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    •  ख़ुत्बा – 13
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      ख़ुत्बा – 13

      Rate this post [अहले बसरा (बसरा निवासियों) की मज़म्मत (निन्दा) में ] तुम एक औरत (स्त्री) की सिपाह (सेना) में और एक चौपाए के ताबे (अधीन) थे। वह बिलबिलाया तो लब्बैक (आ गया आ गया) कहते हुए बढे और वह ज़ख्मी (आहत) हुआ तो तुम भाग खड़े हुए । तुम पस्त अख़लाक (नैतिक रुप से […]

    •  ख़ुत्बा – 14
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      ख़ुत्बा – 14

      Rate this post [ यह भी अहले बसरा की (निन्दा) में है ] तुम्हारी ज़मीन (समुन्दर के) पानी से क़रीब और आस्मान से दूर है। तुम्हारी अक़लें सुबुक (बुद्दियां तुच्छ) और दानाइयां खा़म (चतुराइयां कच्ची) हैं। तुम हर तीर अन्दाज़ का निशाना हर खाने वाला का लुक़मा, और शिकारी की सैद अफ़गनियों का शिकार हो […]

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