islamic-sources

  • ALL
    E-Books
    Articles

    date

    1. date
    2. title
    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 23
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 23
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 23

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 23Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 23 हर शख्स (व्यक्ति) के मक़सूम (भाग्य) में जो कम या ज़ियादा होता है, उस लेकर फ़र्माने क़ज़ा (अल्लाह का निश्चित फ़ैसला) आस्मान (आकाश) से लेकर ज़मीन (पृथ्वी) पर इस तरह उतरते हैं जिस तरह बारिश (वर्षा) के क़तरात (बूंदे)। लिहाज़ा अगर कोई […]

    •  नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार – 31
      नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार – 31
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार – 31

      नहजुल बलाग़ा में इमाम अली के विचार – 31Rate this post जब राजनीति की बात आती है तो बहुत से लोगों के मन में झूठ, मक्कारी और पाखंड जैसे मामले व शब्द आते हैं। क्योंकि इंसान को पूरे इतिहास में इस कटु वास्तविकता का सामना रहा है। अधिकांश सरकारें एवं व्यवस्थाएं नैतिक और मानवीय सिद्धांतों […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22
      3.8 (76%) 5 votes

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 223.8 (76%) 5 votes नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 22 मअलूम (विदित) होना चाहिये कि शैतान ने अपने गुरोह को भड़काना शुरुउ (आरम्भ) कर दिया और अपनी फ़ौजें (सेनायें) फ़राहम (उपलब्ध) कर ली हैं ताकि ज़ुल्म (अत्याचारी) अपनी इन्तिहा की हद (चरम सीमा) तक बातिल (अर्धम) अपने मक़ाम (स्थान) पर […]

    •  नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय
      नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचय

      नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचयRate this post नहजुल बलाग़ा का संक्षिप्त परिचयप्रिय पाठकों : आपने पवित्र किताब नहजुल बलाग़ा के बारे में सुना होगा और इस किताब को देखा भी होगा लेकिन नही मालूम कि इस किताब से आप कितने परिचित हैं और इसके बारे में कितना ज्ञान रखते हैं। नहजुल बलाग़ा अमीरूल मोमिनीन हज़रत […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 24 ” मुझे अपनी ज़िन्दगी की क़सम! मैं हक़ के खिलाफ़ चलने वालों और गुमराही में भटकने वालों से जंग में किसी क़िस्म की रु रिआयत और सुस्ती नहीं करुंगा। अल्लाह के बन्दो ! अल्लाह से डरो और उस के ग़ज़ब (क्रोध) […]

    •  ख़ुत्बा – 12
      ख़ुत्बा – 12
      Rate this post

      ख़ुत्बा – 12

      ख़ुत्बा – 12Rate this post जब ख़ुदा वन्दे आलम ने आप को जमल वालों पर ग़बा अता किया (विजय प्रदान की) तो उस मौके (अवसलर) पर आप के एक सहाबी (साथी) ने आप से अर्ज़ किया कि मेरे फुलां (अमुक) भाई भी यहां पर मौजूद होता तो वोह भी देखता कि अल्लाह ने आप को […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 25
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 25
      4 (80%) 5 votes

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 25

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 254 (80%) 5 votes नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 25 [ जब अमीरुल मोमिनीन को पय दर पय (लगातार) यह इत्तिलाआत मिलीं कि मुआविया के असहाब (मित्र) आप के मक़बूज़ा शहरों पर तसल्लुत (सत्ता) जमा रहे हैं और यमन के आमिल उबैदुल्लाह इब्ने अब्बास और सिपहसालारे लश्कर सईद इब्ने नमरान […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21 ”तुम्हारी मन्ज़िले मक़्सूद (गंतव्य स्थान) तुम्हारे सामने है। मौत की साअत (मृत्यु का क्षण) तुम्हारे अक़ब में (पीछे) है, जो तुम्हे आगे की तरफ़ (ओर) ले चल रही है। हल्के फुल्के रहो ताकि आगे बढ़ने वालों को पा सको। तुम्हारे अगलों […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 26
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 26
      4.5 (90%) 2 votes

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 26

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 264.5 (90%) 2 votes नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 26 अल्लाह तबारका व तआला ने मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम को तमाम जहानों को (उनकी बद आमालियों से) मुतनब्बेह करने वाला और अपनी वह्ई का अमीन बना कर भेजा। ऐ गुरोहे अरब ! उस वक्त तुम बद तरीन […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20
      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20
      Rate this post

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20

      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 20 ”जिन चीज़ों को तुम्हारे मरने वालों ने देखा है, अगर तुम भी उसे देख लेते तो घबरा जाते और सरासीमा व मुज़तरिब हो जाते और (हक़ की बात) सुनते और उस पर अमल करते। लेकिन जो उन्हों ने देखा है वह […]

    more