन करते और मायामोह व अंधकार में डूबे लोगों को जागरुक बनाते रहते थे। यही कारण है कि जब यज़ीदी सेना के एक सेनापति हुर ने उनका रास्ता रोका और उनसे कहा कि वे कूफ़ा नगर नहीं जा सकते तो इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने […]

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    ख़ून की विजय – 3

    Rate this post कूफ़े वालों को जब यह पता चला कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने यज़ीद की बैअत अर्थात उसका आज्ञापालन न करने का निर्णय किया है और वे पवित्र नगर मक्का में हैं तो उन्होंने इमाम हुसैन को बड़ी संख्या में पत्र भेजे। कूफ़े वालों की ओर से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को भेजे गए […]

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    ख़ून की विजय – 2

    Rate this post मोहर्रम का महीना इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के आंदोलन की याद दिलाता है। कर्बला के मैदान में हुसैनी आंदोलन सदैव के लिए अमर हो गया। हो सकता है कि आपके मन में यह प्रश्न उठे कि पैग़म्बरे इस्लाम के स्वर्गवास के पचास वर्ष बाद की कम अवधि में इस्लामी समाज कहां पहुंच गया […]

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