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  • इस्लामी संप्रदायों का परिचय

    जनवरी का तीसरा रविवार विश्व धर्म दिवस है इस अवसर पर हम इस्लामी संप्रदायो के विभाजन का वर्णन करेंगे।

    इस्लामी संप्रदायों के बीच धार्मिक विश्वासों या न्यायशास्त्र के कारण मतभेद पाया जाता हैं इसीलिए इस्लामी संप्रदाय दो भागो मे विभाजित होते है।

    पहला विभाजन: इस्लामी संप्रदायो का विभाजन धार्मिक विश्वास के आधार पर है हजरत मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारी के संबंध मे दो महत्वपूर्ण संप्रदाय है।

    एक सुन्नी समुदाय है, जो हजरत मोहम्मद साहब (पैगंबर) के कम्पेनियन (साथियों) को आदिल (न्यायिक) मानते हुए कहता है कि पैगंबर ने अपने उत्तराधिकारी का चयन राष्ट्र को सौंप दिया है और मदीने के लोगो की सहमति और वरिष्ठ सहाबा के अमल को अपने दावे पर तर्क के रूप मे बयान करते है।

    हजरत मौहम्मद के परिवार वालो के अनुयायी कहलाने वाले दूसरे समुदाय का मानना है कि पैगंबर की ओर से उत्तराधिकारी और इमामत के लिए अबू तालिब के पुत्र अली कर्रामल्लाहो वजह्हू और उनकी संतान के लिए एक विशेष लेख मौजूद है और अपनी बात को साबित करने के लिए हदीस ए ग़दीर और उन कथनो को तर्क के रूप मे पेश करते है जिनमे पैगंबर के उत्तराधिकारीयो की संख्या 12 बताई गई है, इसीलिए उन्हे इस्ना अशरी कहा जाता है।

    न्यायशास्त्र के आधार पर इस्लामी संप्रदाय पांच स्कूलो मे विभाजित होते है मिस्र के अल अज़हर विश्वविद्यालय के पूर्व शेख, शेख मोहम्मद शलतूत के फतवे के अनुसार पांच पंथो मे से किसी एक का पालन करने की अनुमति दी गई है।

    पाँच धर्म-संप्रदाय इस प्रकार हैं मालिकी, हनफ़ी, शाफ़ेई, हनबली और जाफेरी।

    मालिकी संप्रदाय: इस धर्म-संप्रदाय के संस्थापक अबी अब्दुल्लाह मालिक बिन अनस बिन अबि आमिर अल असबही है जिनका जन्म मदीने मे 93 हिजरि मे हुआ बचपन से ही पढ़ाई शुरू कर दी नाफे मौला अब्दुल्लाह बिन उमर के शिष्य थे सन् 179 हिजरि मे मदीना मे देहांत हुआ और इन्हे सऊदी के प्रसिद्ध कबरस्तान बक़ी मे दफनाया गया।

    हनफ़ी संप्रदाय: इसके संस्थापक इमाम अबू हनीफ़ा अल-नौमान बिन साबित बिन अल तैमी अल कूफी है इनका जन्म 8 हिजरि को हुआ वरिष्ठ न्यायशास्त्री होने के नाते सादृश्य के आधार पर अमल करते थे मंसूर अब्बासी ने उन्हे न्याय पालिका के पद का प्रस्ताव पेश किया किन्तु उन्होने उसे स्वीकार नही किया इसी वजह से मंसूर ने उन्हे जेल मे डाल दिया और 150 हिजरि को उनका निधन हो गया।

    शाफ़ेई संप्रदाय: इस संप्रदाय की आधार शिला इमाम अबि अब्दुल्लाह मोहम्मद बिन इद्रीस क़रशि शाफ़ेई द्वारा रखी गई जिनका जन्म 140 हिजरि मे ग़ज़्ज़े मे हुआ और वह अपनी मां के साथ दो वर्ष की आयु मे मक्का आ गए 55 वर्ष की आयु मे 204 हिजरि मे उन्होने इस दुनिया को छोड़ दिया।

    हनफ़ी संप्रदाय: यह संप्रदाय अहमद बिन हंबल बिन हेलाल अल ज़हली अल शैबानी से मंसूब है जिनका जन्म बग़दाद मे 164 हिजरि मे हुआ इन्होने हेजाज़ (सऊदी अरब), दमिश्क और यमन की यात्रा करके शिक्षा प्राप्त की और बगदाद मे इन्हे शाफ़ेई के शिष्य होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

    जाफेरी संप्रदाय: इस संप्रदाय के संस्थापक शिया समुदाय के छठे इमाम अबू अब्दुल्लाह जाफर बिन मोहम्मद अल बाक़िर को कहा जाता है। इनका जन्म 83 हिजरि मे हुआ वह एक महान विद्वान थे, जिनकी गरिमा की गवाही सभी ने दी, इनकी बहुत से किताबे है 4000 लोग उनके शिष्य है। जिन्होने मदीना और इराक मे निवास किया 148 हिजरि मे मंसूर अब्बासी के आदेश से उनकी हत्या कर दी गई और प्रसिद्ध कबरस्तान बक़ी मे दफनाया गया।