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    •  ख़ुत्बा – 17
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      ख़ुत्बा – 17

      Rate this post [ उन लोगों के बारे में जो उम्मत (जनता) के फ़ैसले (निर्णय) चुकाने के लिये मस्नदे क़ज़ा (न्याय की गद्दी) पर बैठ जाते हैं हालांकि वह उस के अहल (पात्र) नहीं होते ] तमाम लोगों में सबसे ज़ियादा (अधिक) ख़ुदा के नज़्दीक (समीप) मब्ग़ूज़ (द्वैष पात्र) दो शख्स (व्यक्ति) हैं। एक वह […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
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      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 223.8 (76%) 5 vote[s] नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22 मअलूम (विदित) होना चाहिये कि शैतान ने अपने गुरोह को भड़काना शुरुउ (आरम्भ) कर दिया और अपनी फ़ौजें (सेनायें) फ़राहम (उपलब्ध) कर ली हैं ताकि ज़ुल्म (अत्याचारी) अपनी इन्तिहा की हद (चरम सीमा) तक बातिल (अर्धम) अपने मक़ाम (स्थान) पर […]

    •  ख़ुत्बात
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      ख़ुत्बात

      Rate this post जब इस लशकर ने शहर में दाखिल होना चाहा तो वालिये बसरा उसमान इबने हुनैफ़ फ़ोज का एक दस्ता लेकर उन की रोक थाम के लिये बढ़े। जब आमना सामना हुआ तो दोनों फ़रीकों ने तलवारें न्यामों से निकाल लीं और एक दूसरे पर टूट पड़े, जब दोनों तरफ़ से अच्छी खासी […]

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