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    •  ख़ुत्बा – 16
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      ख़ुत्बा – 16

      Rate this post [ जब मदीने में आप की बैअत हुई तो फ़रमाया ] में अपने क़ौल (कथन) का ज़िम्मेदार और उस की सेहत (सत्यता) का ज़ामिन हूं। जिस शख्स (व्यक्ति) को उस के दीदेए इबरत (शिक्षा ग्राहण करने वाली दृष्टि) ने गुज़श्ता उकूबतें (गत यातनायें) वाज़ेह तौर (स्पष्ट रूप) से दिखा दी हों, उसे […]

    •  नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21
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      नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21

      Rate this post नहजुल बलाग़ा : ख़ुत्बा – 21 ”तुम्हारी मन्ज़िले मक़्सूद (गंतव्य स्थान) तुम्हारे सामने है। मौत की साअत (मृत्यु का क्षण) तुम्हारे अक़ब में (पीछे) है, जो तुम्हे आगे की तरफ़ (ओर) ले चल रही है। हल्के फुल्के रहो ताकि आगे बढ़ने वालों को पा सको। तुम्हारे अगलों को पिछलों का इन्तिज़ार कराया […]

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